रूस में इस्लामिक स्टेट के आतंकियों का खूनखराबा, भारत में ISIS का 'इंडिया हेड' पकड़ाया, कितने तैयार हम?
Moscow Concert Hall attack: रूस की राजधानी मॉस्को के पश्चिमी छोर पर एक कॉन्सर्ट हॉल में इस्लामिक स्टेक के आतंकवादियों ने गोलीबारी और धमाकों के साथ कम से कम 93 लोगों की हत्या कर दी है और 200 से ज्यादा लोगों को बुरी तरह से घायल कर दिया।
अमेरिकी एक्सपर्ट्स का मानना है, कि रूस में हुआ ये आतंकवादी हमला मुंबई हमले से मिलता जुलता है, जब नवंबर 2008 में पाकिस्तानी आतकियों ने मुंबई में कई जगहों पर एक साथ हमला किया था और ढाई सौ से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी थी।

रूस में हुआ ये हमला भारत को सतर्क करने के लिए इसलिए भी है, क्योंकि इसी हफ्ते भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने आईएसआईएस के दो 'भारत प्रमुखों' को गिरफ्तार किया है, जिनका काम भारत में आईएसआईएस के लिए आतंकियों की भर्ती करना था। रूस की तरह भारत भी लंबे समय से आतंकवाद से पीड़ित रहा है और विदेशी आतंकवादियों ने भारत के चंद लोगों को अपने साथ जोड़कर हमेशा से देश को जख्म देने की कोशिश की है।
आइये सबसे पहले जानते हैं, कि रूस में आतंकवादियों ने किस तरह से दिल दहला देने वाला आतंकवादी हमला किया है।
क्रोकस सिटी हॉल कहां है?
रूसी की राजधानी मॉस्को एक विशाल शहर है, जो लगभग 2 करोड़ 10 लाख से ज्यादा लोगों का घर है। क्रोकस सिटी हॉल, जिसमें एक शॉपिंग सेंटर और कॉन्फ्रेंस स्थल शामिल है, वो रूस के राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन से करीब 20 किलोमीटर दूर पश्चिम में मॉस्को रिंग रोड के साथ लगते उपनगर क्रास्नोगोर्स्क में स्थित है।
आप इसे इस तरह से समझ सकते हैं, जैसे दिल्ली और नोएडा या फिर गुरुग्राम।
इस कॉन्सर्ट को 2009 में खोला गया था, जिसमें एक साथ 6200 से ज्यादा लोग आ सकते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी एक बार यहां मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता आयोजित करवाई थी।
आतंकियों ने कैसे किया हमला?
हमला शुक्रवार देर शाम को उस समय शुरू हुआ, जब लोग सोवियत काल के एक लोकप्रिय रॉक बैंड पिकनिक में भाग लेने के लिए पहुंचे थे। लोगों का हॉल के अंदर पहुंचना शुरू हो चुका था और लोग अपनी अपनी कुर्सियों पर बैठ रहे थे।
इसी समय लड़ाकू वर्दी में करीब पांच लोग कॉन्सर्ट हॉल में दाखिल हुए और अंदर मौजूद लोगों पर गोलियां चलाने लगे। डेव प्रिमोव, जो हमले के दौरान हॉल में मौजूद थे, उन्हौंने अब बताया है, कि हमले के दौरान अंदर कितना खौफनाक नजारा था।
प्रिमोव ने एसोसिएटेड प्रेस समाचार एजेंसी को बताया, कि "अचानक गोलियां चलने लगीं और हम सब लोग घबराकर कॉरि़डोर की तरफ भागने की कोशिश करने लगे। लोग बुरी तरह डर गये थे और घबराहट में भागते वक्त एक दूसरे से टकरा रहे थे। इस दौरान कई लोग नीचे गिर गये, जबकि कई लोगों ने गिरने वालों को भी रौंद डाला।"
रूसी जांच एजेंसियों ने 93 लोगों की मौत और 187 से ज्यादा अन्य घायल हो गए हैं।
रूसी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स की रिपोर्ट में कहा गया है, कि हमलावर अपने साथ विस्फोटक लेकर आए थे और धमाके में भीषण आग लग गई, जो करीब 12,900 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैल गई। सोशल मीडिया पर जो वीडियो पोस्ट किए गये है, उनमें बंदूकधारियों को बेतहाशा फायरिंग करते हुए देखा जा रहा है। वीडियो में दिख रहा है, कि आतंकवादी चिल्लाते हुए लोगों पर बहुत करीब से गोलीबारी कर रहे हैं।
आग की लपटों को बुझाने के लिए हेलीकॉप्टरों को लाया गया, जबकि अग्निशामकों ने जमीन से आग पर काबू पाया। रूस की आपातकालीन स्थिति मंत्रालय ने कहा, कि अग्निशामकों ने इमारत के तहखाने से लगभग 100 लोगों को भागने में मदद की, जबकि छत पर फंसे लोगों के लिए अलग से बचाव अभियान शुरू किया गया।
रूसी समाचार एजेंसी TASS ने कहा, कि पिकनिक के बैंड सदस्यों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

