400 साल बाद महारानी को हटाकर गणतंत्र बना बार्बाडोस

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ब्रिजटाउन, 30 नवंबर। मंगलवार 29 नवंबर की आधी रात से बार्बाडोस एक गणतंत्र राष्ट्र बन गाय. राजधानी ब्रिजटाउन के चैंबरलेन ब्रिज पर जमा सैकड़ों लोगों ने खुशियों से नारे लगाते हुए इस पल का स्वागत किया. भारी भीड़ के बीच हीरोज स्क्वायर पर बार्बाडोस का राष्ट्रगान बजाया गया और 21 तोपों की सलामी दी गई.

इस मौके पर ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स मौजूद थे. उनके देखते देखते महारानी एलिजाबेथ का ध्वज उतारा गया और देश को औपचारिक स्वतंत्रता मिल गई. प्रिंस चार्ल्स ने कहा कि उनकी मां ने इस मौके पर बधाई भेजी हैं.

उन्होंने कहा, "इस गणतंत्र की स्थापना एक नई शुरुआत है. हमारे अंधियारे भूतकाल से, इतिहास पर धब्बे के रूप में मौजूद दासता की दर्दनाक यातनाओं से निकलकर देश के लोगों ने बेमिसाल ताकत के साथ अपना रास्ता बनाया है."

55 साल पहले हुआ आजाद

ब्रिटेन की महारानी एलिजेबेथ द्वितीय अब भी 15 देशों की राष्ट्राध्यक्ष हैं. इनमें युनाइटेड किंग्डम के अलावा ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जमैका शामिल हैं. बार्बाडोस ने महारानी को राष्ट्राध्यक्ष के पद से हटाकर नई शुरुआत की है. उनकी जगह अब सैंड्रा मेसन देश की राष्ट्रपति होंगी.

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इस मौके पर सांस्कृति कार्यक्रम और भाषण तो हुए ही, बार्बाडियन गायिका रिहाना को राष्ट्रनायक भी घोषित को घोषित किया गया. बार्बाडोस में 1625 में एक ब्रिटिश जहाज पहुंचा था और उसने किंग जेम्स 1 के क्षेत्र घोषित कर दिया था. उसके बाद सैकड़ों साल तक यह देश अंग्रेजों का गुलाम रहा और 55 साल पहले आजादी का ऐलान किया. लेकिन महारानी तब भी देश की राष्ट्राध्यक्ष बनी रही.

बार्बाडोस की तरह अन्य देशों में भी इस तरह की बहस होती रहती है कि महारानी को वहां का राष्ट्राध्यक्ष होना चाहिए या नहीं. बार्बाडोस को गणतंत्र घोषित करने के अभियान का नेतृत्व करने वालीं प्रधानमंत्री मिया मोटली ने इस समारोह का नेतृत्व किया. देश के एक कवि विंस्टन फैरल ने समारोह में कहा, "अब हमारा वक्त है. गन्ने के खेतों से निकलकर हम अपने इतिहास पर दावा कर रहे हैं."

ब्रिजटाउन में एक नागरिक रास बिंगी ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं. मैं शराब और सिगरेट के धुएं के साथ नए गणतंत्र को सलामी दूंगा."

दासता का इतिहास

प्रिंस चार्ल्स ने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया कि इंग्लैंड का इतिहास दासता से दागी है लेकिन दोनों देशों के बीच मौजूदा दौर में अच्छे रिश्ते रहे हैं. ब्रिटेन गुलामी को बीते समय का पाप बताता है लेकिन कुछ लोग मुआवजे की मांग भी करते हैं.

बार्बाडोस में 1627 से 1833 के बीच छह लाख से ज्यादा लोग गुलाम बनाकर लाए गए थे. इन गुलामों से गन्ने के खेतों में काम कराया गया जिससे अंग्रेज जमींदारों ने भारी मुनाफा कमाया.

कार्यकर्ता डेविड डेनी ने गणतंत्रता दिवस का जश्न तो मनाया लेकिन इस मौके पर प्रिंस चार्ल्स को बुलाए जाने से वह खुश नहीं थे. उन्होंने कहा कि शाही परिवार ने सदियों तक गुलामों की बिक्री से लाभ उठाया है. डेनी ने कहा, "हमारा आंदोलन चाहता है कि शाही परिवार मुआवजा दे."

बार्बाडोस कॉमनवेल्थ का हिस्सा बना रहेगा, जो उन 54 देशों का समूह है जिन पर ब्रिटिश शाही परिवार ने शासन किया है. इनमें अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप और एशिया के देश शामिल हैं.

वीके/एए (रॉयटर्स)

Source: DW

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