Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

मोदी सरकार की विदेश नीति के 10 साल.. डिप्लोमेसी के चैंपियन बने हम? क्या रहीं चुनौतियां, कैसी है उपलब्धियां?

Modi Government Foreign Policy: मई 2014 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को नई दिल्ली में एनडीए सरकार के प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाले अब 10 साल पूरे होने वाले हैं और अब भारत, फिर से चुनावी मोड में आ चुका है। जब प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता संभाला था, उस वक्त यह माना गया था, कि विदेश नीति के मामले में मोदी सरकार थोड़ी कमजोर रह सककी है, क्योंकि उनके पास कोई ऐसा नेता नहीं था, जो इस बागडोर को संभाल सके।

जो नेता था, उनके पास या तो काफी कम तजुर्बा था या वो विदेश मंत्रालय संभालने के काबिल नहीं थे।

Modi Government Foreign Policy

लेकिन, अब 10 साल बीतने के बाद विदेश नीति, प्रधान मंत्री मोदी की सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभरी है और मोदी सरकार ने जिस तरह से पिछले 10 सालों में विदेश मंत्रालय को संभाला है, उसकी तारीफ होनी चाहिए, क्योंकि पिछले 10 सालों में भारत और दुनिया ने ऐसी चुनौतियों का सामना किया है, जो वैश्विक समुदाय ने कई दशकों से नहीं देखी हैं।

इनमें से सबसे मुश्किल घटनाओं में से एक थी कोविड-19 महामारी, जो 100 वर्षों के अंतराल के बाद होने वाली एक ब्लैक स्वान घटना थी। और इससे पहले, कि दुनिया कोविड-19 महामारी की चपेट से बाहर निकल पाती, दुनिया दो मुश्किल जंगों में फंस चुकी थी। रूस-यूक्रेन युद्ध और इजराइस-हमास युद्ध।

इसके अलावा, इस दौरान कुछ अन्य परेशान करने वाले घटनाक्रमों में जापान और ताइवान के खिलाफ पूर्वी चीन सागर में चीन का बढ़ता आक्रामक व्यवहार भी शामिल है। दक्षिण चीन सागर से लेकर भारत और भूटान के खिलाफ चीनी आक्रामकता का भी मोदी सरकार ने सामना किया है।

और इस दौरान घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मोर्चों पर कई अन्य चुनौतियों के बावजूद, प्रधान मंत्री मोदी ने अपनी पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और वर्तमान विदेश मंत्री एस जयशंकर की सहायता से भारत की विदेश नीति को नया आकार दिया है, जिसकी तारीफ होनी चाहिए। पिछले 10 सालों में दुनिया ने भारत की नई ताकत को महसूस किया है और भारत अब ग्लोबल साउथ की आवाज बनने की यात्रा पर है।

मोदी सरकार की 'पड़ोसी फर्स्ट' की नीति

2014 में अपना पहला कार्यकाल संभालने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे गंभीर पहल "नेबरहुड फर्स्ट" नीति शुरू की थी, और उन्होंने 26 मई 2014 को अपने शपथ ग्रहण समारोह में सभी सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय देशों का संगठन) देशों के राष्ट्राध्यक्षों/शासनाध्यक्षों को आमंत्रित किया था। इसके बाद, उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल 31 मई 2019 को अपने दूसरे शपथ ग्रहण समारोह में बिम्सटेक, किर्गिस्तान और मॉरीशस के नेताओं को आमंत्रित किया।

नेबरहुड फर्स्ट नीति की सफलता इस तथ्य से स्पष्ट है, कि भारत के अपने पड़ोसियों (पाकिस्तान, चीन और हाल ही में मालदीव को छोड़कर) के साथ संबंध 2014 की तुलना में आज कहीं ज्यादा मजबूत और गहरे हैं।

प्रधान मंत्री मोदी की पहली नेपाल यात्रा अगस्त 2014 में हुई थी यह 17 सालों में किसी भारतीय प्रधान मंत्री की नेपाल की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी। तब से, प्रधान मंत्री मोदी चार बार नेपाल की यात्रा कर चुके हैं। 23 वर्षों के अंतराल के बाद सितंबर 2014 में दोनों देशों के बीच संयुक्त आर्थिक आयोग की बैठक हुई। इन सभी यात्राओं के साथ-साथ भारत की यात्रा पर नेपाली नेताओं के साथ बातचीत से दोनों देशों के बीच समझ और सहयोग में काफी इजाफा हुआ है।

इसी तरह, मार्च 2015 में पीएम मोदी ने श्रीलंका का दौरा किया और ये किसी भारतीय प्रधानंमत्री का 28 सालों के बाद श्रीलंका का दौरा था। इसके अलावा, आर्थिक संकट के दौरान श्रीलंका को करीब साढ़े 4 अरब डॉलर की सहायता देकर भारत ने साबित किया, कि भारत एक सच्चा बड़ा भाई है।

