जापान को भगवान बचा लें! 7.1 तीव्रता वाले भूकंप के बाद अब 'महाभूकंप' की चेतावनी जारी, चपेट में 11 करोड़ लोग
Japan megaquake advisory: जापान, जो अकसर भूकंप के झटकों से दो-चार होता रहता है, उसने पिछले गुरुवार को 7.1 की तीव्रता से भूकंप आने के बाद पहली बार "महाभूकंप एडवाइजरी" जारी की है। जिसके बाद पूरे जापान में डर फैल गया है और हर किसी की आंखों से नींद उड़ चुकी है।
देश की मौसम विज्ञान एजेंसी ने पहली बार "महाभूकंप सलाह" जारी की है, जिसका मतलब है, कि जापान में ऐसा भूकंप आ सकता है, जैसा अभी तक नहीं आया है और इस चेतावनी ने दुनियाभर में जापान को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

चेतावनी में कहा गया है, कि नानकाई ट्रफ पर तेज झटकों और बड़ी सुनामी की संभावना सामान्य से ज्यादा है, जो जापान के दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत तट के साथ एक सबडक्शन जोन (ऐसा क्षेत्र जहां टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं और भारी प्लेट दूसरे के नीचे खिसक जाती है) है। हालांकि, सलाह में ये भी कहा गया है, कि इसका मतलब यह नहीं है, कि किसी खास अवधि के दौरान निश्चित ही कोई बड़ा भूकंप आएगा, लेकिन महाभूकंप आने की संभावना काफी ज्यादा है।
नानकाई गर्त क्या है?
नानकाई गर्त एक पानी के नीचे का सबडक्शन क्षेत्र (लगभग 900 किमी लंबा) है, जहां यूरेशियन प्लेट फिलिपीन सी प्लेट से टकराती है, जिससे बाद वाली प्लेट पहले वाली प्लेट के नीचे चली जाती है और पृथ्वी के मेंटल में चली जाती है। इससे टेक्टोनिक तनाव जमा होता है, जो एक मेगाक्वेक का कारण बन सकता है।
वैज्ञानिकों की मानें तो इस दौरान भूकंप के जो झटके शुरू होते हैं, उसकी तीव्रता 8 से ज्यादा होती है और इस तीव्रता में भूकंप आने का मतलब महातबाही हो सकता है और जान माल का ऐसा नुकसान हो सकता है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
तुर्की और सीरिया के बॉर्डर पर पिछले साल 7 की तीव्रता से आए भूकंप से 50 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी, ऐसे में 8 की तीव्रता वाले भूकंप के असर का अंदाजा लगाया जा सकता है।
नेचर जर्नल में प्रकाशित 2023 की स्टडी रिपोर्ट,'नानकाई मेगाथ्रस्ट भूकंपों की लगातार घटना की उच्च संभावना' के मुताबिक, गर्त ने लगभग हर 100 से 150 वर्षों में बड़े भूकंप उत्पन्न किए हैं। ये झटके आमतौर पर जोड़े में आते हैं, और एक भूकंप के बाद दूसरा भूकंप आने में करीब 2 सालों का वक्त लगता है।
सबसे हालिया "जुड़वां" भूकंप 1944 और 1946 में आए थे, जिसने भीषण तबाही मचाई थी।
यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, गुरुवार को 7.1 तीव्रता का भूकंप नानकाई गर्त पर या उसके आस-पास आया था। नतीजतन, विशेषज्ञों को चिंता है, कि गर्त में आया अगला झटका विनाशकारी हो सकता है।

नानकाई गर्त में अगला महाभूकंप कब आ सकता है?
जनवरी 2022 में, जापान की भूकंप अनुसंधान समिति ने कहा था, कि गर्त में अगला 8-9 तीव्रता का महाभूकंप अगले 30 वर्षों के भीतर आने की लगभग 70% संभावना है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है, कि इस तरह के बड़े भूकंप से टोक्यो से लगभग 150 किलोमीटर दक्षिण में स्थित केंद्रीय शिज़ुओका से लेकर दक्षिण-पश्चिमी मियाज़ाकी तक के इलाकों में तेज कंपन हो सकता है। भूकंप के कुछ ही मिनटों बाद 98 फीट तक की सुनामी की लहरें जापान के प्रशांत तटों तक पहुंच सकती हैं।
निक्केई एशिया पत्रिका की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि 2013 की एक सरकारी रिपोर्ट में पाया गया, कि नानकाई गर्त में आने वाला एक बड़ा भूकंप जापान के लगभग एक तिहाई हिस्से को प्रभावित कर सकता है,. जहां देश की लगभग आधी आबादी यानि 12 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं।
इस आपदा के कारण होने वाली आर्थिक क्षति 1.50 ट्रिलियन डॉलर या जापान के वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के एक तिहाई से भी ज्यादा हो सकती है।
लेकिन क्या भूकंप की भविष्यवाणी की जा सकती है?
नहीं। भूकंप की सटीक भविष्यवाणी के लिए धरती के भीतर से आने वाले संकेत को पकड़ने की आवश्यकता होती है, जो यह संकेत देता है, कि एक बड़ा भूकंप आने वाला है। संकेत केवल बड़े भूकंपों से पहले ही आना चाहिए, ताकि यह धरती की सतह के भीतर हर छोटी हलचल का संकेत न दे, लेकिन धरती के भीतर से इतने ज्यादा संकेत निकलते हैं, कि बड़े भूकंप के संकेत को पकड़ना संभव नहीं है। वर्तमान में, ऐसे पूर्व संकेतों को खोजने के लिए कोई उपकरण नहीं है।
टोक्यो विश्वविद्यालय में भूकंप विज्ञान के एमेरिटस प्रोफेसर रॉबर्ट गेलर ने बीबीसी को बताया है, कि जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी द्वारा गुरुवार को जारी किया गया एडवाइजरी, सिर्फ़ चेतावनी है, भविष्यवाणी नहीं और इसका विज्ञान से कोई लेना-देना नहीं है। एडवाइजरी में निवासियों से तैयार रहने, बचने के लिए रास्तों की जांच करने, संभावित भविष्य की चेतावनियों पर विचार करने के लिए कहा गया था।












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