11 आतंकवादियों की गिरफ्तारी
रशिया इन्वेस्टिगेविट कमिटी, जो रूस की शीर्ष राज्य आपराधिक जांच एजेंसी है, उसने हमले की जांच शुरू की और बंदूकधारियों की तलाश शुरू कर दी। वहीं, रूसी मीडिया ने कहा है, कि कम से कम 11 सदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 4 वो आतंकवादी हैं, जो फायरिंग में शामिल थे।
रूस की TASS राज्य समाचार एजेंसी के अनुसार, रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रमुख सहयोगी निकोलाई पेत्रुशेव ने कहा है, कि मॉस्को हमले से पता चलता है, कि रूस के लिए आतंकवाद का खतरा कितना गंभीर है।
TASS की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने हमले को अंजाम दिया है, उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
इंटरफैक्स समाचार एजेंसी ने क्रेमलिन के हवाले से कहा है, कि रूस की एफएसबी सुरक्षा सेवा ने पुतिन को बताया है, कि मॉस्को के पास शुक्रवार को हुए घातक हमले के बाद 11 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें सीधे तौर पर शामिल चार लोग शामिल हैं।
हालांकि, क्रेमलिन ने तुरंत हमले के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराया, लेकिन कुछ रूसी सांसदों ने तुरंत यूक्रेन पर आरोप लगाया है। लेकिन, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के सलाहकार मायखाइलो पोडोल्याक ने इस हमले में यूक्रेन की भागीदारी से इनकार किया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया है, कि "यूक्रेन ने कभी भी आतंकवादी तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया है। इस युद्ध में सब कुछ युद्ध के मैदान पर ही तय किया जाएगा।"
इस्लामिक स्टेट ने ली हमले की जिम्मेदारी
ISIL (आईएसआईएस) के एक अफगान सहयोगी इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) ने अपनी अमाक समाचार एजेंसी के जरिए जारी एक बयान में हमले की जिम्मेदारी ली है। बयान में कहा गया है, कि उसके लड़ाकों ने मॉस्को के बाहरी इलाके में हमला किया है और "सैकड़ों लोगों को मार डाला और घायल कर दिया है।"
इस आतंकी संगठन ने कहा है, कि उसने रूस में भारी विनाश किया है। हालांकि, इससे ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। रूस ने इस महीने आईएसआईएल से जुड़ी कई घटनाओं की सूचना दी है। एफएसबी खुफिया एजेंसी ने कहा है, कि 7 मार्च को उसने मॉस्को के एक पूजा स्थल पर आईएसकेपी के हमले को नाकाम कर दिया था।
वहीं, अमेरिका ने कहा है, कि उसके पास रूस में होने वाले किसी आतंकवादी हमले को लेकर पहले से ही जानकारी थी और उसने रूसी अधिकारियों को अलर्ट भी जारी किया था और निष्कर्ष भी रूसी अधिकारियों के साथ शेयर किया था। शुक्रवार की रात, एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, कि वाशिंगटन के पास क्रोकस सिटी हॉल हमले की जिम्मेदारी के आईएसआईएल के दावे की पुष्टि करने वाली खुफिया जानकारी उसके पास है।
अमेरिका ने माना है, कि रूस में जो आतंकवादी हमला किया गया है, उसके पीछे ISIS का हाथ है और उसके पास इसके पर्याप्त सबूत हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि हालिया समय में इस आतंकवादी संगठन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का विरोध किया था।
इससे पहले अक्टूबर 2015 में भी ISIS ने रूस पर हमला किया था और उस वक्त सिनाई के ऊपर से गुजर रहे एक विमान को बम धमाके से उड़ा दिया था, जिसमें 224 लोग मारे गये थे। 2000 के दशक की शुरुआत से ही रूस कई घातक हमलों से जूझता रहा है।
सितंबर 2004 में करीब 30 चेचन लड़ाकों ने दक्षिणी रूस के बेसलान में एक स्कूल पर कब्ज़ा कर लिया था और सैकड़ों लोगों को बंधक बना लिया था। ये घेराबंदी दो दिन बाद भीषण रक्तपात के बाद खत्म हुई, जिसमें 330 लोगों को मार डाला गया था, जिनमें आधे से ज्यादा बच्चे शामिल थे।

भारत को रहना होगा अलर्ट
रूस में आतंकी हमले से भारत को बड़ी सबक मिलती है और भारत को लगातार सतर्क रहना होगा। हालांकि, मोदी सरकार के कार्यकाल में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने सैकड़ों आतंकी घटनाओं की कोशिश को नाकाम किया है, लेकिन ISIS लंबे वक्त से भारत में अपनी बीज बोने की कोशिश में रहा है।
अभी पिछले हफ्ते ही ISIS का भारत प्रमुख अपने सहयोगी के साथ गिरफ्तार किया गया है। बुधवार को असम के धुबरी जिले से हरीष फारूखी ऊर्फ हरीश अजमल फारूखी और उसका दोस्त अनुराग सिंह, जो धर्म परिवर्तन के बाद अब रेहान हो गया है, इन दोनों को गिरफ्तार किया गया है। हरीष जहां देहारादून के चकराता का रहने वाला है, वहीं रेहान पानीपत का रहने वाला है और इसकी पत्नी बांग्लादेश की रहने वाली है।
ये दोनों ISIS के प्रशिक्षित आतंकवादी हैं और भारत में इस आतंकी संगठन के लिए फंडिंग से लेकर इस संगठन को फैलाने का काम कर रहे थे।
इन दोनों की गिरफ्तारी से साबिता होता है, कि भारत में ISIS का बीज बोया जा चुका है, लिहाजा सुरक्षा एजेंसियों को फलने से पहले ही इन्हें जड़ से उखाड़ना होगा, नहीं तो ये आगे जाकर खून-खराबा करने से बाज नहीं आएंगे।
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