कौन हैं इजराइली हमले में जान गंवाने वाले अल जजीरा के 5 पत्रकार? नेतन्याहू बोले-'पीछे हटने का नहीं है सवाल'
Israel vs Hamas: इज़राइल और हमास के बीच महीनों से जारी संघर्ष अब और गहराने लगा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि उनका देश पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि "हमारे पास कोई विकल्प नहीं है, हमें यह लड़ाई पूरी करनी ही होगी और हमास को पूरी तरह हराना होगा।"
येरुशलम में विदेशी मीडिया से बात करते हुए नेतन्याहू ने गाज़ा पर कब्जे की बात को खारिज किया और दावा किया कि उनका असली लक्ष्य गाज़ा को आज़ाद कराना है। इस बीच, गाज़ा में राहत सामग्री लेने पहुंचे 26 से ज्यादा लोगों की मौत और हवाई हमलों में बच्चों के मारे जाने की खबरों से हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इजराइली हमले में अल जजीरा के 5 पत्रकार की भी मौत हो गई है।

"झूठ के वैश्विक अभियान" पर निशाना
नेतन्याहू ने अंतरराष्ट्रीय आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि उनके प्लान को लेकर एक "वैश्विक झूठी मुहिम" चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि गाज़ा को निरस्त्र करना, वहां सुरक्षा पर इज़राइल का नियंत्रण रखना और गैर-इज़राइली नागरिक प्रशासन की स्थापना करना उनकी योजना का हिस्सा है।
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विदेशी पत्रकारों को एंट्री की अनुमति
प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने हाल में सेना को निर्देश दिए हैं कि गाज़ा में ज्यादा विदेशी पत्रकारों को लाया जाए। अब तक वहां सिर्फ मिलिट्री एंबेड्स के साथ ही रिपोर्टिंग की अनुमति थी।
इजरायली हमले में मारे गए 5 पत्रकार
गाजा शहर के अल-शिफा अस्पताल के पास इजरायली हमले में अल जज़ीरा के ये 5 पत्रकार मारे गए हैं। इसकी पुष्टि खुद अल जज़ीरा ने की है। मारे गए पत्रकारों में अल जज़ीरा के संवाददाता अनस अल-शरीफ और मोहम्मद क़रीक़ेह, साथ ही कैमरामैन इब्राहिम ज़हीर, मोअमेन अलीवा और मोहम्मद नौफ़ल भी शामिल हैं।
गाज़ा में मदद लेने पहुंचे लोगों पर गोलियां
हॉस्पिटल सूत्रों और चश्मदीदों के मुताबिक, गाज़ा में राहत सामग्री लेने पहुंचे कम से कम 26 फिलिस्तीनी मारे गए। दक्षिणी गाज़ा के मोराग कॉरिडोर और उत्तरी गाज़ा के ज़िकिम क्रॉसिंग के पास कई लोग तब मारे गए, जब वे मदद के ट्रकों का इंतजार कर रहे थे। सेंट्रल गाज़ा में भी भीड़ पर गोलियां चलने की खबरें हैं। हालांकि, इज़राइली सेना का कहना है कि उनके सैनिक इन घटनाओं में शामिल नहीं थे।
GHF केंद्रों के पास भीड़ में अफरातफरी
गाज़ा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन (GHF) के राहत केंद्रों के पास भी कई लोग मारे गए। यह फाउंडेशन अमेरिका और इज़राइल के समर्थन से चल रहा है, लेकिन शुरुआती दिनों से ही यहां अफरातफरी और हिंसा की घटनाएं हो रही हैं।
हवाई हमलों में सात की मौत
स्थानीय अस्पतालों के अनुसार, गाज़ा सिटी के मछुआरों के बंदरगाह और खान यूनिस में अलग-अलग हमलों में सात लोगों की मौत हुई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। इज़राइल का आरोप है कि हमास नागरिक इलाकों से हमले करता है।
भुखमरी से बच्चों की मौत
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, गाज़ा में ज्यादातर आबादी विस्थापित है और हालात अकाल जैसे हैं। सिर्फ शनिवार को दो बच्चों की मौत कुपोषण से हुई। युद्ध शुरू होने के बाद से भूख और कुपोषण से मरने वाले बच्चों की संख्या 100 हो गई है।
इज़राइल में विरोध प्रदर्शन तेज
गाज़ा सिटी पर नियंत्रण की योजना को लेकर इज़राइल के भीतर भी नाराज़गी बढ़ रही है। तेल अवीव में लाखों लोग सड़कों पर उतरे। कई बंधक परिवारों ने चेतावनी दी कि यह कदम उनके प्रियजनों की जान खतरे में डाल देगा।
बंधकों के परिजनों की अपील
अक्टूबर 2023 में हमास हमले के दौरान अपहृत 251 लोगों में से करीब 50 अब भी गाज़ा में हैं। इनमें से 20 के जिंदा होने का अनुमान है। एक बंधक की पत्नी, लिशाय मिरान-लावी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी युद्ध रोकने की अपील की।
पश्चिमी तट में सैन्य अभियान जारी रहेगा
इज़राइली रक्षा मंत्री इस्राइल कैट्ज़ ने कहा है कि पश्चिमी तट के शरणार्थी कैंपों में सेना की मौजूदगी साल के अंत तक बनी रहेगी। यहां इस साल अब तक 40,000 फिलिस्तीनी विस्थापित हुए हैं।
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