‘चीन पर चुप्पी साधकर हमें यूक्रेन पर ज्ञान ना दें’ भारतीय विदेश मंत्री ने अमेरिका- यूरोप को बुरी तरह धोया
स्लोवाकिया दौरे पर पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से एक बार फिर पश्चिमी मीडिया ने रूस सस्ते दाम पर तेल खरीदने को लेकर सवाल पूछा, जिसके बाद भारतीय विदेश मंत्री ने यूरोपीय देशों के साथ साथ अमेरिका की भी पोल खोल दी..
ब्रातिस्लावा, जून 03: यूक्रेन संकट में तटस्थ रहने वाले भारत को लेकर लगातार अमेरिका और यूरोप ने निशाना बनाने की कोशिश की है और पश्चिमी मीडिया ने भारत को लेकर ऐसा दुष्प्रचार किया है, मानो भारत के दिए हुए डॉलर्स से ही रूस युद्ध लड़ रहा है और अगर भारत रूस की आलोचना कर दे, तो फौरन ये युद्ध थम जाएगा। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस वक्त यूरोपीय देश स्लोवाकिया पहुंचे हैं, जहां उन्होंने अमेरिका और यूरोप को बुरी तरह से धो दिया है।

जयशंकर का तीखा जवाब
स्लोवाकिया दौरे पर पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से एक बार फिर पश्चिमी मीडिया ने रूस सस्ते दाम पर तेल खरीदने को लेकर सवाल पूछा, जिसके बाद भारतीय विदेश मंत्री ने यूरोपीय देशों के साथ साथ अमेरिका की भी पोल खोलना शुरू कर दिया। भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने यूरोपीय मीडिया से पूछा, कि क्या सिर्फ भारत के पैसों से यूक्रेन युद्ध लड़ा जा रहा है और क्या रूस से तेल खरीदना, युद्ध के लिए पैसे देना है? भारतीय विदेश मंत्री ने आगे विदेशी मीडिया से पूछा, कि क्या यूरोपीय देश जो अरबों डॉलर के तेल रूस से खरीद रहे हैं, क्या वो युद्ध को बढ़ावा नहीं दे रहा है?

चीन को लेकर जयशंकर ने पूछे सवाल
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि, भारत की विदेश नीति किसी से बंधी नहीं है और हो सकता है, भारतीय विदेश नीति कुछ देशों के अनुकूल ना हो। GLOBESEC में हिस्सा लेते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि, 'हम सिर्फ तटस्थ इसलिए नहीं बैठे हैं, क्योंकि मैं आपसे सहमत नहीं है। हमारी नीति का एक अलग आधार है'। भारतीय विदेश मंत्री ने आगे कहा कि, भारत के साथ चीन के काफी तनावपूर्ण संबंध रहे हैं, लेकिन यूरोप ने इसपर चुप्पी साध रखी है। वहीं, भारत द्वारा गेहूं निर्यात पर लगाए गये प्रतिबंध को लेकर भी पश्चिमी मीडिया में हो रहे दुष्प्रचार को लेकर भारतीय विदेश मंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और उन्होंने कहा कि, भारत ने अब तक इस साल 23 देशों को गेहूं निर्यात किया है।
जयशंकर के तीखे सवाल
भारतीय विदेश मंत्री ने पश्चिमी मीडिया को धोते हुए आगे सवाल किया, कि आखिर अमेरिका और पश्चिमी देश ईरानी तेल को बाजार में आने से क्यों रोक कर रखे हुए हैं? आखिर वेनेजुएला को अमेरिका और यूरोप बाजार में तेल क्यों नहीं बेचने दे रहे है? भारतीय विदेश मंत्री ने आगे कहा कि, भारत के लिए तेल के लिए जो भी स्रोत थे, सभी स्रोतों को बंद कर दिया गया है और अब हमें कहा जा रहा है, कि ठीक है दोस्तों, बाजार नहीं जाते हैं। भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि, हमारे पास बाजार में सबसे अच्छी डील है और हमारा मानना है कि, हमारे लिए ये डील काफी अच्छा है'।

चीन पर यूरोप की चुप्पी क्यों?
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सवाल उठाते हुए कहा कि, एशिया में भी कई समस्याएं हैं, लेकिन यूरोपीय देशों ने उन समस्याओं पर चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कहा कि, भारत और चीन के बीच के संबंध पिछले कुछ सालों से काफी तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन यूरोपीय देशों ने लगातार चुप्पी साध रखी है। वहीं, यूरोपीय देशों पर सबसे कड़ा प्रहार करते हुए जयशंकर ने कहा कि, 'यूरोपीय देशों का विकास कुछ इस तरह से हुआ है, कि यूरोप की एक समस्या पूरी दुनिया की समस्या है, लेकिन दुनिया की समस्या से यूरोप को कोई मतलब नहीं है।' भारतीय विदेश मंत्री ने इसके साथ ही यूरोपीय देशों से जागने का आग्रह किया और कहा कि, दुनिया बदल रही है और अब दुनिया सिर्फ यूरोप केन्द्रित नहीं है और भारत अपनी चीन की समस्या को अकेले ही संभालने में पूरी तरह से सक्षम है।

‘चीन से यूक्रेन को जोड़ना चालाकी’
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि, आज यूक्रेन में जो कुछ भी हो रहा है, उसे भारत और चीन से जोड़ना एक चतुराईपूर्ण रवैया है। भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि, 'भारत और चीन की समस्या यूक्रेन की समस्या से काफी पहले की समस्या है। और मुझे नहीं लगता है, कि ये बहस कोई तार्किक बहस है।' जयशंकर ने कहा कि, 'सभी बड़ी समस्याओं का समाधान इस तरह से या उस तरह से.. भारत से ही निकलते हैं।'

भारत ने ‘क्रूरता’ की निंदा की
भारत पर रूस-यूक्रेन युद्ध की 'अनदेखी' करने के बारे में एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए, जयशंकर ने कहा कि, भारत ने बुचा हत्याकांड की निंदा की और जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि, "यूक्रेन संघर्ष के साथ जो हो रहा है, उसके संदर्भ में हमारा रुख बहुत स्पष्ट है, कि हम शत्रुता को तत्काल समाप्त करने के पक्ष में हैं। ऐसा नहीं है कि जब तक आप पुतिन और ज़ेलेंस्की को फोन नहीं करते हैं, तब तक हमने इसे अनदेखा कर दिया है।" भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि, भारत किसी भी कैंप के साथ रहना कभी स्वीकार नहीं करता है और भारत किसी भी शिविर का पक्ष नहीं लेता है। उन्होंने कहा कि, आज भारत की आबादी दुनिया का पांचवां हिस्सा है और आज भारत दुनिया की पांचवी या छठी बड़ी अर्थव्यवस्था है और अगर इतिहास और सभ्यताओं को भूल भी जाएं, फिर भी हर कोई जानता है, मैं अपना पक्ष रखने का हकदार हूं। मैं हकदार हूं अपने हितों को तौलने के लिए, और अपनी पसंद बनाने के लिए। मेरी पसंद किसी की आलोचना वाली या फिर लेन-देन वाली नहीं होगी। वे मेरे मूल्यों और मेरे हितों का संतुलन होंगे। दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं है जो अपने हितों की अवहेलना करता हो।












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