पाकिस्तानी पत्रकार इमरान रियाज 4 महीनों के बाद लौटे घर, आर्मी के कब्जे से जिंदा वापसी पर परिवार हैरान

Pakistan News: पाकिस्तान के चर्चित पत्रकार इमरान रियाज खान, जो इमरान खान के खेमे के रहे हैं, वो करीब 4 महीने बाद सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। पाकिस्तानी आर्मी के कब्जे से जिंदा लौटने के बाद उनके परिवार ने इसे 'अल्लाह का विशेष आशीर्वाद' करार दिया है।

पाकिस्तानी अखबार डॉन ने सोमवार सुबह सियालकोट पुलिस का हवाला देते हुए बताया है, कि चर्चित पाकिस्तानी पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार इमरान रियाज़ खान, जो चार महीने से ज्यादा समय से लापता थे, वो मिल गए हैं और "अब अपने परिवार के साथ हैं।"

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वहीं, सियालकोट पुलिस ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, कि "पत्रकार/एंकर इमरान रियाज़ खान को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। वह अब अपने परिवार के साथ हैं।"

यूट्यूब पर 30 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स वाले विवादास्पद 47 वर्षीय टीवी एंकर और कमेंटेटर इमरान रियाज खान को कथित तौर पर मई में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के चेयरमैन इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद देश भर में 9 मई को हिंसक विरोध प्रदर्शन के दो दिन बाद गिरफ्तार किया गया था।

महीनों की गिरफ्तारी के बाद वापसी

डॉन ने बताया, कि रियाज़ खान को आखिरी बार गिरफ्तारी के बाद कैंट पुलिस स्टेशन और बाद में सियालकोट जेल ले जाने की जानकारी थी। 15 मई को, एक कानून अधिकारी ने लाहौर उच्च न्यायालय (एलएचसी) को बताया था, कि पत्रकार को लिखित में शपथ लेने के बाद जेल से रिहा कर दिया गया था। लेकिन, उसके बाद भी वो गायब थे और वो कहां थे, इसकी जानकारी किसी को नहीं थी।

16 मई को रियाज़ खान के पिता मुहम्मद रियाज़ ने सियालकोट सिविल लाइंस पुलिस में पत्रकार के कथित अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी।

वहीं, अब पंजाब के महानिरीक्षक उस्मान अनवर और सियालकोट जिला पुलिस अधिकारी हसन इकबाल ने डॉन से पुष्टि की कि इमरान अब "घर पर सुरक्षित" हैं।

रियाज़ खान के वकील मियां अली अशफाक ने भी सोशल मीडिया पर पुष्टि की है, कि "भगवान के विशेष आशीर्वाद, कृपा और दया से, मैं अपने 'प्रिंस' को वापस ले आया हूं।"

उन्होंने कहा, कि "मुश्किलों का अंबार था और कोई जानकारी नहीं थी, कमजोर कोर्ट और पाकिस्तान के अप्रभावी संविधान और कानून की लाचारी की वजह से उनकी वापसी में काफी समय लग गया।"

उनके वकील ने आगे कहा, "अकथनीय परिस्थितियों के बावजूद, अल्लाह सर्वशक्तिमान ने हमें यह सबसे अच्छा दिन दिखाया। अभी केवल असीमित आभार।"

आपको बता दें, कि पाकिस्तान लंबे समय से पत्रकारों के लिए असुरक्षित देश रहा है। हाल के वर्षों में, पाकिस्तानी कार्यकर्ता और पत्रकारों को पाकिस्तान की सेना ने निशाना बनाया है। पाकिस्तान में पत्रकारों को घर से उठा लिया जाता है और दर्जनों ऐसे पत्रकार होते हैं, जो फिर कभी वापस नहीं लौट पाते हैं। कहा जाता है, कि पाकिस्तान की आर्मी उन्हें हमेशा के लिए गायब कर देती है।

इससे पहले, पत्रकार अरशद शरीफ, जो पाकिस्तानी सेना के आलोचक थे, उन्हें पिछले साल अक्टूबर में केन्या में हत्या कर दी गई थी, क्योंकि वह सुरक्षा एजेंसियों से अपनी जान को खतरा बताकर देश छोड़कर भाग गए थे।

इमरान रियाज़ खान को हिरासत में लिया गया और फिर लापता हो गए

रियाज़ खान को अपनी रिपोर्टिंग के ज़रिए लोगों को हिंसा के लिए उकसाने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। इमरान को तत्कालीन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार के तहत हिरासत में लिया गया था।

उन्हें 11 मई को गिरफ्तार किया गया था। जब, 9 मई को पूर्व पाकिस्तानी प्पधानमंत्री इमरान खान को गिरफ्तार किया गया था और उस दिन पाकिस्तान में हिंसा भड़क गई थी। रियाज़ खान कथित तौर पर इमरान खान के समर्थक थे और सेना की आलोचना किया करते थे।

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स, जिसे विश्व स्तर पर इसके फ्रांसीसी संक्षिप्त नाम आरएसएफ द्वारा जाना जाता है, उसने मई के अंत में दावा किया था, कि उसे "गोपनीय राजनयिक स्रोतों" से जानकारी मिली थी, कि रियाज़ खान को काफी ज्यादा प्रताड़ित किया गया था और "हिरासत में उनकी मृत्यु भी हो सकती है।"

मानवाधिकार समूहों ने तब से इसे "जबरन गायब करना" कहकर इसकी निंदा की थी।

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