कांग्रेस के लिए भी इमरान खान 'भाईजान' या सिद्धू पर होगी कार्रवाई? अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग करेंगे राहुल?

इमरान खान को 'भाई जान' बताने वाले सिद्धू के खिलाफ कांग्रेस कार्रवाई करेगी? या कांग्रेस भी अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करने की मांग करेगी?

नई दिल्ली, नवंबर 21: क्या पाकिस्तान के नाम पर कांग्रेस दो खेमों में बंटती नजर आ रही है और क्या पाकिस्तान को लेकर राहुल गांधी 'सॉफ्ट नीति' के सहारे राजनीतिक सफर पर आगे का रास्ता बनाने की सोच रहे हैं? ये सवाल इसलिए है, क्योंकि नवजोत सिंह सिद्धू ने पाकिस्तान जाकर एक बार फिर से इमरान खान को अपना 'बड़ा भाई' कहा है, जिसको लेकर कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने गहरी आपत्ति जताई है। लेकिन, असल सवाल ये है कि, क्या कांग्रेस आलाकमान की तरफ से पाकिस्तान को लेकर अपनी 'नीति' स्पष्ट की जाएगी? या फिर अब जब कृषि कानूनों की वापसी के साथ ही कुछ नेता कश्मीर में आर्टिकिल 370 की वापसी की मांग कर रहे हैं, तो क्या कांग्रेस उन नेताओं के साथ खड़ी नजर आएगी?

सिद्धू का 'पाकिस्तान प्रेम'

सिद्धू का 'पाकिस्तान प्रेम'

पंजाब कांग्रेस में उथल-पुथल मचा चुके नवजोत सिंह सिद्धू ने जब करतारपुर साहिब की यात्रा के दौरान कथित तौर पर पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान को अपना "बड़ा भाई" कहा, तो फिर कांग्रेस के अंदर ही सिद्धू के बयान का विरोध होने लगा। विपक्ष को तो सिद्धू के बयान पर ऐतराज है ही, कांग्रेस के मनीष तिवारी जैसे नेता भी सिद्धू की आलोचना करने लगे। बीजेपी की तरफ से सिद्धू के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि, कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए, कि उनके एक नेता हिंदुत्व की तूलना आईएसआईएस और बोको हरम से करते हैं, जबकि दूसरे नेता इमरान खान को 'भाई जान' मानते हैं, लिहाजा देश की सबसे पुरानी पार्टी को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

सिद्धू पर भड़के मनीष तिवारी

सिद्धू पर भड़के मनीष तिवारी

शनिवार को कांग्रेस के अंदर सिद्धू के बयान पर दो फाड़ हो गया, जब कांग्रेस के दिग्गज नेता मनीष तिवारी ने साफ तौर पर सिद्धू के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री "किसी के बड़े भाई" हो सकते हैं, लेकिन भारत के लिए इमरान खान "बिल्ली का पंजा" हैं। मनीष तिवारी ने इमरान खान के लिए 'केट्स पॉउ' शब्द का इस्तेमाल किया है, जिससे उनका मतलब ''डीप स्टेट के लिए अप्रिय और खतरनाक कार्य करना है। कांग्रेस नेता ने इमरान खामन को वो शख्स बताया, जिसके पीछे से कुख्यात इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और सेना भारत के खिलाफ हिंसक घटनाओं को अंजाम देती है, जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों तक ड्रोन, हथियारों को पहुंचाती है और पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए इमरान खान का इस्तेमाल करती है।

जवानों की शहादत का जिक्र

मनीष तिवारी ने अपने ट्वीट में कश्मीर में शहीद होने वाले जवानों का जिक्र करते हुए सिद्धू पर निशाना साधा है और कहा है कि, क्या हम इतनी जल्दी पुंछ में अपने जवानों की शहादत को भूल गए हैं? तिवारी ने पिछले महीने जम्मू-कश्मीर जिले में एक मुठभेड़ का जिक्र करते हुए पूछा, जिसमें भारतीय सेना के तीन जवान और एक जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) एक आतंकवादियों से मुठभेड़ करते हुए शहीद हो गये थे। आपको बता दें कि, सिद्धू का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें पाकिस्तान के एक बड़े अधिकारी उनका पाकिस्तान में स्वागत करते हुए देखे जा रहे हैं, जिसमें सिद्धू इमरान खान को अपना बड़ा भाई बता रहे हैं।

सिद्धू पर स्थिति साफ क्यों नहीं?

सिद्धू पर स्थिति साफ क्यों नहीं?

सिद्धू ने कोई पहली बार पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की शान में कसीदे नहीं पढ़े हैं। इससे पहले वो पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को गले से लगा चुके हैं और इमरान खान की जमकर तारीफ कर चुके हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि, आखिर कांग्रेस सिद्धू को लेकर अपना रूख स्पष्ट क्यों नहीं करती है या फिर कांग्रेस का भी पाकिस्तान पर 'नया विचार' वही है, जो सिद्धू का है? क्योंकि, भारत और पाकिस्तान के संबंध इन दिनों काफी खराब स्तर पर हैं और कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने के बाद कांग्रेस के निशाने पर हमेशा से बीजेपी की सरकार रही है। कांग्रेस के नेता खुले तौर पर कश्मीर से 370 हटाने का विरोध कर चुके हैं, लेकिन जब मोदी ने इस हफ्ते कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा की है, तो फिर कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी 370 की फिर से बहाली की मांग कर दी।

कांग्रेस करेगी अनुच्छेद 370 बहाली की मांग?

कांग्रेस करेगी अनुच्छेद 370 बहाली की मांग?

महबूबा मुफ्ती का अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग आश्चर्यजनक नहीं है, लेकिन सवाल ये है कि क्या राहुल गांधी और कांग्रेस भी अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग करेंगे? बात बहुत साफ है, अगर पार्टी सिद्धू के पाकिस्तान प्रेम के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है, तो फिर इसका मतलब क्या माना जाए? क्या 2014 के बाद वाली कांग्रेस को देश के शहीदों से कोई मतलब नहीं है? क्या नई कांग्रेस भी हिंदुत्व को आईएसआईस और बोको हरम जैसा मानती है? क्या राहुल गांधी को सिद्धू के बयान पर सफाई नहीं देनी चाहिए? या फिर कांग्रेस ने सिद्धू जैसे नेताओं को जान-बूझकर पाकिस्तान की भाषा बोलने के लिए छोड़ रखा है? सवाल कई हैं, जिनका जवाब कांग्रेस आलाकमान को देनी चाहिए।

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