चीन को फिर से घर में घुसकर मारने की तैयारी, सेना को सुपरपावर बनाएगा जापान, ड्रैगन को याद आएगा 1937!

Jpanan Military: जापान ने पहली बार चीन के ऊपर 1895 में आक्रमण किया था और उसके बड़े हिस्से में तबाही मचा दी थी और जापान ने साल 1937 में दूसरी बार चीन पर हमला किया था और उस वक्त जापान ने चीन को घर में घुसकर इतनी बेरहमी से पीटा था, उसे आज तक चीन भूला नहीं है। लेकिन, दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जापान ने अपने हथियार रख दिए और शांति के रास्ते पर चल निकला।

लेकिन, एक बार फिर से चीन ने जापान को परेशान करना शुरू कर दिया और जापान को फिर से हथियार उठाने के लिए मजबूर कर दिया है। लगातार परेशान किए जाने के बाद जापान ने फिर से अपने हथियार उठा लिए हैं और जापान, जंग की तैयारी में जुट गया है।

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सेना के लिए जापान ने खोला खजाना

जापान सरकार के अधिकारियों ने अपनी सेना को एडवांस बनाने के लिए देश के चार स्टार्टअप के अधिकारियों के साथ 6 सितंबर को राजधानी टोक्यो में मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान मिलिट्री सेक्टर में टेक्नोलॉजी को शामिल करने, ड्रोन और रोबोट पर काम करने वाली नई कंपनियों की मदद करने के तरीकों पर चर्चा की गई है।

अपनी डिफेंस इंडस्ट्री को फिर से जंग के लिए तैयार करने के लिए जापानी सरकार ने रक्षा-संबंधित टेक्नोलॉजी वाले 200 स्टार्टअप की एक लिस्ट तैयार की है।

जापान का डिफेंस सेक्टर में फिर से कदम रखना इसलिए खतरनाक है, क्योंकि दूसरे विश्वयुद्ध से पहले जापान, हथियारों के उत्पादन में माहिर रहा है। वहीं, मॉडर्न जापान, जो दुनिया के बेहतरीन इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑप्टिकल फाइबर, ऑटोमोबाइल, कॉपी मशीन, विजुअल मीडिया का उत्पादन करते हैं, वो अब सरकार की मदद से रक्षा क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए तैयार हैं।

लेकिन, करीब से देखने पर पता चलता है, कि यह जापानी रक्षा उद्योग के लिए एक उज्ज्वल भविष्य का संकेत देता है, जो इस समय अन्य विकसित देशों में अपने समकक्षों से काफी पीछे है।

जापान की प्लानिंग क्या है?

दुनिया के कई हथियार बनाने वाले नये देश, जिसमें भारत भी शामिल है, वो किसी और देश की मदद से अपने देश में हथियारों के को-प्रोडक्शन की तरफ आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन जापान की प्लानिंग अलग है। जापान बिना किसी देश की मदद से खुद ही अपने दम पर हथियारों का निर्माण करने के लिए मैदान में उतर रहा है।

शायद यही एक कारण है, कि पश्चिमी हथियार आपूर्तिकर्ताओं ने अपने एशियाई मुख्यालयों को मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों से जापान में ट्रांसफर करना शुरू कर दिया है।

जापानी रक्षा बाजार बहुत बड़ा होने जा रहा है। प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार ने चीन से लगातार बढ़ते खतरों के कारण 2027 तक दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सैन्य बजट बनाने का संकल्प लिया है। जापान उत्तर कोरियाई मिसाइलें और परमाणु हथियार को भी ध्यान में रख रहा है।

जापान के रक्षा मंत्रालय ने पिछले हफ्ते पेश किए गये बजट में लगभग 12% वृद्धि का अनुरोध किया है। जापान सरकार ने पिछले साल दिसंबर में देश के लिए नई सुरक्षा नीति अपनाई थी और सरकार ने 52.5 अरब डॉलर का बजट जारी किया था। और अगले पांच सालों में जापान अपनी डिफेंस इंडस्ट्री में 315 अरब डॉलर का निवेश करने वाला है।

अगले पांच वर्षों में, जापान ने 315 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च करने की योजना बनाई है। इसका मतलब है, कि संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा खर्च करने वाला देश बनने के लिए, जापान अपने वार्षिक खर्च को दोगुना कर लगभग 68 अरब अमेरिकी डॉलर कर रहा है।

दक्षिण कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, यूके, सऊदी अरब, भारत, रूस, चीन और अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए जापान दुनिया का दसवां सबसे बड़ा रक्षा खर्च वाला देश है। जापान का रक्षा खर्च अब उसके सकल घरेलू उत्पाद के 1% से थोड़ा ज्यादा है। इसे दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जापान की जीडीपी का 2% तक बढ़ाना है।

जापान सरकार ने 16 दिसंबर 2022 को अपनी नेशनल सिक्योरिटी पॉलिसी में तीन प्वाइंट्स के आधार पर तैयार किया था। ये प्वाइंट थे (1) राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति, (2) राष्ट्रीय रक्षा रणनीति और रक्षा बिल्डअप कार्यक्रम (डीबीपी)।

ये तीन सुरक्षा दस्तावेज़ एक ऐसा खाका प्रदान करते हैं, जो जापान के अपने बचाव के दृष्टिकोण और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित सहयोगियों के साथ उसके सुरक्षा संबंधों को मौलिक रूप से नया आकार दे सकता है।

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चीन के खिलाफ 'जंग का ऐलान'

जापान अपनी डिफेंस इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने के लिए अपने QUAD साझेदार ऑस्ट्रेलिया से भी समान सहयोग और सह-उत्पादन पर चर्चा कर रहे हैं। यहां तक कि भारत और जापान, QUAD साझेदार के रूप में, अगली पीढ़ी के युद्ध उपकरणों और प्रणालियों में "गहरे और पारस्परिक रूप से लाभप्रद रक्षा सहयोग के लिए को-इनोवेशन, को-डिज़ाइन और को-प्रोडक्शन" के विचार पर विचार कर रहे हैं।

पिछले साल, भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके जापानी समकक्ष यासुकाज़ा हमादा ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग और साझेदारी के महत्व और एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित भारत-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और जापान ने डिफेंस सेक्टर के लिए पांच पहलें की हैं: रक्षा उपकरण और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से संबंधित एक समझौता, रक्षा उपकरण और टेक्नोलॉजी कॉपरेशन पर एक संयुक्त कार्य समूह (JWG-DETC), बिना गाइड वाले वाहनों (यूजीवी)/रोबोटिक्स के लिए संवर्धन प्रौद्योगिकी पर सहकारी अनुसंधान, सुरक्षा के लिए नीति और रणनीतिक योजना की समीक्षा के लिए जापान भारत साइबर संवाद, और निगरानी और स्थितिजन्य जागरूकता के लिए अंतरिक्ष सहयोग के संबंध में एक समझौता ज्ञापन।

बेशक, कई विशेषज्ञों का मानना है, कि जापानी डिफेंस इंडस्ट्री को अपने इलेक्ट्रॉनिक या ऑटोमोटिव इंडस्ट्री की तरह वर्ल्ड लीडर और वैश्विक ब्रांड बनने में काफी समय लगेगा। लेकिन, विशेषज्ञों का कहना है, कि आने वाले सालों में जापान की डिफेंस इंडस्ट्री को वर्ल्ड क्लास बनने से कोई नहीं रोक सकता है और चीन को तगड़ी चुनौती मिलने वाली है।

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