अफ्रीकी देश में रहस्यमयी बीमारी से 50 चिंपांजियों की मौत, इंसान बन सकते हैं वायरस का शिकार

Mysterious Virus In Chimpanzees: नई दिल्ली। साल 2020 में पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी के कहर में जो फंसी तो आज तक उससे निकल नहीं पाई है। इस बीच एक पश्चिम अफ्रीकी देश सियरा लियॉन में रहस्यमयी वायरस ने हड़कंप मचाया है। सियरा लियॉन की एक सैंक्चुअरी में 50 चिंपांजियों की रहस्यमयी मौत से वैज्ञानिक हैरान हैं। इन सभी चिंपांजियों की मौत को घातक जीवाणु के चलते हुई है। वैज्ञानिकों ने इस जीवाणु के अध्ययन के बाद ये आशंका जताई है कि इसका संक्रमण इंसानों में पहुंचने की बहुत अधिक संभावना है क्योंकि चिंपांजी और इंसानों के 98 प्रतिशत जेनेटिक समान ही होते हैं।

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    न्यूरोलॉजिकल समस्या के बाद
    इस अज्ञात बीमारी के चलते चिंपांजी को पहले न्यूरोलॉजिकल समस्या होती है, इसके बाद उसे उल्टी और डायरिया होने लगता है। यह इतना बढ़ता है कि चिंपांजी की जान चली जाती है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि टाकुगामा सैंक्चुअरी में 2005 से अब तक चिंपांजियों की मौत हो चुकी है। शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए इसे एपिजूटिक न्यूरोलॉजिकल एंड गैस्ट्रोएंटरिक सिंड्रोम (ENGS) नाम दिया है।

    सार्सीन इनफेक्शन से संबंध
    अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने ENGS को लेकर किए गए अपने अध्ययन में पाया कि इस बीमारी का संबंध सार्सीन इनफेक्शन से जुड़ा हुआ है। नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट में टीम ने कहा है "हमारा परिणाम (अध्ययन का) ये बताता है कि सार्सीन वायरस की तरह ही एक अपरिचित और जटिल वायरस मौजूद है जिनमें से कुछ बहुत अधिक वायरल हो सकते हैं।"

    2013 की एक रिपोर्ट के अनुसान सार्सीन जीवाणु गैस्ट्रिक अल्सर, वातस्फीति गैस्ट्रिटिस और गैस्ट्रिक की समस्या को बढ़ाने में सहायक पाया गया था। वातस्फीति गैस्ट्रिटिस (पेट की वाल में गैस भर जाती है जिससे बहुत अधिक समस्या होती है) के मामले में ये वायरस बहुत ही खतरनाक होता है।

    33 प्रतिशत मौत की वजह
    सियरा लियॉन की सैंक्चुअरी में मृत पाए गए चिंपांजियों के मामले में वैज्ञानिकों ने पाया था कि मौत से पहले उनका पेट फूला हुआ था।

    3 फरवरी को 2021 को प्रकाशित हुई अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक ENGS इस इलाके में चिंपांजियों की मौत की बड़ी वजह बना था। इस दौरान 63.6 प्रतिशत चिंपांजियों की मौत को लेकर जो अध्ययन किया गया था उनमें 33 प्रतिशत की मौत की वजह ENGS को पाया गया था। हालांकि अध्ययन में आगे कहा गया है कि इस वायरस का संक्रमण सीधे नहीं फैलता है।

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