Explainer: UAE के पहले भव्य हिंदू मंदिर के बारे में जाने सबकुछ.. कितना खर्च हुआ, किसने किया, कैसे बना?
Hindu temple in UAE: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 14 फरवरी को, अयोध्या में राम मंदिर का अभिषेक करने के कुछ हफ्ते बाद अबू धाबी में एक प्रमुख हिंदू मंदिर का उद्घाटन करेंगे और पीएम मोदी इसके लिए यूएई पहुंच चुके हैं। बीएपीएस मंदिर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी के पड़ोसी शहर अबू मुरीखाह में बना पहला हिंदू मंदिर है।
संयुक्त अरब अमीरात में तीन अन्य हिंदू मंदिर हैं, जो दुबई में स्थित हैं। पत्थर की वास्तुकला के साथ एक बड़े क्षेत्र में फैला बीएपीएस मंदिर खाड़ी क्षेत्र में सबसे बड़ा और भव्य मंदिर होगा।

अबू धाबी में BAPS मंदिर के बारे में जानिए
साल 2015 में, प्रधानमंत्री मोदी की पहली यूएई यात्रा के दौरान मंदिर के निर्माण के लिए यूएई सरकार ने अबू धाबी में जमीन आवंटित करने का फैसला किया था। इंदिरा गांधी की यात्रा के 34 सालों तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने यूएई की यात्रा नहीं की थी, लिहाजा 2015 की प्रधानमंत्री की यात्रा को एतिहासिक करार दिया गया।
जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने फरवरी 2018 में मंदिर परियोजना का उद्घाटन किया और दिसंबर 2019 में इसका निर्माण शुरू हुआ। मंदिर का अभिषेक समारोह 14 फरवरी 2024 को निर्धारित किया गया है, जो पवित्र बसंत पंचमी के साथ मेल खाता है।
मंदिर का कंस्ट्रक्शन, आर्किटेक्चर और लागत
अबू धाबी के रेगिस्तानी रेत के बीच शानदार ढंग से बना बीएपीएस हिंदू मंदिर वर्तमान में निर्माण के अंतिम चरण से गुजर रहा है। पीटीआई के मुताबिक, दुबई-अबू धाबी शेख जायद राजमार्ग के किनारे अल रहबा के पास अबू मुरीखा में 27 एकड़ भूमि में फैला यह मंदिर 700 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है।
यूएई में बनने वाला ये विशाल हिंदू मंदिर 108 फीट ऊंचा, 262 फीट लंबा और 108 फीट चौड़ा है। इसके अलावा, मंदिर में एक बड़ा अखाड़ा, प्रार्थना कक्ष, एक गैलरी, एक पुस्तकालय, उद्यान, पानी की सुविधाएं, एक फूड कोर्ट, उपहार की दुकान, बच्चों के खेलने का क्षेत्र, एक मजलिस और दो सामुदायिक हॉल, जो 5,000 लोगों को समायोजित कर सकते हैं, वो क्षेत्र में बनाए गये हैं।
मंदिर को उत्तरी राजस्थान से लाए गए जटिल नक्काशी वाले संगमरमर और गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग करके बनाया जा रहा है।
समाचार एजेंसी पीटीआई ने राजस्थान के कारीगर सोम सिंह के हवाले से कहा है, कि "50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने वाले चिलचिलाती तापमान में भी इन संगमरमर पत्थरों पर कोई असर नहीं होगा और ये संयुक्त अरब अमीरात की जलवायु के लिए व्यावहारिक विचारों को दर्शाती है।"
वहीं, कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए पर्यावरण संबंधी रणनीति के हिस्से के रूप में फ्लाई ऐश को नींव के कंक्रीट मिश्रण में शामिल किया गया है। यहां यह उल्लेख करना जरूरी है, कि यह परियोजना अलग है क्योंकि फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार, यह व्यापक डिजिटल मॉडलिंग और भूकंपीय सिमुलेशन से गुजरने वाला पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर है।
रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर की नींव में 100 सेंसर लगाए गये हैं, जबकि 350 से ज्यादा सेंसर रणनीतिक रूप से पूरी संरचना में लगाए गए हैं, जो लगातार भूकंप गतिविधि, तापमान में उतार-चढ़ाव और दबाव परिवर्तन पर डेटा एकत्र करते हैं।
बलुआ पत्थर के 25,000 से ज्यादा पत्थर के टुकड़ों का उपयोग करके संगमरमर की नक्काशी तैयार की गई है। मंदिर में गुंबद, सात शिखर बनाए गये हैं., जो संयुक्त अरब अमीरात के सात अमीरात, 12 समरान (गुंबद जैसी संरचनाएं) और 402 स्तंभों का प्रतीक हैं।
मंदिर का डिजाइन वैदिक वास्तुकला और मूर्तियों से प्रेरणा लेकर बनाया गया है। पीटीआई के अनुसार, मंदिर के हर शिखर पर रामायण, शिव पुराण, भागवत और महाभारत की कहानियों के साथ-साथ भगवान जगन्नाथ, भगवान स्वामीनारायण, भगवान वेंकटेश्वर और भगवान अयप्पा की कहानियों को दर्शाती जटिल नक्काशी की गई है।
इस मंदिर को बनाने के लिए 40 हजार घन मीटर संगमरमर से बनाया गया है, जिसमें इतालवी संगमरमर का भी इस्तेमाल किया गया है। वहीं, 180,000 घन मीटर बलुआ पत्थर और 18 लाख से ज्यादा ईंटों का इस्तेमाल किया गया है।

BAPS संस्था क्या है?
BAPS का पूरा नाम बोचासनवासी श्री अक्षर पुरूषोत्तम स्वामीनारायण संस्थान है और 1700 के दशक के उत्तरार्ध के धार्मिक गुरु भगवान स्वामीनारायण इस संगठन के नाम के पीछे की प्रेरणा हैं।
BAPS वेबसाइट के अनुसार, यह वेदों से उत्पन्न एक सामाजिक-आध्यात्मिक हिंदू धर्म है, जिसकी स्थापना 1907 में शास्त्रीजी महाराज (1865-1951) द्वारा की गई थी और 18वीं शताब्दी के अंत में भगवान स्वामीनारायण (1781-1830) ने इसकी कल्पना की थी।
BAPS का दावा है, कि वह वैश्विक स्तर पर 1,100 मंदिरों और 3,850 मंदिरों का प्रबंधन करता है। BAPS गुजरात और दिल्ली में अक्षरधाम मंदिरों का भी प्रभारी है।
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