सीएफआर में नरेंद्र मोदी की अमेरिका को दो टूक
न्यूयॉर्क। वाशिंगटन रवाना होने से पहले नरेंद्र मोदी ने न्यूयॉर्क में कांउसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (सीएफआर) को संबोधित किया। सीएफआर न्यूयॉर्क स्थित अमेरिका का वह संगठन है तो विदेश नीति और संबंधों के लिए काम करता है। मोदी इस संगठन को संबोधित करने वाले देश के छठवें प्रधानमंत्री थे।

मोदी ने यहां पर जो भाषण दिया उसमें उन्होंने यूएनजीए और मैडिसन स्क्वॉयर पर दिए भाषण की बातें ही दोहराईं लेकिन कुछ मुद्दों पर उन्होंने अमेरिका को साफ-साफ संदेश देने की कोशिश भी की। एक नजर मोदी के इस भाषण के कुछ खास अंशो पर।
मैं बना रहा हूं टीम इंडिया
मोदी ने यहां पर दिए अपने भाषण में साफ कहा कि वर्तमान सदी एशिया और चीन की सदी है और भारत वह देश है जो इस सदी का नेतृत्व करेगा। ऐसे में भारत को नजरअंदाज करना काफी मुश्किल है। मोदी ने यहां पर दिए अपने भाषण में कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। मोदी ने कहा अमेरिका के पास पैसा है तो भारत के पास टैलेंट है।
अगर दोनों देश साथ आ जाएं तो ग्लोबल इकॉनमी में दोनों देश साथ मिलकर काम कर सकते हैं। लेकिन यह सब होने के लिए बिजनेस जरूरी है।
मोदी ने कहा कि मै एक टीम इंडिया का निर्माण कर रहां हूं जिसमें केंद्र और राज्य के लोगों को शामिल किया जाए ताकि निवेशकों को ज्यादा मुश्किलों का सामना न करना पड़े।
डब्ल्यूटीओ पर मेरी सरकार सही
मोदी ने सीएफआर में आए लोगों के सामने यह साफ कर दिया कि व्यापार समझौते डब्ल्यूटीओ को लेकर उनकी सरकार का जो नजरिया है वह सही है।
मोदी ने कहा कि वह गरीबों की बेहतरी के लिए काम करते रहेंगे और हमेशा उनके हितों का ध्यान रखेंगे। ऐसे में इस मुद्दे पर जो भी नजरिया या सोच उनकी सरकार की है वह उसे पूरी तरह से सही मानते हैं।
'Tourism unites terrorism divides'
मोदी ने सीएफआर में अपने भाषण का अतं 'टूरिज्म यूनाइट्स टेररिज्म डिवाइड्स,' के साथ किया। मोदी ने साफ कहा कि अमेरिका को आतंकवाद के खतरे और इसके डर से 9/11 के बाद ही परिचति हो सका लेकिन भारत पिछले कई दशकों से इसे झेल रहा है।
अब अमेरिका भारत के साथ आतंक के खिलाफ अभियान में जुड़ना चाहता है। मोदी ने इस मुद्दे पर कहा कि भारत हमेशा से ही बुद्ध के दर्शन को मानता आया है और ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में आतंकवाद को एक्सपोर्ट किया गया है।
भारत खुद सुलझा लेगा चीन के साथ विवाद
सीएफआर में मोदी ने अपने भाषण के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि चीन के साथ जो सीमा विवाद पिछले कई दिनों से जारी है, वह भारत की सरकार दिवपक्षीय बातचीत में सुलझा लेगी।
इसकी शुरुआत चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई मुलाकात में हो चुकी है।
इराक की गलती न दोहराए अमेरिका
यह शायद पहला मौका है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इराक और अफगानिस्तान के मुद्दे पर अमेरिका को इतने बड़े अतंराष्ट्रीय मंच से सलाह दी है। मोदी ने सीएफआर में साफ कर दिया कि अमेरिका ने जो गलती अफगानिस्तान और इराक में की है, वह उसे आगे न दोहराए।
साथ ही मोदी ने अमेरिका से यह भी अनुरोध किया कि अफगानिस्तान से अमेरिकी फौजों को हटाने में जल्दबाजी न करे।












Click it and Unblock the Notifications