जलील अब्बास जिलानी बन सकते हैं पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री, भुट्टो या शरीफ किस फैमिली के हैं करीब?
पाकिस्तान के पूर्व नौकरशाह जलील अब्बास जिलानी अगले आम चुनाव तक अगले कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में काम करने के लिए तैयार हैं। जिलानी का नाम तब सामने आया है जब सरकार आज यानी बुधवार को 16 महीने का कार्यकाल समाप्त करते हुए पाकिस्तान की नेशनल असेंबली को भंग करने के करीब है।
देश में राजनेता से लेकर अर्थशास्त्री तक कार्यवाहक पीएम पद पाने की इच्छा जता चुके हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कार्यवाहक पीएम पद के लिए पूर्व वित्त मंत्री हफीज शेख, इशाक डार, मुहम्मद मियां सूमरो, डॉ. इशरतुल एबाद और जलील अब्बास जिलानी के नामों पर चर्चा हो रही है। इनमें से जलील जिलानी सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे हैं।

जलील जिलानी के नाम की अभी तक पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन कई पाकिस्तानी मीडिया वेबसाइट्स की मानें तो जलील अब्बास जिलानी इसके सबसे बड़े दावेदार हैं। जलील जिलानी की दावेदारी इसलिए भी मजबूत मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर बुधवार को प्रधानमंत्री आवास का दौरा किया था।
68 वर्षीय जिलानी मुल्तान के रहने वाले हैं और एक प्रभावशाली परिवार से आते हैं जो शीर्ष राजनेताओं और हाई-प्रोफाइल पदाधिकारियों के लिए जाना जाता है। 3 फरवरी, 1955 को जन्मे जलील जिलानी पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के चचेरे भाई हैं।
जिलानी परिवार की वफादारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के साथ है। बिलावल भुट्टो इसी पार्टी के अध्यक्ष हैं। जिलानी फ्रेंच, अरबी, सेराकी, पंजाबी और पुश्तो सहित कई भाषाओं में पारंगत हैं।
जलील जिलानी ने ऑक्सफोर्ड से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और बाद में रक्षा और सामरिक अध्ययन में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद वह मार्च 1979 में पाकिस्तान की विदेश सेवा में शामिल हो गए।
जलील जिलानी दक्षिण एशियाई मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने सार्क में भी काम किया है। वे भारत में कार्यवाहक उच्चायुक्त और विदेश मंत्रालय में निदेशक (भारत) रह चुके हैं। इसके अलावा वे अमेरिका, बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग, यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया में पाकिस्तान के दूत के रूप में कार्य कर चुके हैं।
आज बुधवार को संसद में बतौर पीएम अपने आखिरी संबोधन में शहबाज शरीफ ने कहा कि वह अंतरिम पीएम के उम्मीदवारों पर चर्चा करने के लिए कल विपक्ष के नेता राजा रियाज़ से मिलेंगे। उन्होंने कहा, "कल हमारी पहली बैठक होगी और संविधान के अनुसार, हमारे पास निर्णय पर पहुंचने के लिए तीन दिन होंगे।"












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