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जानिए, कितनी भारतीय हैं अमेरिकी उपराष्ट्रपति पद की डेमोक्रेटिक दावेदार कमला हैरिस?

बेंगलुरू। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2020 में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उपराष्ट्रपति की दावेदार बनाई गईं भारतीय-जमैकन मूल की अमेरिकी नागरिक कमला हैरिस अपनी पहले नाम कमला की वजह से भारत और अमेरिका में बसे भारतीयों के बीच सुर्खियों बंटोर रही हैं, लेकिन सवाल है क्या कमला हैरिस हिंदू संस्कृति और भारतीयता से लबरेज हैं। इसका जवाब वर्ष कमला हैरिस ने वर्ष 2018 में लिखी आत्मकथा, 'द ट्रुथ वी टोल्ड' में दे चुकी हैं।

कमला हैरिस भारत की अपनी यात्राओं के बारे में ज़्यादा नहीं बता पाई है

कमला हैरिस भारत की अपनी यात्राओं के बारे में ज़्यादा नहीं बता पाई है

जी हां, अपनी आत्मकथा में कमला हैरिस भारत की अपनी यात्राओं के बारे में ज़्यादा नहीं लिख पाई है, जिसका साफ कारण है कि कमला हैरिस भारतीय और भारतीयता से छिटकी हुई हैं। इसमें कोई बुराई भी नहीं हैं, लेकिन जिस तरीके से उनका इस्तेमाल डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के कैंपेन में भारतीय वोटरों को साधने के लिए किया जा रहा है, वह हास्यास्पद कहा जा सकता है।

क्या गारंटी है कि वो भारतीय हितों के साथ समझौता नहीं होने देंगी

क्या गारंटी है कि वो भारतीय हितों के साथ समझौता नहीं होने देंगी

आगामी 3 नंवबर को अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हैं और अगर भारतीयों वोटरों साधने में कमला हैरिस की पार्टी डेमोक्रेट सफल हो जाती हैं, तो क्या गारंटी है कि वो भारतीय हितों के साथ समझौता नहीं होने देंगी। कमला हैरिस एक अमेरिकी नागरिक हैं और कमला नाम उन्हें उनकी मां श्यामला हैरिस से मिला है, जो करोड़ों भारतीयों की तरह एक अच्छे जीवन की तलाश में हिंदुस्तान से अमेरिका में बस गईं थीं।

मां ने पूरा जीवन एक क्रिश्चियन और अमेरिकी नागरिक के रूप में बिताया

मां ने पूरा जीवन एक क्रिश्चियन और अमेरिकी नागरिक के रूप में बिताया

कमला हैरिस की मां श्यामला हैरिस ने जमैका मूल के डोनाल्ड हैरिस से शादी की और उन्होंने पूरा जीवन एक क्रिश्चियन और अमेरिकी नागरिक के रूप में बिताया है और अपनी बेटी कमला और माया हैरिस की परवरिश भी एक अमेरिकी की तरह ही की थी। डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए कमला हैरिस निःसंदेह तुरूप का पत्ता साबित हो सकती है, जो कोरोना, ब्लैक लाइव्स मैटर कैंपेन की वजह से ट्रंप को हराने में मददगार साबित हो सकती है।

अमेरिका में भारतीय और अफ्रीकी मूल के वोटरों की गांरटी है कमला हैरिस

अमेरिका में भारतीय और अफ्रीकी मूल के वोटरों की गांरटी है कमला हैरिस

कमला हैरिस डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए अमेरिका में मौजूद 13 लाख भारतीय वोटर्स और अफ्रीकी अमेरिकी मूल के वोटरों की गांरटी बनकर उभर सकती है और अमेरिकी उपराष्ट्रपति पद की दावेदारी के रूप में उनके चयन का मापदंड यही रहा है। वरना कमला हैरिस कुछ दिन पहले तक डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति के उम्मीदवार जो बाइडेन को चुनौती देते हुए दिखाई पड़ रहीं थी।

आत्मकथा में 55 वर्षीय कमला हैरिस की युवा और प्रौढ़ा अवस्था का जिक्र नहीं

आत्मकथा में 55 वर्षीय कमला हैरिस की युवा और प्रौढ़ा अवस्था का जिक्र नहीं

कमला हैरिस अपनी आत्मकथा में लिखती हैं कि वह अपने मामा और दो मौसियों के काफी नज़दीकी रहीं हैं और उनके साथ फ़ोन और पत्र के ज़रिए लगातार उनका संपर्क बरक़रार रहा, लेकिन बचपन की यात्राओं को छोड़कर अपनी आत्मकथा में 55 वर्षीय कमला हैरिस अपनी युवा और प्रौढ़ा अवस्था का एक भी संस्मरण का कमला हैरिस उल्लेख नहीं करती हैं, जो भारत और तमिलनाडु से जुड़ा हुआ हो। हालांकि वो लिखती हैं कि वो कभी-कभार उनसे मिलने के लिए भारत की यात्रा की थी।

चुनावी कैंपेन में भारतीय मूल को खूब प्रचारित कर रही हैं कमला हैरिस

चुनावी कैंपेन में भारतीय मूल को खूब प्रचारित कर रही हैं कमला हैरिस

अमेरिकी उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिस चुनावी कैंपेन में आजकल लगातार अपने भारतीय मूल का होने को लेकर खूब प्रचार कर रही है। उन्होंने बताया कि उनकी मां उन्हें और उनकी बहन माया को लेकर मद्रास (अब चेन्नई) गई थीं, ताकि दोनों बहनें जान सकें कि उनकी जड़ें कहां से जुड़ी हुई हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उनकी मां ने हमेशा अमेरिका को प्राथमिकता दी है, जहां का जीवन स्तर हमेशा उच्चस्तरीय रहा है। समझा जाना चाहिए कि कमला हैरिस अपनी पुरानी पहचान को चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल कर ही है, क्योंकि भारत और भारतीयता काफी पहले पीछे छूट चुकी है।

