75 हजार किलोमीटर की रफ्तार से आ रहा ऐस्टरॉइड, स्टैचू ऑफ लिबर्टी से तीन गुना ज्यादा बड़ा, नासा अलर्ट
नासा ने कहा है कि, स्टैट्यू ऑफ लिबर्टी से तीन गुना ज्यादा बड़ा ऐस्टरॉइड पृथ्वी के करीब आ रहा है। जिसको लेकर चेतावनी जारी की गई है।
वॉशिंगटन, दिसंबर: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक बार फिर से ऐस्टरॉइड को लेकर चेतावनी जारी की है और कहा है कि, स्टैचू ऑफ लिबर्टी से तीन गुना ज्यादा बड़ा ऐस्टरॉइड पृथ्वी की तरफ काफी तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। नासा ने कहा है कि, बुधवार देर रात कर पृथ्वी के काफी करीब से ये विशालकाय ऐस्टरॉइड गुजरेगा। पृथ्वी के पास आने वाले इस ऐस्टरॉइड का नाम वैज्ञानिकों ने 2017एई3 रखा है।

75 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा रफ्तार
नासा को पता चला है कि, स्टैचू ऑफ लिबर्टी से तीन गुना ज्यादा रफ्तार के इस ऐस्टरॉइड की रफ्तार 75 हजार किलोमीटर प्रति घंटा है और ये रफ्तार भीषण है। नासा ने कहा है कि, ये ऐस्टरॉइड पृथ्वी की कक्षा की तरफ काफी तेजी से बढ़ रहा है। नासा द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, ये ऐस्टरॉइड करीब 353 मीटर चौड़ा है और आशंका है कि, ये ऐस्टरॉइड पृथ्वी के करीब 19 लाख मील तक आ सकता है।

पृथ्वी के पास से गुजर रहा ऐस्टरॉइड
हमारे आपके लिए पृथ्वी से 19 लाख मील की दूरी काफी ज्यादा हो सकती है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि, ये दूरी पृथ्वी के लिए काफी कम है। एक तरह से वैज्ञानिकों ने कहा है कि, इस दूरी से ऐस्टरॉइड का गुजरने का मतलब है, पृथ्वी के ठीक बगल से गुजरना। और इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह से पृथ्वी के पास मौजूद गुरूत्वाकर्षण की शक्ति, जिससे आशंका बनी रहती है कि, ये ऐस्टरॉइड पृथ्वी की कक्षा खिंचा चला आ सकता है और धरती से टकरा सकता है। द सन ने अपनी रिपोर्ट में इस ऐस्टरॉइड का आकार अमेरिका के स्टैट्यू ऑफ लिबर्टी के आकार से तीन गुना बताया है। वहीं, वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर ये ऐस्टरॉइड अपना रास्ता बदलता है, तो सीधे पृथ्वी से टकरा सकता है।

पृथ्वी से टकरा सकते हैं 22 ऐस्टरॉइड
नासा ने अपनी रिपोर्ट में कई ऐस्टरॉइड को बेहद खतरनाक श्रेणी में रखा है और हाल के दिनों में पृथ्वी की कक्षा में दाखिल होने वाला ये पांचवां ऐस्टरॉइड है। आपको बता दें कि ऐस्टरॉइड को क्षुद्रग्रह भी कहा जाता है। नासा ने कहा है कि वो करीब 2 हजार से ज्यादा ऐस्टरॉइड पर नजर रख रहा है, जो आने वाले वक्त में पृथ्वी के लिए खतरा बन सकते हैं। नासा ने कहा है कि आने वाले 100 सालों में 22 ऐसे ऐस्टरॉइड हैं, जो पृथ्वी की कक्षा में शामिल होने के बाद पृथ्वी से टकरा सकते हैं। नासा का कहना है कि ऐसे ऐस्टरॉइड जो पृथ्वी से 46.5 मिलियन मील करीब आ जाता है, उसे वो डेंजरस कैटोगिरी में रखता है। नासा का सेंट्री सिस्टम इस तरह के ऐस्टरॉइड पर नजर रखता है।

क्या होते हैं ऐस्टरॉइड ?
आपको बता दें कि ऐस्टरॉइड वो बड़ी बड़ी अंतरिक्ष चट्टाने होती हैं जो किसी ग्रह की तरह हीं सूर्य का परिक्रमा करती हैं लेकिन इनका आकार काफी छोटा है। लेकिन अगर ये ऐस्टरॉइड किसी ग्रह से टकरा जाएं तो वहां भूचाल आ जाता है। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि हमारे गैलेक्सी में ज्यादातर ऐस्टरॉइड मंगल और बृहस्पति की कक्षा में पाए जाते हैं, वहीं कई ऐस्टरॉइड दूसरे ग्रहों की कक्षा में भी पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि करीब साढ़े 4 अरब साल पहले जब हमारे गैलेक्सी का निर्माण हुआ था तब गैस और धूल की वजह से ऐसे बादल, जो किसी कारणवस कोई ग्रह नहीं बन सके, वो कालांतर में क्षुद्रगह बन गये। ऐस्टरॉइड साधारणतया गोल नहीं होते हैं और इसका आकार किसी भी तरह का हो सकता है।

तुंगुस्का नदी की घटना
आपको बता दें कि 30 जून 1908 में रूस के साइबेरिया में तुंगुस्का नदी के पास एक बहुत बड़ा विस्फोट था। नासा के मुताबिक, आधुनिक इतिहास में पृथ्वी के वायुमंडल में एक बड़े उल्कापिंड का पहला प्रवेश तुंगुस्का घटना के रूप में ही हुआ था। कहते हैं कि कई मील उपर हवा में जोरदार विस्फोट हुआ था और उस विस्फोट की ताकत इतनी थी कि 2,150 वर्ग किमी के क्षेत्र में तकरीबन 8 करोड़ पेड़ खत्म हो गए थे। नासा का कहना है कि उस दिन एक उल्कापिंड साइबेरिया के एक दूरदराज के हिस्से से टकराया था, लेकिन जमीन पर नहीं पहुंचा था। बताया जाता है कि उल्का पिंड में हवा में ही विस्फोट हो गया और सैकड़ों मील चौड़े क्षेत्र में पेड़ों पर कहर बन कर टूटा। इस विस्फोट में हजारों जंगली जानवर भी मारे गए थे। वैज्ञानिकों का कहना था कि अगर वो ऐस्टरॉइड आबादी वाले इलाके में गिरता, तो हजारों लोगों की जान जा सकती थी।












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