अमेरिकी अखबार में भारत को बदनाम करने वाला विज्ञापन किसने छपवाया? देश चलाने वाले 11 लोगों को बताया वांटेड
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल में भारत विरोधी एक विज्ञापन छापे जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। जिस दिन यह विज्ञापन छापा गया उस दिन भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अमेरिका के दौरे पर थीं।
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल (the Wall Street Journal) में भारत विरोधी एक विज्ञापन छापे जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। चर्चित अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपे एक विज्ञापन में भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman), सुप्रीम कोर्ट के जजों, ईडी से जुड़े कुल 11 लोगों को वॉन्टेड बताते हुए उन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। जिस दिन यह विज्ञापन छापा गया उस दिन भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अमेरिका के दौरे पर थीं।
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WSJ के विज्ञापन में क्या छपा था?
13 अक्तूबर को छापे गए इस विज्ञापन में लिखा गया, 'वांटेड... नरेंद्र मोदी के 11 मैग्निट्स्की। मिलिए उन अधिकारियों से जिन्होंने भारत को निवेश के लिए एक असुरक्षित जगह बना दिया है।' इस विज्ञापन में इन सभी लोगों को मोदी का मैग्निट्स्की बताया गया है और इन सभी 11 लोगों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इस विज्ञापन में ये दावा किया गया था कि इन सरकारी अधिकारियों ने राज्य के संस्थानों को कानून का शासन खत्म करने, राजनीतिक और व्यावसायिक प्रतिद्वंद्वियों को निपटने के लिए हथियार बनाया है। विज्ञापन में दावा किया गया है कि मोदी सरकार में कानून के शासन को खत्म कर दिया गया है, इसलिए भारत निवेश के लिए एक खतरनाक जगह बन चुका है।

विज्ञापन में किन 11 लोगों का नाम छपा है?
इस विज्ञापन में भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, एंट्रिक्स कॉर्प लिमिटेड के अध्यक्ष राकेश शशिभूषण, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हेमंत गुप्ता, वी रामसुब्रमण्यम, स्पेशल पीसी एक्ट जज चंद्रशेखर, पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) आशीष पारीक, प्रवर्तन निदेशालय के संजय कुमार मिश्रा, ईडी के सहायक निदेशक आर राजेश, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन और ईडी के उप निदेशक ए सादिक मोहम्मद का भी नाम है।

मैग्निट्स्की एक्ट क्या है?
मैग्निट्स्की एक्ट अमेरिका राष्ट्रपति को विदेशी व्यक्ति या संस्था के अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है। ये प्रतिबंध उन अधिकारियों पर लगाया जाता है जिन्होंने किसी भी रूप में मानवाधिकार का उल्लंघन किया है। इस कानून की निर्माण अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2012 मेंकिया था। 2009 में मास्को जेल में मार डाले गए एक रूसी वकील सर्गेई मैग्निट्स्की की हत्या में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ इस कानून का निर्माण हुआ था।

WSJ में विज्ञापन किसने छपवाया?
अमेरिका की गैर-सरकारी संस्था फ्रंटियर्स ऑफ फ्रीडम ने इस विज्ञापन को जारी किया है। कहने को तो ये एक शैक्षिक संस्थान है मगर यह भारत के खिलाफ साजिश रचने में सक्रिय रहती है। इस संस्था को लीड जॉर्ज लैंड्रिथ करता है। लैंड्रिथ की ट्विटर टाइमलाइन भारत और मोदी सरकार के खिलाफ निराधार आरोपों से भरी पड़ी है। इसी संगठन के जरिए रामचंद्रन विश्वनाथन ने अगस्त में याचिका दायर कर कहा था कि मोदी सरकार उसे गिरफ्तार करने के लिए म्यूचुअल लीगल असिस्टेंट समझौते का सहारा ले सकती है।

कौन है रामचंद्रन विश्वनाथन?
इसके साथ ये भी दावा किया जा रहा है कि इस विज्ञापन को छपवाने के पीछे असल शख्स रामचंद्रन विश्वनाथन है। रामचंद्रन विश्वनाथन मनी लॉन्ड्रिंग और ठगी कर अमेरिका भाग चुका है। रामचंद्रन विश्वनाथन 2005 में हुए 10 हजार करोड़ के देवास-एंट्रिक्स घोटाले में शामिल देवास कंपनी का सीईओ था। उसकी कंपनी की नीलामी के लिए ईडी ने इसी वर्ष जून में अर्जी दी थी। ईडी ने ही उसे भगोड़ा घोषित कर रखा है।
भारत ने जताई गहरी नाराजगी
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने विज्ञापन को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। कंचन गुप्ता ने ट्वीट कर लिखा है कि जालसाजों के जरिए अमेरिकी मीडिया का हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाना शर्मनाक है। वॉल स्ट्रीट जर्नल में भारत सरकार और भारत को ऐसे निशाना बनाना हैरतअंगेज़ रूप से वीभत्स है। उन्होंने आगे लिखा, भारत का सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना चुका है। विश्वनाथन की कंपनी देवास भ्रष्टाचार में शामिल थी। इसके बावजूद विज्ञापन छपवाना सिर्फ भारत सरकार के विरुद्ध अभियान नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका के विरुद्ध अभियान है। यह भारत की संप्रभुता के विरुद्ध अभियान है। वहीं, देश के आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने इसे पाखंड का नया स्तर बताया है।












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