75 भारतीय सैनिकों हटा रहा मालदीव, क्या अब चीनी सैनिक लेंगे जगह, नए राष्ट्रपति मुइज्जू ने बताया प्लान
भारतीय सैनिकों को अपने देश से निकालने का वादा करने वाले मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने कहा कि उनका देश भूराजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में उलझने के लिए बहुत छोटा है। दो दिन बाद यानी कि 17 नवंबर को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से पहले एक इंटरव्यू में मुइज्जू ने कहा कि मालदीव, भारत और चीन सहित सभी देशों के साथ मिलकर काम करने जा रहा है।
एएफपी को दिए गए एक इंटरव्यू में मालदीव के नए राष्ट्रपति मुइज्जू ने आगे कहा कि उन्हें मालदीव की विदेश नीति को भूराजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में उलझाने में बहुत दिलचस्पी नहीं है। अक्टूबर में ब्लूमबर्ग न्यूज द्वारा प्रकाशित एक साक्षात्कार में मुइज्जू ने कहा था कि मालदीव ने अपनी सैन्य उपस्थिति हटाने के लिए भारत के साथ बातचीत शुरू कर दी है।

मुइज्जू ने कहा कि वे चीन को मालदीव में भारत की जगह नहीं लेने देंगे। उन्होंने कहा कि भारत से सैन्यकर्मियों को हटाने के लिए कहना किसी भी तरह से यह संकेत नहीं देता है कि वह चीन या किसी अन्य देश को मालदीव में अपनी सैन्य टुकड़ियों को लाने की अनुमति देने जा रहे हैं।
मुइज्जू ने कहा कि मालदीव की जनता ने उन्हें इसलिए नहीं जिताया कि वे दूसरे देशों की सेनाओं को यहां तैनात होने दें। नए राष्ट्रपति ने कहा कि वो इसी वजह से भारत के संपर्क में हैं। उन्होनें उम्मीद जताई कि ये मुद्दा शांति और लोकतांत्रिक तरह से सुलझ जाएगा।
मुइज्जू को चीन समर्थक पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन का प्रतिनिधि माना जाता था, जिन्होंने 2018 में अपनी हार तक देश को बीजिंग के पाले में स्थानांतरित कर दिया था। उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि वे भारत सरकार के साथ 75 सैनिकों को निकालने के लिए चर्चाएं कर रहे हैं।
मालदीव में हैं 75 भारतीय सैनिक
साल 2020 और 2013 में भारत ने मालदीव को उपहार में डोर्नियर विमान और दो हेलीकॉप्टर दिए थे। इन विमान और हेलिकॉप्टरों को संचालित करने के लिए 75 भारतीय सैन्यकर्मी मालदीव में तैनात थे। भारतीय सेना लंबे समय से मालदीव में हैं। वे वहां के लोगों की मदद करने के लिए तैनात हैं।
चुनाव से पहले इस पर मालदीव में काफी हंगामा हुआ। मुइज्जू के नेतृत्व में विपक्ष ने तत्कालीन राष्ट्रपति सोलिह पर 'इंडिया फर्स्ट' नीति का अपनाने का आरोप लगाया था। इसके बाद मालदीव के विपक्षी दलों ने 'इंडिया आउट' अभियान शुरू कर दिया। उनकी मांग थी कि भारतीय सुरक्षा बल के जवान मालदीव छोड़ें।












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