WATCH: म्यांमार में चीन के खिलाफ फूटा आक्रोश, कई चीनी फैक्ट्रियों को जलाया गया, 39 लोगों को मारी गई गोली
म्यांमार में चीन के खिलाफ लोग आक्रोश निकाल रहे हैं। चीनी फैक्ट्रियों को जलाया गया है। सेना ने 39 प्रदर्शनकारियों को गोली मार दी है
नेपीडॉ: म्यांमार में मिलिट्री शासन के खिलाफ गुस्सा और आक्रोश लगातार बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन, इन सबके बीच अब जनता का गुस्सा चीन पर फूट पड़ा है और प्रदर्शनकारी चीनी कंपनियों को निशाना बना रहे हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार में चीनी कंपनियों को जला रहे 22 प्रदर्शनकारियों को सेना ने गोली मारकर हत्या तक कर दी है। म्यांमार के मुख्य शहर हलिंगथय में चीनी कंपनियों को जलाया जा रहा था जिसके बाद सेना ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियों की बरसात कर दी। जिसमें 22 लोगों के मारे जाने की खबर है।
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39 लोगों की गोली मारकर हत्या
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक 16 और प्रदर्शनकारी देश के अलग अलग हिस्सों में सेना के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान मारे गये हैं। असिस्टेंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स यानि एएपीपी के मुताबिक, म्यांमार में 1 फरवरी को मिलिट्री शासन लगने के बाद रविवार का दिन सबसे ज्यादा हिंसक रहा है। जहां देश में 39 लोगों की सेना ने गोली मारकर हत्या कर दी है, वहीं प्रदर्शनकारियों के हाथों एक पुलिसवाले की भी मौत हुई है।

चीन के खिलाफ फूटा गुस्सा
म्यांमार में चीन के खिलाफ सबसे ज्यादा लोग आक्रोशित हैं। वहीं, चीनी कंपनियों के फैक्ट्रियों को जलाने के बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा है कि 'प्रदर्शन में कुछ चीनी कर्मचारियों को भी चोटें आई हैं, फैक्ट्री पर हथियारों के साथ हमला किया गया था और हम म्यांमार प्रशासन से चीन की प्रॉपर्टी और चीनी लोगों को सुरक्षा देने की मांग करते हैं'। चीन को म्यांमार की मिलिट्री सेना जुंटा का समर्थक माना जाता है और इसीलिए म्यांमार में चीन के खिलाफ लोगों का आक्रोश फूट पड़ा है। चश्मदीदों के मुताबिक इंडस्ट्रियल एरिया में धुंओं का गुबार उठ रहा है वहीं चश्मीदीदों ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर सेना के जवानों ने गोलियों की बरसात कर दी, जिसमें 22 प्रदर्शनकारी मारे गये हैं।
एक फोटोग्राफर ने नाम ना छापने की शर्त पर रॉयटर्स को बताया है कि 'म्यांमार में बेहद खौफनाक स्थिति है। कई लोगों को मेरी आंखों के सामने गोली मारकर हत्या की गई है और ऐसे खतरनाक मंजर को मैं जिंदगी में कभी नहीं भूल पाऊंगा'

म्यांमार सेना का दावा
वहीं, म्यांमार की आर्मी की टीवी चैनल ने कहा है कि '2000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों ने पहले चार गारमेंट फैक्ट्रियों को जला गया, वहीं एक फर्टीलाइजर प्लांट में भी आग लगा दी गई। जिसके बाद सेना को कार्रवाई करनी पड़ी'। हालांकि, म्यांमार की आर्मी जुंटा के प्रवक्ता ने 39 लोगों की मारे जाने की बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, म्यांमार के सांसद डॉक्टर साशा ने मिलिट्री द्वारा मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए दुख जताया है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि 'म्यांमार के लोगों के शरीर से गिरे खून की एक एक बूंद के लिए उन अपराधियों, म्यांमार के लोकतंत्र का अपहरण करने वालों और हमलावरों से बदला लिया जाएगा। उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा'। एएपीपी के मुताबिक म्यांमार में अभी तक 126 से ज्यादा लोग म्यांमार सेना के हाथों मारे गये हैं वहीं 2150 लोग गिरफ्तार किए गये थे जिनमें 300 लोगों को रिहा कर दिया गया है।

चीन ने की कार्रवाई की मांग
म्यांमार में लोगों का गुस्सा सबसे ज्यादा चीन के खिलाफ फूट रहा है। लोगों का कहना है कि म्यांमार सेना को चीन की तरफ से मदद दी जा रही है। लिहाजा लोग चीनी कंपनियों और चीनी नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। जिसे लेकर चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए स्थिति को खतरनाक बताया है। हालांकि, चीन की तरफ से लोगों के मारे जाने को लेकर एक भी बयान जारी नहीं किया गया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि 'चीन मांग करता है कि म्यांमार प्रशासन आगे सख्त कार्रवाई करे और उपद्रवियों के खिलाफ कानून के हिसाब से कार्रवाई हो और चीनी फैक्ट्रियों के साथ चीन के लोगों के जानमाल की सुरक्षा हो'।

सोशल मीडिया पर चीन के खिलाफ गुस्सा
म्यांमार में चीनी के खिलाफ लोगों का गुस्सा चरम पर पहुंच चुका है और लोग विरोध में चीनी कंपनियों को निशाना बना रहे हैं। वहीं, चीन की एंबेसी के फेसबुक पेज पर लोग अपने गुस्सा का इजहार कर रहे हैं। चीन एंबेसी के फेसबुक पेज पर लगातार चीन के खिलाफ लिखा जा रहा है। अभ तक 29 हजार से ज्यादा कॉमेंट्स में चीन के खिलाफ गुस्सा व्यक्त किया गया है। म्यांमार में चीन के खिलाफ गुस्सा लगातार बढ़ता ही जा रहा है और चीनी फैक्ट्री को जला रहे 22 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों के मारे जाने के बाद ये गुस्सा और भड़क सकता है। लोगों का कहना है कि चीन की वजह से ही म्यांमार में मिलिट्री शासन लगा है और सेना को चीन की तरह से मदद दी जा रही है।












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