दक्षिण अफ्रीका में कोविड-19 के नए वैरिएंट ने दी दस्तक, जानिए कितना खतरनाक है
जोहांसबर्ग, 30 अगस्त: भारत में कोरोना की तीसरी लहर के संभावित खतरे के बीच दक्षिण अफ्रीका में एक नए वैरिएंट सी.1.2 का पता चला है। इसकी पहचान कोविड के संभावित वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट (वीओआई) के तौर पर की गई है और इसे पैंगो वंश से जोड़ा गया है। दक्षिण अफ्रीका के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीजेज और क्वाजुलु-नैटल रिसर्च इनोवेशन एंड सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म के शोधकर्ताओं ने कहा है कि सी.1.2 का पता सबसे पहले वहां कोरोना की तीसरी लहर के दौरान मई, 2021 में चला था।

दक्षिण अफ्रीका के ज्यादातर प्रांतों में पाया गया
न्यूज18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मई के बाद यह वैरिएंट दक्षिण अफ्रीका के ज्यादातर प्रांतों में पाया गया है। यहां के अलावा यह वैरिएंट सात दूसरे देशों में भी मिल चुका है, जिसमें अफ्रीका, यूरोप, एशिया और ओशिनिया के देश भी शामिल हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक इस शोध की समीक्षा की जानी अभी बाकी है और इसे प्री-प्रिंट मेडआरएक्सआईवी सर्वर पर पोस्ट किया गया है। यह वैरिएंट सी.1 से विकसित हुआ है, जो दक्षिण अफ्रीका में कोरोना की पहली लहर के लिए जिम्मेदार था और आखिरी बार इस साल जनवरी में पाया गया था।

नया वैरिएंट बहुत ज्यादा म्यूटेट हो चुका है
अध्ययन में पाया गया है कि सी.1 के मुकाबले नया वैरिएंट बहुत ज्यादा म्यूटेट कर चुका है और चीन के वुहान से जो ऑरिजनल वायरस निकला था और उससे दुनिया भर में जितने भी वैरिएंट ऑफ कंसर्न या वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट निकले हैं, उससे कहीं ज्यादा बार यह म्यूटेट हुआ है। शोध के अनुसार सी.1.2 में हर साल 41.8 म्यूटेशन होते हैं। यह मौजूदा वैश्विक दर से करीब 1.7 गुना तेज है और एसएआरएस-सीओवी-2 के विकास के शुरुआती अनुमानों से 1.8 गुना ज्यादा तेज है। सी.1.2 में पहचाने गए करीब 52 फीसदी स्पाइक म्यूटेशन को पहले बाकी वैरिएंट ऑफ कंसर्न और वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट में देखा गया है।

अभी और ज्यादा रिसर्च का इंतजार
इसके अलावा, शोध में दक्षिण अफ्रीका में मासिक आधार पर सी.1.2 जीनोम की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। मई में जहां 0.2 फीसदी से बढ़कर जून में 1.6 फीसदी और जुलाई में 2.0 फीसदी हो गया। शोध से जुड़े लोगों के मुताबिक यह दक्षिण अफ्रीका में बीटा और डेल्टा में शुरुआती पहचान के दौरान देखे गए इजाफे के ही समान है। 20 अगस्त तक 80 सीक्वेंस सी.1.2 वंश से मेल खा चुके हैं और उसे ग्लोबल इनिशिएटिव ऑन शेयरिंग एवियन इंफ्लुएंजा डाटा पर लिस्ट किया जा चुका है। इस म्यूटेशन का कितना प्रभाव पड़ा है, इसके लिए और ज्यादा रिसर्च की जरूरत है, जिसमें एंटीबॉडी के खिलाफ इसके असर की जांच करना और क्या यह डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ लाभकारी है, यह शामिल है।(ऊपर की तस्वीरें-फाइल)

भारत में डेल्टा वैरिएंट का नया उप-वंश एवाई.12 मिला
इस दौरान भारत में भी डेल्टा वैरिएंट का नया उप-वंश एवाई.12 की मौजूदगी की सूचना दी गई है, जिसे हाल ही में इजरायल में क्लासीफाई किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पहले कई केस जिसके डेल्टा के रूप में पहचान की गई थी, उसे अब एवाई.12 के तौर पर क्लासीफाई किया गया है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से सोमवार सुबह जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 42,909 नए मामले सामने आए हैं। इस समय देश में ऐक्टिव केस लोड 3,76,324 है और रिकवरी रेट 97.51% है। देश में डेली पॉजिटिविटी रेट 3.02% बताया गया है।












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