Israel: मोबाइल फोन को एयरप्लेन मोड में लगाकर कोरोना वायरस टेस्टिंग से बच रहे लोग
जेरूशलम। इजरायल में कोरोन वायरस महामारी के बीच ही इसकी ट्रैकिंग से बचने का लोगों ने नया तरीका निकाला है। इजरायल में लोग कोविड-19 की ट्रैकिंग से बचने के लिए मोबाइल फोन का सहारा ले रहे हैं। अथॉरिटीज के लिए इन लोगों ने बड़ी विकट समस्या पैदा कर दी है। लोगों को डर है कि उन्हें क्वारंटाइन किया जा सकता है और इसलिए ही अब वह इससे बच रहे हैं। इजरायल में इस समय कोरोना के 102,380 केस हैं और 834 लोगों की मौत कोरोना की वजह से हो चुकी है।

क्वारंटाइन से डरे हैं लोग
कोविड-19 पॉजिटिव आने के बाद क्वारंटाइन से डरे इजरायल में नागरिक संक्रमित व्यक्ति के करीब जाने पर अपने मोबाइल फोन को या तो स्विच ऑफ कर दे रहे हैं या फिर उसे एयरप्लेन मोड में लगा दे रहे हैं। यही नहीं कुछ लोग तो प्री-पेड सिम कार्ड का प्रयोग तक कर रहे हैं। इजरायल में हामाजेन के नाम से कोरोना वायरस एप तैयार की गई है। यह एक वालेंटियरी एप है और इसे हाल ही में अपग्रेड किया गया है। इस अपग्रेडेशन के बाद एप ब्लूटूथ कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग जैसे फीचर से लैस की गई है। लेकिन कुछ यूजर्स का कहना है कि एप की वजह से उनके मोबाइल फोन की सारी बैटरी उड़ जाती है। इजरायल के कम्यूनिकेशन मिनिस्टर योआज हेंदल ने कहा है कि यह एक बड़ी समस्या है। उनका कहना है कि इजरायल में कोई निगरानी तंत्र नहीं है और ना ही नागरिकों को इसके लिए मजबूर किया जा सकता है।
पीएम की मंजूरी के बिना आई एप
यह सर्विलांस सिस्टम प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की निगरानी के बिना ही लॉन्च कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में बिल लाकर इसे लोगों के लिए लॉन्च किया गया है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि बड़े स्तर पर लोगों की ऐसी निगरानी करना उनका शोषण करने जैसा है। इस एप को काउंटर-टेररिज्म वाली टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके ही तैयार किया गया है। इसे मार्च में लॉन्च किया गया था। इस एप के जरिए उन लोगों के मूवमेंट पर नजर रख जाती है जो कोरोना वायरस पॉजिटिव हैं और दो मीटर के दायरे में है। बताया जा रहा है कि इस एप की मदद से इजरायल में कोरोना के 30 प्रतिशत केसेज का पता लगा है।












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