चीन के वुहान से शुरू हुआ था Coronavirus, अब नर्क जैसी हो गई है यहां के लोगों की जिंदगी
वुहान। चीन में इस वक्त जानलेवा कोरोना वायरस का प्रकोप है। जिसने अब तक 490 लोगों की जान ले ली है और 20 हजार से अधिक लोग इसकी चपेट में आ गए हैं। ये वायरस चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ था। इस शहर को एहतियात बरतते हुए सरकार ने पूरी तरह बंद कर दिया है। एक तरह से ये शहर पूरी दुनिया से कट चुका है। यहां बसे विदेशियों को भी उनकी सरकारें निकाल चुकी हैं। साथ ही चीन के बाकी हिस्सों में रहने वाले लोगों से वुहान की यात्रा करने को मना किया गया है।
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किसी भूतहा स्थान जैसा हो गया है वुहान
कभी लोगों की चहल-पहल से गूंजता वुहान शहर अब किसी भूतहा स्थान जैसा हो गया है। जहां सड़क से लेकर मॉल तक सब खाली नजर आता है। लेकिन अगर यहां के लोगों की बात करें तो उनकी जिंदगी अब नर्क जैसी हो गई है। यहां लोग अपने घरों में कैद हैं, सरकार ने उन्हें बहुत जरूरी काम होने पर ही घर से निकलने को कहा है। इसी शहर में अपने परिवार के साथ रहती हैं 33 साल की वांग। वुहान 23 जनवरी से सील है। आसान भाषा में कहें तो शहर को एक तरह से बंद कर दिया गया है।

वांग का पूरा परिवार बीमार है
बीबीसी अंग्रेजी को दिए इंटरव्यू में वांग ने बताया है कि अब उन्हें किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वांग कहती हैं, 'कोरोना वायरस के फैलने के बाद मेरे अंकल की मौत हो गई है। मेरे पिता काफी बीमार हैं। मेरी मां और आंटी में इसके लक्षण दिखने लगे हैं। सीटी स्कैन से पता चला है कि उनके फेंफड़ों में इन्फेक्शन हो गया है। मेरा भाई भी खांस रहा है और उसे सांस लेने में परेशानी हो रही है। मेरे पिता को तेज बुखार है। उनके शरीर का तापमान कल 39.3सी (102एफ) दर्ज किया गया।'

'कोई अस्पताल उन्हें भर्ती नहीं कर रहा'
वह आगे कहती हैं, 'मेरे पिता लगातार खांस रहे हैं और उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही है। हमने उन्हें घर पर ऑक्सीजन मशीन लाकर दी है। वो 24 घंटे उस मशीन पर निर्भर हैं। वो चीनी और पश्चिमी दवाईयां मांगते हैं। यहां जाने के लिए कोई अस्पताल ही नहीं है क्योंकि टेस्टिंग किट की कमी होने के कारण उनमें कोरोना वायरस की पुष्टि नहीं हो पाई है। मेरी मां और आंटी की सेहत बहुत खराब है लेकिन वो हर दिन चलकर अस्पताल जाती हैं, ताकि मेरे पिता के लिए एक बेड का इंतजाम कर पाएं। लेकिन कोई अस्पताल उन्हें भर्ती नहीं कर रहा है।'

'कोई हमारी मदद नहीं कर रहा'
बता दें वुहान में बहुत से क्वारंटाइन पॉइंट (वो स्थान जहां लोगों को अलग रखा जाता है) हैं, जहां मरीजों को अलग रखकर उनका इलाज किया जा रहा है। लेकिन यहां अधिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। वांग कहती हैं कि यहां उनके पिता जैसे लोगों के लिए कोई बेड नहीं हैं, जो काफी बीमार हैं। वो कहती हैं, 'मेरे अंकल की मौत एक क्वारंटाइन पॉइंट पर ही हुई थी। क्योंकि जिन लोगों में बहुत सारे लक्षण पाए जाते हैं, उनके लिए वहां अधिक मेडिकल सुविधाएं नहीं हैं। मैं चाहती हूं कि मेरे पिता को अच्छा इलाज मिले लेकिन यहां कोई नहीं है, जिससे हम मदद मांग सकें। मैंने कई सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी बात की लेकिन वो एक ही जवाब देते हैं कि हमें अस्पताल में बेड मिलने का कोई चांस नहीं है।'

क्वारंटाइन पॉइंट अब होटल बन गए हैं
वांग ने कहा कि जिस क्वारंटाइन पॉइंट पर उनके पिता और अंकल गए थे, वो पहले तो अस्पताल था लेकिन बाद में होटल बन गया है। ना वहां नर्स हैं, ना डॉक्टर और ना ही हीटर। शाम को वांग के पिता और अंकल जब यहां गए थे तो उन्हें ठंडा खाना परोसा गया था। जिसके बाद उनके अंकल की तबीयत बिगड़ने लगी। कोई डॉक्टर इलाज करने नहीं आया। उनके पिता और अंकल अलग-अलग कमरों में थे, जब वांग के पिता उनके अंकल के पास पहुंचे तब तक उनकी मौत हो गई थी।

'हम घर पर मरना पसंद करेंगे'
वांग कहती हैं, 'नए अस्पताल उन लोगों के लिए बनाए गए हैं जो पहले से अस्पतालों में हैं। उन्हें अब नए अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। लेकिन हमारे जैसे लोग, जिन्हें अभी तक बेड भी नहीं मिला है, उन्हें नए अस्पतालों में जाने दो। अगर हम सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करें, तो केवल क्वारंटाइन ही एक जगह है जहां हम जा सकते हैं। लेकिन अगर हम वहां गए तो जो मेरे अंकल के साथ हुआ है, वही मेरे पिता के साथ हो सकता है। तो हम घर पर मरना चाहेंगे।'

'लोगों की संख्या अधिक है जबकि संसाधन कम'
वांग ने आगे कहा, 'यहां हमारे जैसे कई परिवार हैं। जो हमारे जैसी ही परेशानियों का सामना कर रहे हैं। मेरे दोस्त के पिता को तो क्वारंटाइन पॉइंट तक पर जगह नहीं मिली क्योंकि उन्हें तेज बुखार था। संक्रमण से ग्रसित लोगों की संख्या अधिक है जबकि संसाधन कम। हम डरे हुए हैं, हमें नहीं पता कि आगे क्या होगा।'

दुनिया को वांग ने क्या संदेश दिया
दुनिया को संदेश देते हुए वांग ने कहा, 'अगर मुझे पता होता कि वो 23 जनवरी को पूरा शहर बंद कर देंगे तो मैं अपने परिवार को यहां से बाहर ले जाती क्योंकि यहां कोई मदद करने वाला नहीं है। अगर हम कहीं और होते तो थोड़ी उम्मीद तो होती। मुझे नहीं पता कि हम जैसे लोग, जिन्होंने सरकार की बात सुनी और वुहान में रह रहे हैं, ने सही फैसला लिया है या नहीं। लेकिन मुझे लगता है कि मेरे अंकल की मौत इस सवाल का जवाब है।'












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