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जानिए व्‍लादिमिर लेनिन समेत चार जिंदा लाशों की कहानी

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    नई दिल्‍ली। त्रिपुरा में बीजेपी समर्थकों के रूस के पूर्व कम्‍युनिस्‍ट लीडर व्‍लादिमिर लेनिन की मूर्ति गिराने के बाद देश के अलग-अलग हिस्‍सों में कई बड़े नेताओं की मूर्ति गिराने का सिलसिला शुरू हो गया है। लेनिन, रूस के एक ऐसे नेता थे जिन्‍हें लेकर आज तक रूस में काफी विवाद होते रहते हैं। वहीं आप यह सच जानकर भी हैरान रह जाएंगे कि भले ही उनकी मूर्ति को त्रिपुरा में गिरा दिया गया हो लेकिन उनकी लाश को आज तक रूस में संभालकर रखा गया है। सिर्फ लेनिन ही नहीं बल्कि दुनिया के कुछ और नेताओं के शव को संभालकर रखा जा चुका है।
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    सेंट फ्रांसिस जैवियर

    सेंट फ्रांसिस जैवियर

    गोवा में हर वर्ष 16वीं सदी के क्रिश्चियन संत सेंट फ्रांसिस जैवियर को देखने हजारों अनुयायी आते हैं। सेंट फ्रांसिस जैवियर का शव हर 10 वर्ष के बाद आम जनता के दर्शन के लिए रखा जाता है। सेंट फ्रांसिस का जन्‍म स्‍पेन में सन् 1506 में हुआ था और 1541 में उन्‍होंने गोवा में जीसस सोसायटी की स्‍थापना की थी। दक्षिण भारत के कई अनुयायियों को दीक्षा देकर वह 1545 में गोवा से चले गए। इसके बाद वह 1551 में गोवा आए और दूसरी बार जब वह गोवा आए तो उनकी तबियत बिगड़ गई। वर्ष 46 वर्ष की उम्र में वह बीमार हुए और चीन के सैनशियान द्वीप पर तीन दिसंबर 1552 को उनका निधन हो गया। पहली बार सन् 1782 में उनका शव गोवा लाया गया था।

    व्‍लादीमिर लेनिन

    व्‍लादीमिर लेनिन

    रूस की राजधानी मॉस्‍को के एक म्‍यूजियम में लेनिन की लाश को रखा गया है। साल 1917 में लेनि‍न रूस की क्रांति के समय यहीं पर भाषण दिया था और उन्‍हें सुनने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी थी। साल 2016 में पहली बार लेनिन के शव को रेड स्‍क्‍वॉयर पर रखा गया था और उन्‍हें देखने के लिए रोज लोगों की भीड़ उमड़ती है। रूस में आज भी इस बात पर बहस होती है कि लेनिन का पूरे रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्‍कार क्‍यों नहीं कर दिया जाता। रूस में एक ऑनलाइन पोल हुआ भी इसे लेकर कराया जा चुका है और इस पोल में 62 प्रतिशत लोगों ने लेनिन की डेडबॉडी को दफनाने के लिए अपनी रजामंदी जाहिर की थी। लेकिन रूस की सरकार हर बार इस बात से इंकार कर देती है। लेनिन के शव को संरक्षित करके रखने में अब तक 100 करोड़ डॉलर खर्च हो चुके हैं।

    ची मिन

    ची मिन

    चीन मिन विएतनाम के कम्‍युनिस्‍ट क्रांतिकारी नेता थ और यहां की वर्कर्स पार्टी के पहले सेक्रेटरी थे। वह साल 1945 में विएतनाम के प्रधानमंत्री बने तो साल 1955 में उन्‍हें इस देश का राष्‍ट्रपति बनाया गया। मिन को युद्ध के दौरान विएतनाम की सेना पीपुल्‍स आर्मी ऑफ विएतनाम के गठन के लिए जाना जाता है। विएतनाम युद्ध के नतीजों को लेकर आज तक चर्चा होती है। यही युद्ध मिन के निधन की भी अहम वजह बना। दो सितंबर 1969 को हनोई में अपने घर पर हार्ट अटैक की वजह से उनका निधन हो गया। आज भी उनके शव को हनोई के बा दिन स्‍क्‍वायर पर संरक्षित करके रखा गया है। हालांकि वह खुद चाहते थे कि उनका अंतिम संस्‍कार हो जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उनके शव को आज तक संरक्षित करके रखा गया है।

     माओत्से तुंग

    माओत्से तुंग

    माओत्से तुंग का निधन नौ सितंबर 1976 के हुआ था। माओ को चीन का राष्‍ट्रपिता कहा जाता है और वह यहां के एक कम्‍युनिस्‍ट नेता था। माओ की न‍ीतियों और उनके सिद्धांतों को ही आज माओवाद के रूप में दुनिया जानती है। माओ के निधन के तुरंत बाद ही उनकी याद में एक मेमोरियल हॉल के निर्माण का काम शुरू हो गया था। बीजिंग में तियानमेन स्‍क्‍वॉयर पर माओ के शव को रखा गया है और इस जगह की अपना एक अलग एतिहासिक महत्‍व है। इस जगह को गेट ऑफ चाइना भी कहते हैं। माओ चाहते थे कि उनका अंतिम संस्‍कार कर दिया जाए लेकिन अभी तक उनके शव को संरक्षित करके रखा गया है। हालांकि कुछ लोग ऐसा दावा करते हैं कि जनता के लिए जब शव रखा जाता है तो माओ के शरीर की जगह मोम का पुतला होता है। इस बात को लेकर अभी तक विवाद होता रहता है।

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    English summary
    Just like Vladimir Lenin these people's dead body are still being preserved.

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