रूस की 'तबाही मचा देंगे' वाली धमकी से डरा पश्चिम, यूक्रेन में जर्मन टैंक भेजने पर NATO में ही फूट
पिछले साल 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूस ने हमला किया था और रूस ने कहा है, कि अगर पश्चिम को लगता है, कि वो रूस को रोक लेंगे, तो ये सिर्फ उनकी हलतफहमी है।

Russia-Ukraine War: रूस की खतरनाक धमकियों के बीच यूक्रेन को जर्मन टैंक भेजने के फैसले पर अमेरिक और उसके सहयोगियों के बीच सहमति नहीं बन पाई और जर्मनी में हुई बैठक फेल हो गई है। रिपोर्ट है, कि रूस की धमकियों की वजह से अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच जर्मन टैंकों को यूक्रेन भेजने पर फैसला नहीं हो पाया है। रूस ने धमकी दी थी, कि अगर जर्मन टैंक्स को यूक्रेन भेजा गया, तो फिर जंग की आग यूरोप में भी फैल सकती है।

जर्मन टैंकों पर नहीं बनी बात
यूक्रेन युद्ध को लेकर कल जर्मनी में स्थिति अमेरिकी रामस्टीन एयरबेस पर नाटो और करीब 50 देशों के सैन्य लीडर्स जमा हुए थे और एक बड़ी बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें यूक्रेन युद्ध का जायजा लेने के साथ साथ यूक्रेन में हथियारों की नई खेप भेजने को लेकर बातचीत की गई। लेकिन, इस बैठक के दौरान यूक्रेन में जर्मनी की लेपर्ड-2 टैंक भेजने को लेकर फैसला नहीं हो पाया। अलजजीरा के मुताबिक, इस बैठक में यूरोपीय नेताओं ने फिर से जर्मनी पर दबाव डालने की कोशिश की, कि वह मास्को की सेना को वापस खदेड़ने के लिए यूक्रेन को जर्मन निर्मित लेपर्ड-2 टैंकों की डिलीवरी के लिए ग्रीन सिग्नल दे दे, लेकिन जर्मनी इसके लिए तैयार नहीं हुआ। जर्मन टैंकों को यूक्रेन में भेजने पर बात नहीं बनने के बाद माना जा रहा है, कि ये नाटो में आए दरार दो दर्शाता है।

टैंक भेजने पर क्यों नहीं बनी सहमति?
बैठक के दौरान जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस बात से इनकार किया, कि बर्लिन एकतरफा तरीके से यूक्रेन को लेपर्ड-2 टैंकों की डिलीवरी रोक रहा है, लेकिन उन्होंने कहा, कि अगर सहयोगियों के बीच आम सहमति बनती, तो उनकी सरकार इस मुद्दे पर तेजी से आगे बढ़ने के लिए तैयार थी। उन्होंने कहा, कि "टैंक के भेजे जाने के पीछे काफी अच्छी वजहें थीं और नहीं भेजे जाने के पीछे भी कई अच्छी वजहें हैं और युद्ध की पूरी स्थिति को परखने के बाद, जो पूरे एक साल से चल रहा है, हर स्थिति को सावधानी से जांचने की जरूरत है।" हालांकि, जर्मन मंत्री ने विस्तार से नहीं बताया, कि कौन कौन से सहयोगी हथियार भेजने के पक्ष में नहीं थे। आपको बता दें, कि जर्मनी पर लेपर्ड-2 टैंक भेजने के लिए भारी दबाव बन रहा है और जर्मनी के रक्षा मंत्री पिस्टोरियस ने साफ तौर पर कहा, कि "एक संयुक्त गठबंधन है, जो टैंक भेजे जाने के खिलाफ है, जबकि जर्मनी रास्ते में खड़ा है, ये धारणा गलत है।"

हथियार भेजने पर क्या बोला रूस?
इस बीच रूस ने कहा है, कि यूक्रेन में युद्धक टैंक भेजने के फैसले से भी युद्ध में कुछ नहीं बदलेगा और हथियार भेजने वाले कीव को सहयोगी अपने भ्रम पर पछताएंगे, कि उनका इस तरह का कदम युद्ध के मैदान में विजयी साबित होगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने संवाददाताओं से कहा, कि "हमने बार-बार कहा है, कि इस तरह की आपूर्ति से मौलिक रूप से कुछ नहीं बदलेगा, लेकिन यूक्रेन के लोगों के लिए समस्याएं बढ़ेंगी।" वहीं, ये पूछे जाने पर, कि क्या यूक्रेन को एडवांस हथियारों की सप्लाई का मतलब ये है, कि संघर्ष बढ़ रहा है, तो रूसी प्रवक्ता ने कहा, कि "हम इस संघर्ष में नाटो देशों की बढ़ती अप्रत्यक्ष और कभी-कभी प्रत्यक्ष भागीदारी को देख रहे हैं। रूस ने साफ तौर पर कहा, कि "हम नाटकीय भ्रम की स्थिति देखते हैं, कि यूक्रेन युद्ध के मैदान पर सफल हो सकता है। यह पश्चिमी समुदाय का एक नाटकीय भ्रम है, जो एक से अधिक बार उनके अफसोस का कारण बनेगा।"
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यूक्रेन में परमाणु युद्ध की चेतावनी
वहीं, रूस के पूर्व राष्ट्रपति और पुतिन के 'दाहिने हाथ' माने जाने वाले दिमित्री मेदवेदेव ने चेतावनी दी है, कि यूक्रेन को लगातार हो रही पश्चिमी हथियारों की आपूर्ति से परमाणु युद्ध हो सकता है। मेदवेदेव ने टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप पर चेतावनी देते हुए लिखा है, कि "पारंपरिक युद्ध में हारने वाली परमाणु शक्ति, परमाणु युद्ध के प्रकोप को भड़का सकती है।" उन्होंने कहा कि, "परमाणु शक्तियों ने उन संघर्षों को कभी नहीं खोया है, जिनपर उनका भाग्य निर्भर करता है।" उन्होंने सीधे शब्दों में चेतावनी दी है, कि अगर पश्चिम के नेताओं के पास थोड़ा सा भी दिमाग है, तो उन्हें ये बातें जान लेनी चाहिए। वहीं, क्रेमलिन ने दिमित्री मेदवेदेव की बातों का समर्थन किया है और कहा है, कि दिमित्री मेदवेदेव ने परमाणु युद्ध पर जो भी कहा है, वो क्रेमलिन के रूख के मुताबिक ही कहा है। लिहाजा, एक्सपर्ट्स परमाणु युद्ध की चिंता को खारिज नहीं कर रहे हैं।

यूक्रेन की प्रतिक्रिया
वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने शुक्रवार को कहा, कि पश्चिम के पास यूक्रेन को युद्धक टैंक देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। जेलेंस्की ने अपने शाम के संबोधन में कहा, कि "साझेदार अपने रवैये में सिद्धांतवादी हैं, वे यूक्रेन का उतना ही समर्थन करेंगे, जितना हमारी जीत के लिए आवश्यक है।" उन्होंने आगे कहा, कि "हां, हमें अभी भी आधुनिक टैंकों की आपूर्ति के लिए संघर्ष करना होगा, लेकिन हर दिन, हम इसे और अधिक स्पष्ट करते हैं, कि और कोई विकल्प नहीं है, कि टैंकों को लेकर फैसला लिया जाना चाहिए"। वहीं, अमेरिकी रक्षा प्रमुख लॉयड ऑस्टिन ने सहयोगियों से यूक्रेन के लिए समर्थन बढ़ाने का आग्रह किया है।












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