कमला हैरिस के उपराष्ट्रपति पद की दावेदारी से उड़ गई है ट्रंप की नींद

कमला हैरिस के उपराष्ट्रपति पद की दावेदारी से उड़ गई है ट्रंप की नींद

डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति के दावेदार जो बिडेन ने भारतीय मूल की अमेरिकी सीनेटर कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर दूसरी बार राष्ट्रपति बनने की उम्मीद लगाए डोनाल्ड ट्रंप के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, क्योकि पिछली बार अमेरिका में दक्षिण एशियाई खासकर भारतीय मूल के लोगों की संख्या भी अच्छी खासी है और पिछले चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी भारतीय का अच्छा सपोर्ट मिला था। इसका अंदाजा डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी कैंपेन 'अबकी बार-ट्रंप सरकार' से समझा जा सकता है।

कोरोना महामारी संकट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की छवि खराब की है

कोरोना महामारी संकट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की छवि खराब की है

अमेरिका में खराब हुई है और ट्रंप को टारगेट करने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी ने कोरोना वायरस महामारी संकट को प्रमुख मुद्दा भी बनाया है, जिसमें कोरोना काल में राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों और स्कूलों को खोलने के लिए बनाए गए दवाबों को मुद्दा बनाकर क्रिटिसाइज किया गया है। अभी हाल में जो बिडेन एक वीडियो भी जारी किया था, जिसमें कोरोना काल में ट्रंप के बयानों को प्रमुखता से दिखाया गया है।

पुलिस हिरासत में अश्वेत जार्ज फ्लायड की मौत से ट्रंप प्रशासन की छवि गिरी

पुलिस हिरासत में अश्वेत जार्ज फ्लायड की मौत से ट्रंप प्रशासन की छवि गिरी

ट्रंप के कार्यकाल में जार्ज फ्लायड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद नस्लीय भेद के आरोप में अमेरिका हुए हिंसात्मक प्रदर्शन बताता है कि अफ्रीकन मूल के अमेरिकी नागरिक डोनाल्ड ट्रंप से नाराज हैं, जिसका लाभ डेमोक्रेट को मिलना तया हैं, क्योंकि कमला हैरिस के पिता खुद जमैकन अमेरिकी नागरिक हैं। वहीं दूसरी तरफ कमला हैरिस भारतीय हैं, जिनके साथ भावनात्मक लगाव डेमोक्रेट को मालामाल कर सकता है।

7 समंदर पार शिखर पदों को हासिल करते रहे हैं भारतीय मूल के नागरिक

7 समंदर पार शिखर पदों को हासिल करते रहे हैं भारतीय मूल के नागरिक

वर्ष 1961 में छेदी जगन ने कैरिबियाई टापू देश गुयाना के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। उनके बाद भारत के बाहर लघु भारत कहे जाने वाले मारीशस में शिव सागर रामगुलाम और अनिरुद्ध जगन्नाथ और उनके पुत्रों से लेकर फीजी में महेन्द्र चौधरी, त्रिनिदाद और टोबेगो में बासुदेव पांडे, सूरीनाम में चंद्रिका प्रसाद संतोखी वगैरह राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री बनते रहे हैं, लेकिन राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति बनने के बाद उनका लगाव भले ही भारत के साथ रहा, लेकिन वो हमेशा वहीं के बने रहें, जहां के राष्ट्रपति बने रहें। कहने का अर्थ हैं कि कल को अगर कमला हैरिस चुनी जाती हैं, तो यह उम्मीद करना कि भारत के प्रति आशक्तता रखेंगी तो यह मुगालतें में रहने लायक बात होगी।

करीब दो दर्जन से अधिक देशों में सियासत कर रहे हैं भारतीय मूल नागरिक

करीब दो दर्जन से अधिक देशों में सियासत कर रहे हैं भारतीय मूल नागरिक

वर्तमान में देखा जाए तो अभी करीब दो दर्जन से अधिक देशों में भारतीय मूल के नागरिक सियासत कर रहे हैं, वहां की संसद तक पहुंच रहे हैं।ब्रिटेन के पिछले आम चुनाव में भारतीय मूल के रिकॉर्ड 10 सांसद चुने गए हैं, जिनमे इंफोसिस के सह संस्थापक नारायण मूर्ति के दामाद ऋषि सुनाक भी शामिल हैं। वर्ष 2010 में हुए चुनाव में भारतीय मूल के 8 उम्मीदवारों की जीत हुई थी।

अब मेरी मातृभूमि मारीशस ही है और मेरा हित यहीं हैः नवीन चंद्र राम गुलाम

अब मेरी मातृभूमि मारीशस ही है और मेरा हित यहीं हैः नवीन चंद्र राम गुलाम

एक संस्मरण में मॉरीशस का एक संस्मरण सुनाते हुए राज्यसभा सांसद पुष्पेश पंत एक लेख में लिखते हैं कि एक बार जब वो मारीशस में थे तो वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति रहे भारतीय मूल के रामगुलाम ने उन्हें भोजन के लिये राष्ट्रपति भवन आमंत्रित किया था। बातचीत के क्रम में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह सही है कि उनके पूर्वज भारत से मॉरीशस आए थे, लेकिन अब उनकी मातृभूमि मारीशस ही है और वहीं उनका हित है। हां, वो भारत को अपने पुरखों का "पुण्यभूमि" मानते हैं और रहेंगें।

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