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भारतीय मूल के व्यक्ति की सिंगापुर में फांसी पर अस्थायी रोक

सिंगापुर, 09 नवंबर। सिंगापुर के हाई कोर्ट ने सोमवार को भारतीय मूल के मलेशियाई नागरिक नागेंद्रन के धर्मलिंगम की मौत की सजा पर अमल को निलंबित कर दिया. धर्मलिंगम की अपील पर सुनवाई तक यह रोक जारी रहेगी. कहा जाता है कि धर्मलिंगम मानसिक रूप से विकलांग हैं. उनकी सजा पर रोक के लिए पूरी दुनिया के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने अपील की थी.

Provided by Deutsche Welle

33 वर्ष के धर्मलिंगम को बुधवार को फांसी दी जानी थी. उन पर सिंगापुर में 43 ग्राम से कम हेरोइन की तस्करी करने का आरोप साबित हुआ था. कोर्ट ने उनके वकील एम रवि की अपील पर सुनवाई के बाद फांसी पर अस्थायी रोक लगा दी.

एम रवि ने दलील दी थी कि मानसिक रूप से विकलांग व्यक्ति को मौत की सजा देना सिंगापुर के संविधान का उल्लंघन है. फांसी खारिज करने की रवि की अपील तो कोर्ट ने ठुकरा दी लेकिन अपील कोर्ट में सुनवाई तक सजा पर अमल को टालने का आदेश दिया.

एम रवि ने अपने फेसबुक पर लिखा है कि कोर्ट ऑफ अपील में सुनवाई तक यह रोक जारी रहेगी. सुनवाई मंगलवार को होनी है. अगर वहां भी रवि की अपील नाकाम रहती है तो सर्वोच्च न्यायालय की लगाई रोक खत्म हो जाएगी और नागेंद्रन को फांसी दे दी जाएगी.

क्या है मामला?

धर्मलिंगम का मामला एक दशक से भी पुराना है जब उन्हें नारकोटिक्स अधिकारियों ने एक जांच नाके पर नशीली दवा हेरोइन के साथ पकड़ा था. उनकी जांघ पर पुड़िया में 43 ग्राम से कम हेरोइन की पुड़िया बांधकर छिपाई गई थी. इस मामले में उन पर आरोप साबित हुए और देश के ड्रग्स विरोधी कड़े कानूनों के तहत नवंबर 2010 में उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई.

तब से वह अलग-अलग अदालतों में अपील कर इस सजा के खिलाफ लड़ रहे थे. उन्होंने मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की भी अपील की लेकिन नाकाम रहे. आखिर में पिछले साल उन्होंने राष्ट्राध्यक्ष से माफी की याचिका की, जो खारिज कर दी गई.

मौत की सजा के विरोधी कहते हैं कि हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया कि धर्मलिंगम का आईक्यू 69 है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय मानकों के हिसाब से मानसिक विकलांगता माना जाता है. लेकिन कोर्ट ने फैसला दिया कि धर्मलिंगम को पता था वह क्या कर रहे हैं. इस आधार पर मौत की सजा बरकरार रखी गई. कोर्ट ने कहा कि धर्मलिंगम ने मिलने वाले इनाम के लालच में यह काम किया, इसलिए वह समाज के लिए एक खतरा है.

परिवार की अपील

धर्मिलिंगम का परिवार मलेशिया के इपोह में रहता है. मानवाधिकार कार्यकर्ता कर्स्टन हान ने सिंगापुर आने में इस परिवार की मदद की है. उन्होंने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि पिछले हफ्ते ही धर्मलिंगम की मां, दो भाई-बहनों और एक चचेरे भाई को जेल में उनसे मिलने की अनुमति दी गई थी.

हान कहती हैं, "असल बात जो मैंने नागेन के छोटे भाई से सुनी कि वह अपना संतुलन खो चुका है. वह आंखें नहीं मिलाता और अक्सर अपनी सुध बुध खो बैठता है. उसके भाई को तो यह भी संदेह है कि उसे अपनी फांसी के बारे में कोई समझ है या नहीं."

धर्मलिंगम की बड़ी बहन शर्मिला धर्मलिंगम सिंगापुर नहीं जा पाईं. उन्होंने कहा कि फोन के जरिए उन्होंने सोमवार को कोर्ट में बयान दिया और सकारात्मक नतीजे की उम्मीद जताई.

दुनियाभर में चर्चा

मौत की सजा के विरोध में काम करने वाले एंटी-डेथ पेनल्टी एशिया नेटवर्क के डोबी चू ने हाई कोर्ट के फैसले पर निराशा जताई. उन्होंने उम्मीद जताई कि सिंगापुर अपील के लिए समुचित समय देगा. कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मानसिक रूप से विकलांग एक व्यक्ति को मौत की सजा दिए जाने को अमानवीय और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है.

मीडिया की खबरों के मुताबिक मलेशिया के प्रधानमंत्री इस्माइल साबरी याकूब ने भी "सिर्फ मानवीय आधार पर" सजा पर रोक लगाने की अपील करता एक पत्र सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली साइन लूंग को लिखा था. सिंगापुर गया यूरोपीय संघ का एक प्रतिनिधिमंडल और नॉर्वे व स्विट्जरलैंड के दूतावास भी इस सजा पर रोक की अपील कर चुके हैं.

एक साझे बयान में उन्होंने कहा, "आज दुनिया के दो तिहाई से ज्यादा देश मौत की सजा को कानून या व्यवहारिक रूप में खत्म कर चुके हैं, जो मौत की सजा के खिलाफ दुनिया के बढ़ते चलन का संकेत है." सिंगापुर में मौत की सजा पा चुके या सजा का इंतजार कर रहे 13 लोगों के परिवारों ने भी एक साझा पत्र लिखकर इस सजा पर रोक का अनुरोध किया है. सिंगापुर में 2019 में पिछली बार एक व्यक्ति को फांसी दी गई थी.

वीके/एए (एपी, रॉयटर्स)

Source: DW

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