अब जानलेवा नहीं होगा गर्भाशय कैंसर, बिना निकाले भी हो सकेगा इलाज!
वाशिंगटन। बढ़ते कैंसर के रोगियों से पूरा विश्व इस समय परेशान है, कैंसर के सबसे ज्यादा रोगी अमेरिका में हैं क्योंकि वहां के लोग रिजर्व फूड खाते हैं। वैसे तो कैंसर का हर प्रारूप तकलीफ देह होता है लेकिन गर्भाशय का कैंसर ऐसा रोग है जिसमें मरीज के बचने के चांसेज बहुत ज्यादा कम होते हैं, अगर मरीज को कैंसर का तुंरत पता नहीं चल पाता है तो उसका खामियाजा उसे अपनी जान देकर ही चुकाना पड़ता है। कैंसर का इलाज भी काफी दर्द भरा होता है। लेकिन अब एक राहत की खबर आ रही है।
वाशिंगटन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी जेनेटिक मटेरियल की खोज की है, जो कि कैंसर को कोशिकाओं को पहचान कर गर्भाशय से अलग कर देगा। अगर रोगी को फर्स्ट स्टेज में पता चल जायेगा तो बिना गर्भाशय को निकाले ही कैंसर को बाहर किया जा सकता है।शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए 296 गर्भाशय कैंसरों से एकत्र किए गए एमआरएनए और 1,839 नार्मल टिशूज को एकत्र किया था।
संकेत और लक्षण
अक्सर गर्भाशय कैंसर के बारे में लोगों को काफी देर से पता चलता है। महिलाएं अक्सर इन लक्षणों को देखकर अनदेखा कर देती हैं। सामान्य तौर पर इस रोग से ग्रसित महिलाओं की उम्र 45 के पार होती है। इस उम्र में महिलाओं को मोनोपार्ज होने शुरू हो जाते हैं। इसलिए जब रक्त-स्राव ज्यादा होने लगता है तो उन्हें भ्रम होने लगता है कि मासिक धर्म के जाने के दिन है जिसके कारण उन्हें दर्द और रक्त-स्राव हो रहा है और यहीं वो गलती कर जाती हैं, इसलिए अगर इस तरह की किसी भी समस्या से आप ग्रसित हों तो तुरंत अपनी डॉक्टर से संपर्क करें। वैसे WHO के मुताबिक पिछले पांच सालों में 30-40 के बीच की महिलाओं में यह रोग देखा गया है।
गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर का उपाय
आम तौर पर डॉक्टरों के पास बायोप्सी करने के आलवा कोई चारा नहीं होता है इसलिए गर्भाशय रिमूव करने के बाद महिलाएं संतान को जन्म नहीं दे सकती हैं।













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