अब मंगल ग्रह पर ऑक्सिजन बनाएगी नासा !

जी हां, नासा अपने मार्स 2020 मिशन में इस्तेमाल किए जाने वाले सात उपकरणों को लांच करने वाली है। नासा ने 'क्यूरोसिटी' रोवर के साथ सफलतापूर्वक प्रयोग किया है। लिहाजा, नासा के नए 'रोविंग लेबोरेटरी' भी लांच करने जा रही है। इस रोवर में बिजली की आपूर्ति एक रेडियोआइसोट्रॉपी जेनेरेटर से की जाएगी, जो रोवर को जीवन पर्यंत अर्थात कम से कम एक मंगल वर्ष तक सक्रिय रखेगा। यह अवधि पृथ्वी के 687 दिनों के बराबर है। नासा का यह प्रयोग अभूतपूर्व विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अगला कदम होगा।
रोवर में भेजे जाने वाले सात उपकरणों में से एक है मार्स ऑक्सिजन आईएसआरयू एक्सपेरिमेंट(MOXIE)। यह उपकरण मंगल के वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड लेकर ऑक्सिजन पैदा करेगा। 1.9 बिलियन में तैयार हुआ यह रोवर एक एक्सपेरिमेंट के तहत मार्स के वायुमंडल में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सिजन में तबदील करेगा।
नासा के सहयोगी प्रबंधक विलियम एच ग्रेसटेनमर ने कहा कि मंगल ग्रह पर उत्पन्न किया यह ऑक्सिजन रॉकेट ईंधन बनाने के काम आ सकती है, क्योंकि मंगल पर वापसी के लिए भी ईंधन लेकर जाना बहुत मंहगा एवं वजनी हो जाता है। वहीं, भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों को इसकी मदद से सांस लेने में आसानी हो सकेगी।
यह उपकरण प्रति घंटे लगभग एक आउन्स का तीन-चौथाई ऑक्सिजन बनाएगा। वहीं, अगर यह तकनीक सफलतापूर्वक काम कर गया तो इससे लगभग सौ गुणा ज्यादा बड़े उपकरण को लांच किया जाएगा। लेकिन इसकी लांचिंग 2030 के लगभग हो पाएगी, जिसके दो सालों के बाद अंतरिक्ष यात्री भेजे जाएगें। वह उपकरण पर्याप्त मात्रा में ऑक्सिजन बना पाएंगे, जिससे अंतरिक्ष यात्री मंगल ग्रह से वापसी यात्रा कर सकेंगे।
नासा को जनवरी महीने में मार्स 2020 मिशन के लिए विज्ञान एवं खोज प्रौद्योगिकी उपकरणों के 58 प्रस्ताव मिले थे। नासा ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में प्रस्तावों का मिलना इस बात का संकेत हैं कि इसमें लोगों की गहरी रुचि है। इस प्रयोग के जरिए मंगल के वायुमंडल से संबंधित कई जानकारियां विकसित कर पाएंगे।












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