मोसाद को खत्म करने के लिए बनाई गई टीम का हेड ही निकला मोसाद एजेंट, ईरान के पूर्व राष्ट्रपति से सुनिए कहानी
Mossad News: इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद को लेकर आपने कई कहानियां सुनी होंगी, लेकिन ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने एक हैरान करने वाला किस्सा सुनाया है। उन्होंने खुलासा किया है, कि मोसाद को खत्म करने के लिए जिस टीम का निर्माण किया गया, उसका हेड ही इजराइल का एजेंट निकला।
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति ने सोमवार को तुर्की में CNN नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में एक आश्चर्यजनक दावा किया है। महमूद अहमदीनेजाद ने कहा, कि तेहरान ने इजराइल के मोसाद के ऑपरेशन को नाकाम करने के लिए एक यूनिट की स्थापना की थी, और बाद में उन्हें यह पता चला, कि इस टीम का नेतृत्व करने वाला शख्स मोसाद का एजेंट था।

ईरान की टीम में मोसाद का एजेंट
लेबनान और गाजा में ईरानी प्रॉक्सी पर कई हफ्तों से इजराइल बेखौफ हमले कर रहा है और हिज्बुल्लाह, हमास और हुतियों को अभी तक काफी नुकसान पहुंचा है। इन आतंकी संगठनों के ज्यादातर टॉप के नेता मारे जा चुके हैं। खासकर हिज्बुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह की मौत के बाद खुलासा हुआ है, कि इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने नसरल्लाह की सटीक ठिकाने की जानकारी ईरान से निकाली थी। खुलासा हुआ है, कि नसरल्लाह के सटीक ठिकाने की जानकारी ईरान के किसी टॉप के अधिकारी ने इजराइल को दी थी, जिसने दुनिया को हैरान किया है, कि आखिर इजराइल की पहुंच कहां तक है।
और ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के खुलासे से ये बिल्कुल साफ हो जाता है, कि इजराइल की मोसाद खुफिया एजेंसी ईरान की खुफिया सेवाओं के शीर्ष स्तर तक घुसपैठ करने में कामयाब रही है, और इसने ईरान को परेशान कर रखा है।
पूर्व ईरानी राष्ट्रपति अहमदीनेजाद का कहना है, कि इजराइल की जासूसी करने के लिए ईरान में एक टॉप लेवल की टीम का गठन किया गया था, जिसका काम मोसाद को काउंटर करना था और ईरान के खिलाफ होने वाले मोसाद के ऑपरेशंस को रोकना था, लेकिन ईरान को पता नहीं चल पाया, कि उस टीम का प्रमुख जिस शख्स को बनाया गया, असल में वो मोसाद का ही एजेंट था।
अहमदीनेजाद ने कहा, कि सिर्फ उस टीम का प्रमुख ही मोसाद का एजेंट नहीं था, बल्कि उसने उस टीम में डबल एजेंट्स की भर्ती करनी शुरू कर दी और बात में पता चला, कि उस टीम में 20 डबल एजेंट्स थे, जो कहने के लिए ईरानी एजेंट्स थे, लेकिन असल में वो मोसाद के लिए काम करते थे।
अहमदीनेजाद के मुताबिक, मोसाद ऑपरेशन का लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में जानकारी चुराना था। अहमदीनेजाद के मुताबिक, इस घुसपैठ ने मोसाद को "जटिल ऑपरेशन" को अंजाम देने में सक्षम बनाया, जिसमें महत्वपूर्ण परमाणु दस्तावेजों की चोरी भी शामिल है। यह दावा, अगर सच है, तो ईरान की खुफिया सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण उल्लंघन को उजागर करता है, जिसे उसके सबसे दुर्जेय विरोधियों में से एक ने अंजाम दिया है।
अहमदीनेजाद के आरोप जासूसी गतिविधियों की गहराई का खुलासा करते हैं, जो ईरान के खुफिया ढांचे में घुस गई हैं, जिससे ईरान के लिए अपनी परमाणु जानकारियों को गोपनीय रखना काफी मुश्किल हो गया है।
ईरान में अंदर तक घुसा हुआ मोसाद
ईरान के अंदर इजराइल के ऑपरेशंस नये नहीं हैं। साल 2018 में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए दावा किया था, कि उनके पास ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई गोपनीय दस्तावेज हैं और उन्होंने दावा किया, कि उनके पास पूरे सबूत हैं, कि ईरान, परमाणु बम का निर्माण कर रहा है।
यह घोषणा तेहरान में मोसाद के एक साहसिक ऑपरेशन के बाद की गई थी, जिसमें एजेंटों ने एक गोपनीय जगह में घुसपैठ करते हुए ईरान के परमाणु हथियार डेवलपमेंट प्रोग्राम की जानकारियां देवे वाले 100,000 से ज्यादा दस्तावेजों को बाहर निकाल लिया था। छह घंटे से भी कम समय में अंजाम दिए गए इस ऑपरेशन में दस्तावेजों को सुरक्षित करने के लिए तिजोरियों को तोड़ना भी शामिल था, बाद में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने उन दस्तावेजों की प्रमाणिकता की भी पुष्टि की थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, उन दस्तावेजों को हासिल करने के बाद बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी और अमेरिकी अधिकारियों को दस्तावेज सौंपे थे और उसके बाद ही अमेरिका ने ईरान के साथ 2015 में किए गये परमाणु समझौते से बाहर निकलने का फैसला किया।
अहमदीनेजाद के हालिया दावों से ईरानी क्षेत्र के अंदर मोसाद के ऑपरेशंस की दुस्साहसता, इजराइल और ईरान के बीच खुफिया युद्ध की चल रही तीव्रता को प्रदर्शित करती है। ये घटनाक्रम इस बात को रेखांकित करते हैं, कि इजराइल ईरान की परमाणु क्षमताओं को कमजोर करने के लिए किस हद तक जाने को तैयार है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ रहा है।
आपको बता दें, कि अहमदीनेजाद 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति थे। उनके बाद हसन रूहानी ने पदभार संभाला और उनके पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ, पूर्व खुफिया मंत्री अली यूनेसी ने 2022 में एक इंटरव्यू में माना, कि "मोसाद ने पिछले 10 वर्षों में कई सरकारी विभागों में घुसपैठ की है, इस हद तक कि देश के सभी शीर्ष अधिकारियों को अपनी जान की सलामती के लिए डरना चाहिए।" उनका संकेत ये था, कि इजराइल जब चाहे, उस वक्त किसी भी ईरानी अधिकारी को मार सकता है।
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