हर साल डूब रही इस देश की राजधानी, 2050 तक खत्म हो जाएगा शहर!
नई दिल्ली। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता लगातार डूब रही है। धीरे-धीरे शहर की जमीन पानी में धंस रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने कहा है कि जकार्ता धरती के सबसे तेजी से डूबने वाले शहरों में है और अगर यही रफ्तार जारी रही तो इसका एक तिहाई हिस्सा 2050 तक डूब जाएगा, कुछ एक्सपर्ट आने वाले 30 साल में शहर का 95 फीसदी हिस्से के डूब जाने की बात कह रहे हैं। इंडोनेशिया की सरकार इसको देखते हुए अपनी राजधानी भी बदल रही है, राष्ट्रपति ने इसको लेकर ट्वीट किया है। जकार्ता में करीब एक करोड़ लोग रहे हैं।

शहर के कई हिस्से हो चुके गायब
दशकों से भूजल भंडार के अनियंत्रित दोहन, समुद्र का बढ़ता जलस्तर और तेजी से बदलते मौसम इनके कारणों में शामिल है। शहर के कई हिस्से गायब हो गए हैं। इसको रोकने के लिए किए गए पर्यावरणीय उपायों काम नहीं कर रहे हैं। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो ने ट्विटर पर कहा, हमारे देश की राजधानी बोर्नियो द्वीप पर स्थानांतरित हो जाएगी।

धंस रही है जमीन
जकार्ता में हर साल 25 सेंटीमीटर की दर से जमीन खिसक रही है। बीते दस सालों में ये शहर ढाई मीटर जमीन में समा गया है। जकार्ता शहर के नीचे से 13 नदियां निकलती हैं और दूसरी ओर से जावा सागर दिन-रात बिना रुके हुए शहर की ओर पानी फेंकता रहता है। बाढ़ की वजह से शहर का काफी हिस्सा अक्सर पानी में डूबा रहता है। इसके साथ-साथ पानी में शहर के कई हिस्से समाते जा रहे हैं।

राजधानी बदलेगा इंडोनेशिया
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने हाल ही में बताया था कि जकार्ता के दुनिया के सबसे तेजी से डूबते शहर होने की वजह पीने और नहाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ग्राउंडवाटर की निकासी है। जहां तक राजधानी को दूसरी जगह बसाने की बात है, इसमें करीब दस साल का समय लगेगा और 2.31 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे।












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