कौन हैं दीपक मित्तल, जिन्हें मिला नौसेना के अफसरों को फांसी से बचाने का जिम्मा, कुलभुषण जाधव की बचाई थी जान

Indian Navy Qatar Who is Dipak Mittal: कतर की एक अदालत ने इंडियन नेवी के आठ पूर्व अधिकारियों को इजराइल के लिए जासूसी करने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई है, और कतरी अदालत का ये आदेश, भारत को स्तब्ध करने वाला है। कतर और भारत के बीच काफी बेहतरीन रिश्ते रहे हैं, लिहाजा भारत बेहद सावधानी के साथ इस मामले में आगे बढ़ रहा है।

कतर में फांसी की सजा पाए इन आठों पूर्व इंडियन नेवी के अधिकारियों को बचाने का जिम्मा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबसे भरोसे डिप्लोमेट दीपक मित्तल को सौंपी है, जो अब कतर में भारत का नेतृत्व करेंगे। आपको बता दें, कि दीपक मित्तल वही डिप्लोमेट हैं, जिन्होंने कुलभूषण यादव के मुद्दे पर पाकिस्तान को इंटरनेशन कोर्ट ऑफ जस्टिस में घसीट लिया था और जाधव को फांसी की सजा को रोकने में कामयाबी हासिल की थी।

qatar indian navy ex officers

इसके अलावा, दीपक मित्तल वो डिप्लोमेट हैं, जिन्होंने पहली बार तालिबान के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। यानि, दीपक मित्तल वो डिप्लोमेट हैं, जो स्पेशल मिशन को अंजाम तक पहुंचाते हैं। इसीलिए, कतर से इंडियन नेवी के पूर्व अफसरों को सुरक्षित वापस लाने की जिम्मेदारी दीपक मित्तल के कंधों पर दी गई है।

कौन हैं दीपक मित्तल?

1998 बैच के आईएफएस अधिकारी, दीपक मित्तल ने कतर में दो साल तक भारत के राजदूत के रूप में काम किया है और पिछले साल अगस्त में, जब कतर की खुफिया एजेंसी ने आठ भारतीयों को गिरफ्तार किया था, उस वक्त वह दोहा में ही थे।

हालांकि, गिरफ्तारी के तुरंत बाद उनका कतर का कार्यकाल खत्म हो गया था और वर्तमान में वो प्रधान मंत्री कार्यालय में ऑफिसर ऑफ स्पेशल ड्यूटी के रूप में कार्यरत हैं। मित्तल संवेदनशील कार्यों को निपटाने में माहिर माने जाते हैं।

उन्होंने तालिबान शासन के साथ भारत की पहली औपचारिक राजनयिक भागीदारी का नेतृत्व किया और हेग में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में कुलभूषण जाधव का बचाव करने वाली टीम का भी हिस्सा थे।

कतर मुद्दे पर दीपक मित्तल को विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल द्वारा मार्गदर्शन दिया जा रहा है। अभी तक गिरफ्तार किए गए आठ भारतीयों के खिलाफ आरोपों का कतर और भारतीय अधिकारियों ने खुलासा नहीं किया है। लेकिन, मीडिया रिपोर्टों में सुझाव दिया गया है, कि उन पर इज़राइल के लिए जासूसी करने और कतर की शीर्ष गुप्त रक्षा परियोजनाओं पर संवेदनशील जानकारी देने का आरोप है।

दीपक मित्तल की क्या है रणनीति?

पूर्व नेवी अफसरों की रिहाई के लिए दीपक मित्तल अब कतरी नेतृत्व से बातचीत करेंगे। कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि दीपक मित्तल के कतरी अधिकारियों के साथ बेहद घनिष्ठ संबंध हैं, जिसका इस्तेमाल वो नेवी के पूर्व अफसरों की पैरवी के लिए कर सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, दीपक मित्तल की रणनीति दोतरफा है। पहली रणनीति, कतर की ऊपरी अदालत में अपील के लिए कानूनी सहायता प्रदान करना और दूसरी रणनीति माफी के लिए कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से संपर्क करना।

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कतर में लोकतंत्र नहीं, बल्कि राजशाही है और कतर के शाह के पास किसी भी दोषी को माफ करने का या सजा को कम करने शक्ति है। लिहाजा, दीपक मित्तल की दूसरी रणनीति ये होने वाली है। कतर के शाह अपनी इस शक्ति का इस्तेमाल हर साल 18 दिसंबर को कतर के राष्ट्रीय दिवस पर कैदियों को रिहा करने के लिए करते हैं।

लिहाजा, साउथ ब्लॉक को उम्मीद है, कि कतर के शाह, भारत और कतर के बेहद मजबूत संबंधों को देखते हुए आठों पूर्व नेवी अफसरों की फांसी की सजा को माफ कर देंगे। वहीं, भारत के पक्ष में उसका कतर के साथ कारोबार जाता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 45 से 50 प्रतिशत गैस कतर से खरीदता है, लिहाजा कतर भी अपने सबसे महत्वपूर्ण ग्राहक को नाराज नहीं करना चाहेगा।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर वेस्ट एशियन स्टडीज के प्रोफेसर ए.के महापात्रा कहते हैं, कि "भारत के पास कई डिप्लोमेटिक विकल्प हैं। सबसे पहली बात ये, कि कतर कोई भारत का दुश्मन नहीं है और भारत के साथ उसकी काफी अच्छी दोस्ती रही है, लिहाजा भारत यहां अपने दोस्ताना संबंधों का इस्तेमाल करेगा।"

उन्होंने आगे कहा, कि "भारत का कतर के साथ मजबूत आर्थिक रिश्ते हैं, भारत को कतर से गैस की सप्लाई होती है और कतर में करीब 6 से 7 लाख भारतीय भी रहते हैं। भारतीय कंपनियों ने कतर में भारी निवेश किया हुआ है, लिगाजा ना तो भारत और ना ही कतर, अपने संबंधों को इस वजह से दांव पर लगाना चाहेंगे।"

महापात्रा कहते हैं, कि "डिप्लोमेटिक स्तर पर भारत इस समस्या के समधान के लिए विकल्प खोजेगा और क्षेत्रीय दबाव भी कतर पर बनाने की कोशिश करेगा, जिसमें भारत की मदद ओमान और अमेरिका जैसे देश कर सकते हैं, जिनके कतर के शासन पर गहरा असर है। कतर पर अभी भी अमेरिका का वर्चस्व है, लिहाजा भारत अमेरिका से मदद ले सकता है।"

लिहाजा, अब देखना दिलचस्प होगा, कि भारत किन विकल्पों के सहारे आगे बढ़ता है और क्या कतर के अमीर से पूर्व अधिकारियों को माफी मिलेगी या फिर भारत को ऊपरी अदालतों का दरवाजा खटखटाना होगा?

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