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नगालैंड फ़ायरिंग: भारतीय सेना पर क्या बोला चीनी मीडिया और किसने बताया इसे ‘मानव हत्या’

नगालैंड में मारे गए लोगों को सोमवार को दफ़नाया गया
Reuters
नगालैंड में मारे गए लोगों को सोमवार को दफ़नाया गया

पूर्वोत्तर भारत के नगालैंड में सेना की कार्रवाई और उसके बाद भड़की हिंसा में कुल 13 आम लोगों के मारे जाने को पूरी दुनिया के प्रमुख मीडिया ने अपने यहां पर जगह दी है.

भारत के पड़ोसी देश चीन के मीडिया ने तो इस घटना को बेहद प्रमुखता से छापा है और वहां के सोशल मीडिया पर एक समय यह मुद्दा छाया रहा. कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है.

चीन के सरकारी मीडिया के साथ-साथ कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपल्स डेली और न्यूज़ एग्रीगेटर सोहू ने 5 दिसंबर की इस घटना को शिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी के हवाले से प्रकाशित किया है.

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चीन के मीडिया में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के हवाले से बताया गया है कि कैसे गोलीबारी की घटना के बाद भारतीय सेना और स्थानीय लोगों में झड़पें हुईं हैं.

इसी तरह से चीन के सरकारी चैनल चाइना सेंट्रल टेलीविज़न (CCTV) ने चर्चित न्यूज़ पोर्टल सिना के हवाले से रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें भारतीय मीडिया के हवाले से बताया गया है कि गोलीबारी की घटना के बाद स्थानीय लोगों के साथ भारतीय सेना के बीच 'जमकर झड़पें' हुईं.

मीडिया रिपोर्ट ने 'मानव हत्या' शब्द का किया इस्तेमाल

द ग्लोबल टाइम्स के चीनी संस्करण में 6 दिसंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में इस घटना को 'मानव हत्या' बताते हुए कहा है कि 'इसने भारत सरकार और शीर्ष सैन्य अधिकारियों का ध्यान खींचा है.'

इसकी रिपोर्ट में बताया गया है कि इस घटना पर कई दलों ने 'कड़ा विरोध' जताया है और राहुल गांधी के बयान को भी जगह दी है. भारत के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने आम नागरिकों के मारे जाने को 'हृद्यविदारक' बताया था.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि राहुल गांधी ने भारत सरकार से जवाब भी तलब किया है.

सोहू में उसी दिन छपे एक लेख का शीर्षक था, 'ग़लत लोगों की पहचान की? सेना द्वारा घात लगाकर की गई फ़ायरिंग में कम से कम 12 भारतीय नागरिकों की मौत.'

इसमें कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के नियंत्रण के बाद भारत में सुरक्षा व्यवस्था लगातार बदतर हो रही है और 'भारतीय आतंकवादी न केवल अफ़ग़ानिस्तान में हमलों में भाग ले रहे हैं बल्कि वो भारत भी लौट रहे हैं.'

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इसमें लिखा है, "अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति जिस तरह से बदली है उसके कारण भारत की आतंकवाद निरोधी स्थिति ख़राब हुई है. न केवल यह चिंताएं बढ़ी हैं कि तालिबान कश्मीर क्षेत्र में घुसपैठ कर सकता है बल्कि ऐसे बहुत से साक्ष्यों ने साबित किया है कि इस्लामिक स्टेट के चरमपंथी बलों ने बहुत से भारतीयों को भागीदारी के लिए आकर्षित किया है."

सोशल मीडिया यूज़र्स ने की अंतरराष्ट्रीय निंदा की मांग

चीन के सरकारी नियंत्रण वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर भी इस घटना को लेकर कई यूज़र्स ने टिप्पणी की है. कई यूज़र्स ने यह भी सवाल पूछा है कि अमेरिका, यूरोपीय संघ और पश्चिमी देशों ने इस घटना की निंदा क्यों नहीं की है.

'भारतीय सुरक्षाबलों ने ग़लती से 13 आम लोगों को मार डाला' शीर्षक से हैशटैग भी इस प्लेटफ़ॉर्म पर ख़ूब ट्रेंड हुआ. 6 दिसबंर को त़क़रीबन 10 करोड़ बार इस हैशटैग को देखा गया.

एक यूज़र ने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा, "अमेरिका: यह व्यक्तिगत मामला है. हम मानवाधिकारों के मामले में दख़ल नहीं देते." इस पोस्ट पर 4,700 से अधिक लाइक थे.

इसी पोस्ट पर रिप्लाई किया गया था, "एक अलग नज़रिए से देखें तो अगर यह शिंजियांग में होता तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसकी कड़ी निंदा करता."

एक अन्य यूज़र ने लिखा, "अमेरिका: यह सिर्फ़ एक मामला है. यूरोपीय संघ: मैं अंधा हूं."

एक अन्य यूज़र ने लिखा, "भारतीय माओवादियों चलो, केवल वामपंथ ही भारत को बचा सकता है."

नगालैंड घटना की चर्चा संसद में

सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नगालैंड में शनिवार को हुई घटना पर संसद मे बयान दिया. उन्होंने इसे ग़लत पहचान का मामला बताया.

अमित शाह ने कहा, "भारतीय सेना को नागालैंड के मोन ज़िले के तिरु इलाक़े के पास उग्रवादियों की आवाजाही की सूचना मिली थी. इसके आधार पर सेना के 21 पैरा कमांडो के एक दस्ते ने 4 दिसंबर की शाम को संदिग्ध क्षेत्र में एंबुश लगाया था."

"एंबुश के दौरान एक वाहन, एंबुश के स्थान के समीप पहुंचा. उसे रुकने का इशारा और प्रयास किया गया. रुकने की बजाए वाहन ने उस जगह से तेज़ी से निकलने का प्रयास किया. इसके उपरांत इस आशंका पर कि वाहन में संदिग्ध विद्रोही जा रहे थे वाहन पर गोली चलाई गई, जिससे वाहन में सवार आठ व्यक्तियों में से छह की मौत हो गई. बाद में ये ग़लत पहचान का मामला पाया गया. जो दो लोग घायल हुए थे, उन्हें सेना द्वारा ही इलाज़ हेतु नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया."

अमित शाह ने बताया है कि 13 में से छह नागरिकों की मौत की वजह ग़लत पहचान है. हालांकि, सात अन्य नागरिकों की मौत को उन्होंने सेना और आम लोगों की झड़प के दौरान सेना द्वारा आत्मरक्षा की कोशिश के तौर पर जोड़कर दिखाया है.

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उन्होंने कहा, "यह समाचार प्राप्त होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने सेना की टुकड़ी को घेर लिया. दो वाहनों को जला दिया. और उन पर हमला किया गया. इसके परिणाम स्वरूप सुरक्षाबल के एक जवान की मृत्यु हो गयी. तथा कई अन्य जवान घायल हो गए."

"अपनी सुरक्षा में और भीड़ को तितरबितर करने के लिए सुरक्षा बलों को गोली चलानी पड़ी जिससे सात और नागरिकों की मृत्यु हो गयी. तथा कुछ अन्य घायल हो गए. स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने हालात को सामान्य बनाने की कोशिश की है जिससे स्थिति तनावपूर्ण है लेकिन नियंत्रण में बनी हुई है."

रविवार को सेना और ग्रामीणों के बीच एक बार फिर झड़प हुई जिसमें एक और आम नागरिक की मौत हुई थी.

(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की खबरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं)

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