• search

मालदीव संकट: माले की जमीन बनेगी भारत और चीन के बीच नए जंग की वजह!

Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    मालदीव में पिछले कुछ दिनों से जो कुछ भी हो रहा है उसने भारत समेत दुनिया के कई देशों को चिंतित कर दिया है। राष्‍ट्रपति अब्‍दुल्‍ला यामीन ने यहां पर 15 दिनों का आपातकाल घोषित कर दिया है। मालदीव के हालात न सिर्फ भारत केि लिए वैचारिक और कूटनीतिक चुनौतियां पैदा करने वाले हैं बल्कि कहीं न कहीं इन हालातों के बाद चीन भी अपने अगले कदम की रणनीति तैयार करने में लग गया है। मालदीव की स्थितियां कहीं न कहीं भारत और चीन के लिए जंग का नया मैदान तैयार करने वाली हैं। 

    कभी नहीं था दूतावास और आज हर जगह चीन

    कभी नहीं था दूतावास और आज हर जगह चीन

    साल 2011 तक इस देश में चीन का कोई दूतावास तक नहीं था लेकिन धीरे-धीरे चीन यहां तक घरेलू राजनीति में एक अहम कड़ी बनकर उभरा। चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के कई बड़े कदम के बाद चीन और मालदीव एक-दूसरे के करीब आ गए। जहां भारत इस देश के साथ अपने व्‍यापारिक रिश्‍ते मजबूत करने की कोशिशों में ही लगा हुआ था, चीन ने मालदीव के साथ एक फ्री ट्रेड समझौता साइन कर लिया।

    चीन की ओर बढ़ता झुकाव

    चीन की ओर बढ़ता झुकाव

    इस समझौते के बाद मालदीव और चीन के बीच ऐसे व्‍यावसायिक और कूटनीतिक रिश्‍तों की शुरुआत हुई जो भारत की मौजूदगी पर असर डालने के लिए काफी हैं। इन समझौतों के बाद चीनी कपंनियों ने एक-एक करके भारतीय कंपनियों को मालदीव में चल रहे इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट्स से बाहर करना शुरू कर दिया। सिर्फ इतना ही नहीं चीनी प्रोजेक्‍ट्स की वजह से मालदीव का झुकाव भी भारत की बजाय चीन की तरफ बढ़ने लगा। करीब 400,000 की आबादी वाला मालदीव चीन के लिए आर्थिक तौर पर अहमियत नहीं रखता है बल्कि इसकी अहमियत चीन के लिए रणनीतिक तौर पर काफी ज्‍यादा है। चीन, मालदीव को भारत से दूर करना चाहता है और इसलिए वह कई ऐसे कदम उठा रहा है जो मालदीव के हित में नजर आते हैं।

    नशीद के बाद बदला माहौल

    नशीद के बाद बदला माहौल

    मोहम्‍मद नशीद जो कि मालदीव के पहले ऐसे राष्‍ट्रपति थे जिन्‍हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुना गया, साल 2012 में सैन्‍य तख्‍तापलट के बाद सत्‍ता से बेदखल कर दिए गए। इसके बाद यहां पर अब्‍दुल्‍ला यामीन का शासन शुरू हुआ और यामीन का झुकाव हमेशा से ही चीन की तरफ था। यामीन के आने के बाद यहां पर इब्राहीम नासीर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का काम जीएमआर से छीनकर चीनी कंपनी को दे दिया गया। इसके अलावा मालदीव जो हमेशा से ही भारत के साथ एक खास रिश्‍ता होने का दावा करता है, वह चीन के बेल्‍ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) का हिस्‍सा बन गया है।

    भारत को करनी होगी पहल

    भारत को करनी होगी पहल

    बीआरआई में शामिल होने के बाद से मालदीव में चीनी कंपनियों की ओर से होने वाले निवेश की बाढ़ सी आ गई है। सिर्फ इतना ही नहीं पिछले वर्ष मीडिया में कुछ रिपोर्ट्स भी आई थीं जिसमें कहा गया था कि यामीन की सरकर ने चीन के साथ एक डील साइन की है। इस डील को इतनी जल्‍दबाजी में साइन किया गया कि इसके पेपर्स भी सांसदों को पढ़ने के लिए नहीं दिए गए और विपक्ष को भी अंधेरे में रखा गया। मालदीव पर चीन का हजारों डॉलर बकाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत को अपनी पकड़ मजबूत करनी है तो फिर उसे सावधानी से कदम उठाने होंगे। हालांकि भारत ने भी मालदीव के हालातों को चिंताजनक करार दिया है।

    यह भी पढ़ें-मालदीव संकट: हमेशा ही खतरे में रहा है लोकतंत्र और तानाशाही रही हावी

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    As the situation unfold in Maldives, the country can be a battle ground for India and China.

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more