इस पड़ोसी देश में भारत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर लगा प्रतिबंध, भारत के खिलाफ बोलना राष्ट्रीय खतरा

इंडिया ऑउट कैंपेन चलाने वाली मुख्य विपक्षी पार्टी लगातार दावे करती रही है, कि मालदीव में भारतीय सेना मालदीव की सुरक्षा के नाम पर मौजूद है, लेकिन मालदीव की सरकार इससे इनकार करती है।

माले, अप्रैल 22: हिंद महासागर में भारत के लिए रणनीतिक तौर पर काफी अहम माने जाने वाले पड़ोसी देश मालदीव में भारत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और किसी भी तरह के कैंपेन चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मालदीव के राष्ट्रपति ने आदेश जारी करते हुए किसी भी तरह के भारत के खिलाफ प्रदर्शन को मालदीव की सुरक्षा के खतरा करार दिया है और प्रदर्शनों पर पाबंदी लगा दी है।

विरोध प्रदर्शनों पर पाबंदी

विरोध प्रदर्शनों पर पाबंदी

मालदीव के राष्ट्रपति ने स्पेशल आदेश जारी करते हुए मालदीव में भारत के खिलाफ किसी भी तरह के कैंपेन चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। मालदीव में पिछले कई महीनों से 'इंडिया आउट' अभियान चलाया जा रहा है, जिसको लेकर राष्ट्रपति ने एक आदेश जारी किए हैं। मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने भारत विरोधी प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने का 'डिक्री' जारी कर दिया है। डिक्री जारी करने का मकसद उकसाने वाले नारों, अभियानों और विरोध को रोकना होता है और मालदीव में पिछले कई महीनों से भारत विरोधी कैंपेन चलाए जा रहे हैं और मालदीव सरकार ने कहा है कि, जो कैंपेन चलाए जा रहे हैं, उससे दोनों देशों के बीच के संबंध खराब हो सकते हैं और क्षेत्र की शांति और सुरक्षा बनाए रखने के प्रयास में बाधा उत्पन्न हो सकता है।

राष्ट्रपति ने जारी किए आदेश

राष्ट्रपति ने जारी किए आदेश

मालदीव के राष्ट्रपति सोलिह ने सभी संबंधित अधिकारियों को कानून के उपलब्ध प्रावधानों के तहत कदम उठाकर डिक्री को लागू करने का आदेश दिया है। मालदीव की स्थानीय भाषा धिवेही भाषा में जारी डिक्री में कहा गया है कि, देश में तैनात राजनयिकों और राजनयिक मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना देश का कर्तव्य है। कुछ महीने पहले, भारतीय राजनयिकों को धमकियां दी गई हैं और सोशल मीडिया पर भारत के खिलाफ कैंपेन चलाया गया है, जिसको लेकर सरकार ने भारतीय मिशनों को अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराने का फैसला किया है।

मालदीव में भारत विरोधी कैंपेन

मालदीव में भारत विरोधी कैंपेन

मालदीव में पिछले कई महीनों से भारत विरोधी अभियान चलाए जा रहे हैं और सबसे पहले भारत विरोधी अभियान का नेतृत्व एक सोशल मीडिया कार्यकर्ता ने किया था, लेकिन पिछले दिसंबर में जेल से रिहा होने के बाद से पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन इसका चेहरा बन गए हैं। बुधवार को, राजधानी माले में उनके आवास के बाहर एक विशाल "इंडिया आउट" बैनर लटका हुआ देखा गया। हालांकि, बाद में पुलिस ने गुरुवार को कोर्ट के आदेश पर इसे हटा लिया। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन चीन के काफी करीबी हैं और 2013 से 2018 तक मालदीव में उनका ही कार्यकाल था और इस दौरान उन्होंने मालदीव की विदेश नीति को चीन के काफी करीब ला दिया। इस दौरान चीन हिंद महासागर में मालदीव के रास्ते दाखिल हो गया और शक्ति प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। इसके साथ ही चीन ने हिंद महासागर में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव प्रोजेक्ट लॉंच कर दिया।

चुनाव में भारत बनेगा बड़ा मुद्दा

मालदीव में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं और माना जा रहा है, कि राष्ट्रपति चुनाव के कैंपेन में भारत एक बड़ा मुद्दा बनेगा। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के दफ्तर के बाहर भारत विरोधी पोस्टर लगातार देखे जा रहे हैं। मालदीव सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा संसदीय समिति के प्रमुख ने भारत विरोधी कैंपेन को खतरनाक करार दिया है। उन्होंने कहा कि, 'वे इन विरोधों का उपयोग पूरे देश में बड़े पैमाने पर अशांति और अस्थिरता पैदा करने के साधन के रूप में कर रहे हैं। वे सरकार के खिलाफ विद्रोह करना चाहते हैं'। वहीं, राष्ट्रपति के फरमान में कहा गया है कि, सरकार अभिव्यक्ति और रैली की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन अभियान के पीछे शामिल लोग इसका दुरुपयोग कर इसका शोषण कर रहे हैं, जिससे मालदीव में अशांति पैदा होगी और इसे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में अलग-थलग कर दिया जाएगा।

