न्‍यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट ने मोदी के खिलाफ जारी किया सम्‍मन

न्‍यूयॉर्क। नौ साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की धरती पर कदम रखने को बेकरार हैं लेकिन उनके न्‍यूयॉर्क पहुंचने से पहले ही एक मुसीबत उनका इंतजार कर रही है।

summons against Narendra Modi

न्‍यूयॉर्क की एक फेडरल कोर्ट ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ सम्‍मन जारी किया है। यह सम्‍मन उन्‍हें वर्ष 2002 में हुए गोधरा दंगों में मुसलमान विरोधी भावनाएं भड़काने में उनके रोल की वजह से जारी किया गया है।

गौरतलब है कि मोदी उस समय गुजरात के मुख्‍यमंत्री थे और यही एक वजह है जिसकी वजह से अमेरिका ने वर्ष 2005 में उनका वीजा बैन कर दिया था।

अमेरिकन जस्टिस सेंटर (एजेसी) की ओर से एक अभियोग दायर किया गया है। एजेसी एक ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन है और इस ऑर्गनाइजेशन की ओर से इन दंगों में बचे दो लोगों की पहचान की गई थी।

मोदी से एलियन टॉर्ट क्‍लेम्‍स एक्‍ट (एटीसीए) और टॉर्चर विक्टिम प्रोटेक्‍शन एक्‍ट (टीवीपीए) के आधार पर जवाब मांगा गया है।

गुरुपटवंत सिंह पानून, जिनकी फर्म की ओर से इस मुद्दे को उठाया गया है उन्‍होंने भारतीय समाचार पत्र द हिंदू को एक ई-मेल कर जानकारी दी है कि फेडरल कोर्ट ऑफ सदर्न डिस्‍ट्रीक्‍ट ऑफ न्‍यूयॉर्क को सम्‍मन मिलने के 21 दिनों के अंदर नरेंद्र मोदी की ओर से जवाब चाहिए।

सम्‍मन में साफ कहा गया है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 दिनों में जवाब नहीं दाखिल कर पाए तो कोर्ट का फैसला खुद -ब-खुद मोदी के खिलाफ दे दिया जाएगा।

28 पेज के इस सम्‍मन में मोदी से दंगों में हुए नुकसान और दंडात्‍मक कार्रवाई पर जवाब मांगा गया गया है। इसके अलावा मोदी पर मुस्लिम समुदाय को मानवता, वैधानिक हत्‍याओं, प्रताड़ना और मानसिक और शारीरिक कष्‍ट देने के आरोप लगाए गए हैं।

26 सितंबर को एजेसी की ओर से एक प्रेस कांफ्रेंस की जाएगी जिसमें इस अभियोग के प्रभावों के बारे में बताया जाएगा।

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