मालदीव की संसद में चले लात घूंसों की इनसाइड स्टोरी, चीन समर्थक राष्ट्रपति और भारत समर्थक संसद में जंग!
Maldives Parliament: मालदीव में पिछले साल नवंबर में मोहम्मद मुइज्जू ने राष्ट्रपति पद का कार्यकाल शुरू किया था, लेकिन उनका कार्यकाल भारत विरोध से ही शुरू हुआ है। इन दो महीनों में मोहम्मद मुइज्जू के ज्यादातर फैसले भारत के खिलाफ रहे हैं और इस महीन भारत और मालदीव के बीच गतिरोध काफी गर्म भी रहा है।
लेकिन, मालदीव की संसद में कल चले लात-घूंसों के बीच सवाल उठ रहे हैं, कि क्या मोहम्मद मुइज्जू के लिए भारत विरोधी फैसले लेना और फिर उन्हें संसद में पास करना क्या इतना ही आसान होगा? क्योंकि मालदीव की संसद में जो पार्टी अभी भी बहुमत में है, वो भारत समर्थक है।

मालदीव की संसद में चले लात घूंसे
28 जनवरी को संसद में झड़प के पीछे की वजह ये थी, कि राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू अपनी कैबिनेट का विस्तार करना चाहते थे, लेकिन उनकी कैबिनेट में शामिल होने वाले चार सदस्यों को लेकर उनकी विपक्षी पार्टियों को गहरी आपत्ति थी, जिसके बाद सरकार समर्थक सांसदों और विपक्षी सांसदों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई।
मालदीव की मुख्य विपक्षी पार्टी का नाम है, मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी), जो भारत समर्थक है, और उसने कैबिनेट के सदस्यों को लेकर संसद में मतदान से पहले, राष्ट्रपति मुइज़ू के मंत्रिमंडल के चार सदस्यों के लिए संसदीय मंजूरी रोकने का फैसला किया।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इसके बाद, सरकार समर्थक सांसदों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे संसदीय बैठक की कार्यवाही बाधित हो गई।
संसद में मारपीट के दौरान, कांदिथीमू के सांसद अब्दुल्ला शाहीम अब्दुल हकीम शाहीम और केंधिकुलहुधू के सांसद अहमद ईसा के बीच उस समय बहस हो गई, जब सांसद अहमद ईसा फिसल गए और नीचे गिर गये।
हाथापाई के दौरान दोनों सांसद चैंबर के पास गिर गए, जिससे शहीम के सिर पर भी चोटें आईं। अल्पसंख्यक नेता मूसा सिराज ने विवाद को रोकने का प्रयास किया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सांसद शहीम को अब अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
मालदीव के संसद को समझें
मालदीव की संसद मुख्य तौर पर चार पार्टियों के सबसे ज्यादा सांसद हैं। सबसे बड़ी पार्टी है मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी, जो भारत समर्थक है। जिसके बाद है राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव, जिसे पीपुल्स नेशनल कांग्रेस (पीपीएम/पीएनसी) का समर्थन हासिल है।
लेकिन, संख्या बल के हिसाब से भारत समर्थक मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी, संसद की सबसे बड़ी पार्टी है और इसकी मंजूरी के बिना, राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, संसद से कोई भी बिल को पास नहीं करवा सकते हैं।
यानि, मालदीव से अभी भारत ऑउट नहीं हुआ है।
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में सांसदों को स्पीकर की कुर्सी के पास इकट्ठा होते और हाथापाई करते देखा जा रहा है।
इस बीच मथिवेरी से सांसद हसन जरीर की उंगली पर भी गंभीर चोटें आईं। एक सांसद के मुताबिक, सदस्यों के बीच मारपीट के दौरान जरीर घायल हो गए। हालांकि, मारपीट के बाद मतदान को रोक दिया गया है, लेकिन सरकार समर्थक सांसदों ने संसद के बाहर भारी प्रदर्शन किया है।
MDP, जिसके पास संसद में बहुमत है, उसने अटॉर्नी जनरल अहमद उशम, आवास, भूमि और शहरी विकास मंत्री डॉ. अली हैदर, इस्लामी मामलों के मंत्री डॉ. मोहम्मद शहीम अली सईद और आर्थिक विकास और व्यापार मंत्री मोहम्मद सईद को के खिलाफ मतदान करने का फैसला किया।
जिसको लेकर मालदीव की सत्तारूढ़ प्रोग्रेसिव पार्टी (पीपीएम) और पीपुल्स नेशनल कांग्रेस (पीएनसी) गठबंधन ने कहा है, कि राष्ट्रपति मुइज्जू के मंत्रिमंडल को संसदीय मंजूरी देने से इनकार करना, सरकार द्वारा नागरिकों को दी जाने वाली सेवाओं में बाधा डालने के समान होगा।
इस बीच, Sun.mv समाचार वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, सत्तारूढ़ पीपीएम-पीएनसी गठबंधन ने संसद के अध्यक्ष मोहम्मद असलम और उपाध्यक्ष अहमद सलीम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दायर किया है। स्पीकर मोहम्मद असलम भारत समर्थक माने जाते हैं, लेकिन उन्हें हटाने के लिए मोहम्मद मुइज्जू के गठबंधन के पास संसदीय बहुमत नहीं है।
अविश्वास प्रस्ताव कैबिनेट की रुकी हुई मंजूरी से उपजा है। इसमें कहा गया है कि गठबंधन ने स्पीकर असलम पर एक निश्चित पार्टी के हितों को पूरा करने के लिए अपनी आधिकारिक क्षमता का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।
लिहाजा, मालदीव की संसद में शुरू हुआ ये ड्रामा अभी लंबे वक्त तक चलने वाला है, लेकिन कल हुई मारपीट के बाद ये तय हो गया है, कि मालदीव में भारत अभी भी भी मोहम्मद मुइज्जू को एंटी-इंडिया फैसले खुलकर नहीं लेने देगा।












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