‘भारत के खिलाफ नफरत’ है उद्येश्य

‘भारत के खिलाफ नफरत’ है उद्येश्य

मालदीव राष्ट्रपति ने 'एंटी इंडिया कैंपेन' को भारत के खिलाफ नफरत फैलाने वाला उद्येश्य करार दिया है और राष्ट्रपति के आदेश में कहा गया है कि, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने निष्कर्ष निकाला है कि, ये अभियान, जिसका उद्देश्य "भारत के खिलाफ नफरत भड़काना" है, देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन चुका है और राज्य की संप्रभुता बनाए रखने की क्षमता में बाधा डाल सकता है, और देश की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। क्योंकि, मालदीव के लोग भी विदेश में रह रहे हैं। आपको बता दें कि, मालदीव की सत्तारूढ़ मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी ने पहले 'इंडिया आउट' अभियान पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून लाने पर विचार किया था। प्रस्तावित कानून का एक मसौदा भी सर्कुलेट किया गया था, लेकिन बाद में कानून बनाने का विचार खत्म कर दिया गया। जब इब्राहिम मोहम्मद सोलिह मालदीव के राष्ट्रपति बने, उन्होंने उसी वक्त साफ कर दिया था, कि उनका इरादा भारत के साथ संबंधों को सुधारने की है, जो पूर्ववर्ती सरकार के दौरान सबसे नीचले पायदान पर चली गई थी। मालदीव की सरकार ने अपनी 'इंडिया फर्स्ट' विदेश नीति की भी घोषणा की दी।

भारत मालदीव रिश्तों में सुधार

भारत मालदीव रिश्तों में सुधार

मालदीव में भारत के खिलाफ प्रदर्शनों को इस तरह से भी समझ सकते हैं, कि मालदीव की दो प्रमुख पार्टियों में से एक चीन का करीबी है, तो दूसरी पार्टी भारत की करीबी है। और इस वक्त भारत की करीबी पार्टी सत्ता में है, लिहाजा हिंद महासागर में चीन का कैंपेन भी फिलहाल बंद पड़ा है, लेकिन अगर विपक्षी पार्टी सत्ता में आती है, तो फौरन चीन एक्टिव हो जाएगा। 2018 में इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत और मालदीव के बीच हिंद महासागर में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए भारत ने मालदीव को 500 करोड़ डॉलर का क्रेडिट लाइन दिया था। वहीं, भारत मालदीव में उथुरु थिलाफल्हू एटोल में एक तट रक्षक बेस विकसित करने में भी मदद कर रहा है। इस समझौते में आतंकवाद और उग्रवाद से लड़ने में सहयोग शामिल है।

कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन का सदस्य है मालदीव

कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन का सदस्य है मालदीव

आपको बता दें कि, मालदीव नई दिल्ली द्वारा संचालित कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन का हिस्सा है, जिसमें श्रीलंका और हाल ही में मॉरीशस को भी शामिल किया गया है। कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन को विशेषज्ञ हिंद महासागर में चीन के खिलाफ एक बड़ी रणनीति मानते हैं और इस कार्यक्रम को इसके सभी सदस्य देश 'साक्षा सुरक्षा उद्येश्यों' के लिए काफी अहम मानते हैं, वहीं भारत इस कार्यक्रम का अगुआ है और भारत अपने आप को 'प्रतिक्रियाकर्ता' और 'सुरक्षा देने वाला' सदस्य मानता है।

क्या है ‘इंडिया ऑउट’ कैंपेन?

क्या है ‘इंडिया ऑउट’ कैंपेन?

आपको बता दें कि, इंडिया ऑउट कैंपेन चलाने वाली मुख्य विपक्षी पार्टी लगातार दावे करती रही है, कि मालदीव में भारतीय सेना मालदीव की सुरक्षा के नाम पर मौजूद है, लेकिन मालदीव की सरकार इससे इनकार करती है। लेकिन, इसी नाम पर पिछले कई महीनों से अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें भारतीय सेना को मालदीव से बाहर निकालने की मांग की जा रही है। इस कैंपेन को चीन समर्थन देता है, क्योंकि चीन नहीं चाहता है, कि मालदीव की नीतियों में भारत का वर्चस्व शामिल हो। वहीं, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले महीने मालदीव का दौरा किया था और इस दौरान उन्होंने मालदीव के राष्ट्रपति और विदेश मंत्री से मुलाकात की थी। इस दौरान भारत ने मालदीव द्वीपसमूह के विभिन्न प्रवाल द्वीपों में उच्च प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजना (एचआईसीडीपी) के तहत कई नई परियोजनाओं की घोषणा की थी।

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