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पागल हो गया पाकिस्तान! ईशनिंदा के आरोप में नाबालिग ने की 55 साल के शख्स की हत्या, 1 महीने में तीसरी घटना

Pakistan Blasphemy: पाकिस्तान अपनी समाज में कट्टरता का जहर किस हद तक घोल चुका है, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं, कि कोई भी शख्स ईशनिंदा, यानि पैगंबर या अल्लाह के अपमान का आरोप लगाकर, किसी भी हत्या कर देता है।

ईशनिंदा से संबंधित पाकिस्तान में पिछले चार दिनों में सनसनीखेज हत्या का दूसरा मामला सामने आया है। पुलिस ने सोमवार को बताया है, कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक किशोर लड़के ने पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगाकर 55 साल के एक शख्स की चाकू मारकर हत्या कर दी। यह चार दिनों में दूसरा और एक महीने के भीतर तीसरा ऐसा मामला है, जब किसी की ईशनिंदा के आरोप में हत्या की गई है।

Blasphemy in Pakistan

पाकिस्तानी समाज में घुला कट्टरता का जहर

ताजा घटना लाहौर से करीब 170 किलोमीटर दूर गुजरात के कुंजाह में हुई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, कि नाबालिग छात्र ने पिता और चाचा की टिप्पणियों से उकसाए जाने के बाद शिया अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य नजीर हुसैन शाह को चाकू मार दिया।

आरोपी लड़के के पिता और चाचा ने पुलिस अधिकारियों को बताया है, कि मृतक नजीर अक्सर पैगंबर के साथियों के खिलाफ बोलता रहता था।

पुलिस अधिकारी ने कहा, "अपने पिता और चाचा की बातों से उत्तेजित होकर, नाबालिग आरोपी ने अपने घर से चाकू लिया और रविवार दोपहर आरोपी नजीर शाह पर हमला कर दिया और उस पर कई बार चाकू से वार किया और उसे मौके पर ही मार डाला। इसके बाद लड़का मौके से भाग गया।"

उन्होंने कहा कि लड़के को गिरफ्तार करने के लिए एक टीम बनाई गई है। पिता और चाचा के खिलाफ पाकिस्तान पीनल कोड की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ईशनिंदा से संबंधित हत्या के ताजा मामले

यह घटना गुरुवार को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के खूबसूरत पाकिस्तानी शहर स्वात में पिछले हफ्ते ही एक शख्स की थाने से खींचकर की गई हत्या के बाद हुई है। स्वात में एक पर्यटक पर कुरान के पन्नों को फाड़ने का आरोप लगाकर उसे भीड़ ने पहले सड़क पर बुरी तरह से घसीटा और फिर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी और फिर उसके शव को बाजार में फांसी के फंदे से लटका दिया।

पीड़ित का नाम मुहम्मद इस्माइल था और उसपर कुछ लोगों ने इस्लामिक किताब कुरान के पन्नों को जलाने का आरोप लगाया था।

स्थानीय पुलिस के मुताबिक, आरोपी को लेकर बाजार में कुछ लोगों ने हल्ला शुरू कर दी थी, उस शख्स ने ईशनिंदा की है, जिसके बाद लोगों की भीड़ ने उस व्यक्ति को पकड़ लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। संदिग्ध को हिरासत में लेकर मद्यन पुलिस स्टेशन लाया गया। लेकिन, फिर गुस्साई भीड़ पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हो गई और उसे सौंपने की मांग की। पुलिस ने जब आरोपी को सौंपने से इनकार किया, भीड़ ने गोलियां चला दीं और पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। जिसके बाद भीड़ ने पुलिस स्टेशन और एक वाहन को आग लगा दी।

स्वात में शख्स की हत्या किए जाने की इस घटना से ठीक एक महीने पहले पाकिस्तानी पंजाब में कट्टरपंथियों की भीड़ ने ईशनिंदा का आरोप लगाकर अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया, जिसमें दो लोग गंभीर घायल हो गये, जिनमें से एक की अस्पताल में मौत हो गई।

पाकिस्तानी संसद में मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून

पाकिस्तान की संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली ने रविवार को भीड़ द्वारा हत्या की हालिया घटनाओं की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है। इस घटना पर व्यापक आलोचना के बाद जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के सांसदों ने इसका विरोध किया है।

पीटीआई ने पाकिस्तानी संसद में कहा, कि "पाकिस्तानी संसद ने स्वात और सरगोधा में ईशनिंदा के आरोपी हमारे नागरिकों की हाल ही में भीड़ द्वारा हत्या किए जाने की घटना को गंभीरता से लिया है। यह देखा गया है, कि देश के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में ऐसी घटनाओं में वृद्धि हुई है, इसने संघीय और प्रांतीय सरकारों से "धार्मिक अल्पसंख्यकों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों सहित सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने" का आग्रह किया है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने रविवार को स्वीकार किया है, कि पाकिस्तान, अपने अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में नाकाम रहा है और उन्हें धर्म के नाम पर टारगेट अटैक का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा, "अल्पसंख्यकों की प्रतिदिन हत्या की जा रही है... पाकिस्तान में कोई भी धार्मिक अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है। मुसलमानों के छोटे-छोटे संप्रदाय भी सुरक्षित नहीं हैं।" मंत्री ने आगे कहा, कि व्यक्तिगत प्रतिशोध के कारण कई पीड़ितों को ईशनिंदा के आरोपों में निशाना बनाया गया है।

कितना खतरनाक होता जा रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान के नेताओं ने भारत से अलग होने के बाद से ही अपने देश को मजहब के नाम पर जहरीला बनाया है। पाकिस्तान के घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों का कहना है, कि ईशनिंदा के आरोपों का इस्तेमाल अक्सर धार्मिक अल्पसंख्यकों को डराने और व्यक्तिगत बदला लेने के लिए किया जाता है।

पाकिस्तान में ईसाई और हिंदू समेत कई धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अक्सर ईशनिंदा के आरोप लगाए गए हैं और देश के सख्त ईशनिंदा कानून के तहत उन पर मुकदमा चलाया गया है और उन्हें सज़ा सुनाई गई है। ईशनिंदा के आरोप, लोगों को मामले को अपने हाथों में लेने के लिए उकसाते हैं और फिर अकसर भीड़, लोगों की हत्या कर देती है।

डॉन के मुताबिक, 1987 से 2022 के बीच कम से कम 2,120 लोगों पर ईशनिंदा करने का आरोप लगाया गया है। अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग की 2023 की रिपोर्ट में कहा गया है, कि पिछले साल से पाकिस्तान की धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार खराब हो रही है। इसमें कहा गया है, "धार्मिक अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले और धमकियां दी जा रही हैं, जिनमें ईशनिंदा, लक्षित हत्याएं, लिंचिंग, भीड़ द्वारा हिंसा, जबरन धर्म परिवर्तन, महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ यौन हिंसा और पूजा स्थलों और कब्रिस्तानों को अपवित्र करने के आरोप शामिल हैं।"

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