मुइज्जू की फिर से थू-थू, मालदीव संसद में भारी हंगामे के बाद भी मंत्रियों को नहीं मिली मंजूरी

मालदीव की संसद ने सोमवार को चीन समर्थक राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के मंत्रिमंडल के चार सदस्यों में से केवल एक को मंजूरी मिल पाई है। संसद ने राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज्जू के मंत्रिमंडल के तीन सदस्यों को मंजूरी देने से इनकार करते हुए कैबिनेट की मंजूरी पर अपना मतदान पूरा कर लिया है।

जिन तीन लोगों को संसद की मंजूरी नहीं मिली, वे हैं अटॉर्नी जनरल अहमद उशाम, आवास, भूमि और शहरी विकास मंत्री डॉ. अली हैदर अहमद और इस्लामी मामलों के मंत्री डॉ. मोहम्मद शहीम अली सईद। वहीं, आर्थिक मंत्री मोहम्मद सईद बाल-बाल बच गए हैं।

Maldives Cabinet ministers

विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी घोषणा की थी कि वह आर्थिक विकास और व्यापार मंत्री मोहम्मद सईद को मंजूरी देने से इनकार कर देगी, लेकिन उनके पक्ष में पड़े कुल 37 वोटों के साथ उन्हें मंजूरी मिल गई।

संसद की मंजूरी प्राप्त करने के लिए आवश्यक वोटों की न्यूनतम संख्या 35 वोट है। राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज्जू के मंत्रिमंडल के 22 सदस्यों में से 19 को संसदीय मंजूरी मिल गई है। 45 वर्षीय राष्ट्रपति मुइज्जू ने कार्यभार संभालने के दो दिन बाद 20 नवंबर को अपने मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए औपचारिक अनुरोध किया था।

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इससे पहले संसद में 18 दिसंबर को कैबिनेट पर मतदान होना था, लेकिन सरकारी निगरानी समिति की मूल रिपोर्ट को खारिज कर दिया गया था। समिति की नई रिपोर्ट पर वोटिंग के लिए संसद ने रविवार को एक बैठक बुलाई, जिसे 30 दिसंबर को पारित किया गया था, लेकिन रविवार को मतदान से ठीक पहले मुख्य विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) ने मुइज्जू के मंत्रिमंडल के चार सदस्यों के लिए संसदीय मंजूरी को रोकने का फैसला किया और उनके खिलाफ तीन-पंक्ति का रेड व्हिप जारी किया।

इस कदम से सरकार समर्थक और विपक्षी सांसदों के बीच झड़पें शुरू हो गईं, जिससे संसदीय बैठक की कार्यवाही बाधित हो गई। लंबे समय से लंबित मतदान आखिरकार सोमवार दोपहर को हुआ और संसद ने हैदर, शहीम और उशम को खारिज कर दिया। हैदर को 46-24 वोटों से खारिज कर दिया गया। उशम को 44-24 और शहीम को 31-30 वोटों के साथ खारिज कर दिया गया। हालांकि, सईद ने 37-32 के वोट के साथ बाल-बाल बच गए।

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले में कहा गया है कि किसी मंत्री को संसद की मंजूरी न मिलने पर भी उसका पद नहीं हटाया जाता है। इसके बजाय, उसे केवल तभी उसके पद से बर्खास्त किया जा सकता है जब राष्ट्रपति द्वारा निर्णय लिया जाए, या यदि वह स्वयं अपना इस्तीफा प्रस्तुत करता है। आदेश में कहा गया है कि जब तक इस तरीके से बर्खास्त न किया जाए, कोई मंत्री वास्तविक रूप से अपने पद पर बना रह सकता है।

इससे पहले एमडीपी ने राष्ट्रपति मुइज्जू के खिलाफ महाभियोग लाने के लिए पर्याप्त संख्या में प्रस्ताव पर हस्ताक्षर जुटा लिए हैं। मालदीव सरकार के खिलाफ वहां का विपक्ष एकजुट हो गया है। एमडीपी के साथ ही विपक्षी पार्टी डेमोक्रेट भी राष्ट्रपति मुइज्जू के खिलाफ महाभियोग का समर्थन कर रही है।

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