मोदी का पाक को कड़ा संदेश, सार्क में रहें या न रहें कोई फर्क नहीं
काठमांडू। पाकिस्तान ने काठमांडू में 18वें सार्क सम्मेलन के दौरान तीन अहम सौदों में रुकावट डालने की पूरी कोशिश की लेकिन भारत ने भी साफ कर दिया है कि पाक रहे या जाए, सार्क में शामिल इन डील और दोस्ती को मजबूत करने की दिशा में सारे प्रयास होंगे। पाक के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ जो 28 को अपने वतन रवाना होने वाले थे अब 27 को यानी की आज ही पाक रवाना हो जाएंगे।

पाक का इंकार
इससे पहले उन्होंने साफ कर दिया है कि तीन अहम मुद्दों जिनमें सार्क देशों की आपस में कनेक्टिविटी, बिजली का एक ग्रिड और बिजली का व्यापार एवं रोड और रेल नेटवर्क मुहैया कराने में वह असफल है। नवाज शरीफ की मानें तो पाक इन प्रोजेक्ट्स को अपने देश के अंदरुनी हालातों के साथ ही इनसे जुड़ी आतंरिक प्रक्रियाओं को पूरा न कर पाने की वजह से पूरा नहीं कर सकता है।
इंकार पर मोदी का जवाब
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट की मानें तो नरेंद्र मोदी ने पाक को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि पाक रहे या जाए लेकिन सार्क के देशों के बीच संबंध मजबूत करने के लिए वह प्रतिबद्ध हैं। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि पाक सार्क का हिस्सा रहे या न रहे।
हिंदुस्तान टाइम्स की इस खबर के मुताबिक मोदी ने पाक के खिलाफ अपने उसी कड़े रुख को आगे बढ़ाया है जिसकी झलक उन्होंन 26 नंवबर को दे दी थी। मोदी ने इस क्षेत्र में मौजूद क्षेत्रीय कमजोरियों का जिक्र करते हुए इसे मजबूत करने की बात कही थी।
मोदी ने 26 नवंबर को जो संदेश दिया उससे साफ है कि वह सार्क देशों के बीच आपसी व्यापार, सहयोग और सभी क्षेत्रों में मदद पर जोर देने की बात उन्होंने कही थी।
सब आगे बढ़ रहे हैं लेकिन भारत पाक नहीं
जो भाषण मोदी ने दिया उसमें साफ था कि भारत का सार्क में शामिल सभी देशों के साथ सहयोग बढ़ रहा है। जहां दिल्ली-ढाका के बीच रोड लिंक, रेल बिजली और व्यापार का नेटवर्क को मजबूत हो रहा है, नेपाल के साथ बिजली और इसी तरह के संबंध भारत आगे बढ़ा रहा है। वहीं श्रीलंका के साथ भारत ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया है और भारत मालद्वीप की तेल की जरूरतों को पूरा कर रहा है।
अफगानिस्तान की बात करें तो पिछले कुछ दिनों के दौरान इसके साथ भारत की करीबी और बढ़ी है। लेकिन सिर्फ पाकिस्तान ही ऐसा देश है जिसके साथ लाख कोशिशों के बावजूद कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पा रही है। मोदी ने साफ कर दिया कि यह आपसी संबंध और मजबूत होंगे चाहे कोई सार्क में रहे या न रहे।












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