Modi Government Foreign Policy

मिडिल ईस्ट में ऐतिहासिक सफलता

प्रधान मंत्री मोदी की विदेश नीति की सबसे महत्वपूर्ण सफलताओं में से एक पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व के साथ भारत के संबंधों को गहरा और व्यापक बनाना है। पहले ये देश भारत को पाकिस्तान द्वारा बनाए गए इस्लाम के धार्मिक चश्मे से देखते थे। लेकिन आज, भारत इन देशों का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है। यह इस तथ्य से स्पष्ट है, कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मिस्र और फिलिस्तीन सहित इनमें से कई देशों ने प्रधान मंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाज चुके हैं।

यूएई ने पाकिस्तान की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए 2019 में ओआईसी (इस्लामिक देशों के संगठन) के विदेश मंत्रियों को संबोधित करने के लिए तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को आमंत्रित किया था।

इसके अलावा, पश्चिम एशियाई देशों में से किसी ने भी जब भारत ने अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त किया, तो भारत के खिलाफ रुख नहीं अपनाया। इसके विपरीत, संयुक्त अरब अमीरात ने जम्मू और कश्मीर में 5 अरब डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।

एक्ट ईस्ट पॉलिसी

भारत की एक्ट ईस्ट नीति आसियान देशों के साथ-साथ जापान, ऑस्ट्रेलिया, कोरिया गणराज्य, प्रशांत द्वीप राष्ट्रों और अन्य देशों के साथ आर्थिक, राजनीतिक, रणनीतिक, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक क्षेत्रों में अपने संबंधों का विस्तार और विविधता लाने में महत्वपूर्ण रूप से सफल रही है।

Modi Government Foreign Policy

भारत-अमेरिका संबंध

पिछले 10 सालों में भारत और अमेरिका के बीच विश्वास और आत्मविश्वास में बेहतरीन वृद्धि और मजबूती देखी गई है। प्रधान मंत्री मोदी ने तीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों, बराक ओबामा, डोनाल्ड ट्रम्प और जो बाइडेन के साथ काम किया है और इन सभी राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में संबंधों में सुधार जारी रहा है।

भारत और अमेरिका के बीच के संबंध आज की तारीख में, राजनीतिक, रणनीतिक, आर्थिक, वाणिज्यिक और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भारत के लिए सबसे परिणामी वैश्विक संबंध बनकर उभरा है। दोनों देश महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों, नवीकरणीय ऊर्जा, कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, हरित हाइड्रोजन, रक्षा, सेमीकंडक्टर चिप्स और कई अन्य सहित 60 संवाद प्लेटफार्मों में एक साथ काम कर रहे हैं।

प्रधान मंत्री मोदी को जून 2023 में राष्ट्रपति बाइडेन के आमंत्रण पर अमेरिका की राजकीय यात्रा की और दूसरी बार अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करने वाले चुनिंदा वैश्विक नेताओं में शामिल हो गये। इस दौरान क्वाड भी लगातार मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

रूस-यूक्रेन संघर्ष

पश्चिम से भारी दबाव के बावजूद, भारत ने न केवल यूक्रेन पर हमले के लिए रूस की आलोचना न करके अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूती के साथ दुनिया के सामने रखा, बल्कि भारत ने पश्चिमी देशों को दोटूक जवाब देते हुए रूस से अभी तक 27 अरब डॉलर से ज्यादा का कच्चा तेल, डिस्काउंट पर खरीद चुका है। भारत ने साफ कर दिया है, कि रूस आजमाया हुआ साथ ही और उससे संबंध खराब करने का सवाल ही पैदा नहीं होता है।

जी20 की अध्यक्षता

इसके अलावा, भारत ने पिछले साल कामयाबी के साथ जी20 शिखर सम्मेलन कर इतिहास रच दिया, क्योंकि जटिल जियो-पॉलिटिक्स के बीच इस बात की संभावना नगन्य थी, कि जी20 देश किसी एक नतीजे पर पहुंच पाएंगे।

एक तरफ पश्चिम के यूक्रेन और दूसरी तरफ रूस और चीन के संघर्ष पर व्यापक रूप से अलग अलग रुख को देखते हुए, किसी ने भी यह अनुमान नहीं लगाया था, कि भारत सर्वसम्मति से घोषणापत्र तैयार करने में कामयाब हो पाएगा। लेकिन, भारत ने पहले ही दिन अकल्पनीय उपलब्धि हासिल कर ली और इस सफलता का प्रधान मंत्री मोदी के नेतृत्व, विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनकी टीम को दिया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी और उनकी विदेश नीति टीम ने पिछले 10 वर्षों में सामने आई व्यापक चुनौतियों से निपटने के लिए खुद को अत्यधिक विश्वसनीय बना लिया है। आज विश्व परिवर्तन के दौर में है। दुनिया कई उथल-पुथल की स्थिति से गुजर रही है और ऐसे वक्त में भारत का दायित्व और बढ़ गया है, लिहाजा आने वाले वक्त में भारत के सामने कई चुनौतियां और उपलब्धियां होंगी, जिनपर नजर बनी रहेगी।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+