Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Israel-Palestine conflict:हमास क्या है और इजरायल के साथ उसका युद्ध क्यों हुआ ?

यरुशलम, 21 मई: 11 दिनों के खूनी संघर्ष के बाद इजरायल और हमास के बीच फिलिस्तीन के गाजा शहर में युद्ध विराम का ऐलान हो चुका है। इस संघर्ष विराम में मिस्र ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। हालांकि, यह सीजफायर कितना टिकाऊ है, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन है, क्योंकि हमास धमकी दे रहा है कि 'ट्रिगर पर से उसकी उंगलियां हटी नहीं हैं।' इस खूनी जंग का आगाज 10 मई को हुआ था, जब हमास ने पूर्वी यरुशलम में हिंसा भड़कने के बाद इजरायल के खिलाफ रॉकेट दागे थे। दरअसल, यह हिंसा तब भड़की थी, जब इजरायल ने अप्रैल महीने में रमजान के दौरान अल अक्सा मस्जिद के पास बैरिकेड लगाकर नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित कर दी थी। मौजूदा युद्ध विराम इसलिए बहुत ही अहम है, क्योंकि इजरायल और हमास के बीच हिंसक लड़ाई का एक लंबा इतिहास रहा है और यह संगठन हमेशा इजरायल और फिलिस्तीन के बीच शांति प्रक्रियाओं का विरोध करता आया है। वैसे संघर्ष विराम की घोषणा से आम लोगों की जान में जान आई है और उन्होंने गाजा पट्टी में सड़कों पर निकलकर खुशियों का इजहार किया है।

हमास क्या है ?

हमास क्या है ?

हमास फिलिस्तीन का एक कट्टर इस्लामिक आतंकवादी संगठन है। यह वहां के कई इस्लामिक समूहों में सबसे बड़ा और प्रभावशाली भी है। मौजूदा हमास की पैदाइश 1980 के दशक में हुई थी, लेकिन इसने अपनी मौजूदगी का पहला अहसास 1987 में तब कराया, जब इसने इजरायल के खिलाफ पहले फिलिस्तीनी इंतिफादा (विद्रोह) की अगुवाई की। वैसे तो हमास का अरबी मतलब जोश या उत्साह है, लेकिन फिलिस्तीन में यह हरकत अल-मुकावामाह अल-इस्लामिया या इस्लामिक प्रतिरोध आंदोलन का रूप है। हमास इस्लामिक दार्शनिक-राजनीतिक संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से निकला संगठन है, जिसने 1967 के युद्ध के बाद से पूरे फिलिस्तीन में कई धार्मिक संगठन स्थापित किए। इसके संस्थापक शेख अहमद यासीन ने इसे बढ़ाने में शुरू से ही बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह 12 साल की उम्र से ही व्हीलचेयर के सहारे चलता था। वह हमास का आध्यात्मिक गुरु बना, जिसकी मौत 2004 में एक इजरायली हमले में हो गई। 1990 के दशक में हमास ने एक हथियारबंद आतंकी संगठन का शक्ल अख्तियार किया और आज की तारीख में वह फिलिस्तीन का सबसे ताकतवर राजनीतिक इकाई भी बनकर उभरा है।

इजरायल- फिलिस्तीन विवाद की नींव कब पड़ी ?

इजरायल- फिलिस्तीन विवाद की नींव कब पड़ी ?

1948 में इजरायल के जन्म के बाद जॉर्डन, मिस्र, सीरिया और अरब देशों ने फिलिस्तीन की सत्ता को संचालित किया। 1964 में इजरायल के खिलाफ संघर्ष और फिलिस्तीन के गठन के लिए फिलिस्तीन लिब्रेशन ऑर्गेनाइजेशन (पीएलओ) अस्तित्व में आया। 1980 और 90 के दशक में यासिर अराफात इसके सबसे लोकप्रिय और चर्चित नेता रहे। 1996 में हुए पहले चुनाव में उनकी फतह पार्टी ने गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक दोनों ही क्षेत्रों में जीत दर्ज की, जहां फिलिस्तीन नेशनल अथॉरिटी ने नागरिक प्रशासन का काम चलाया। 1993 के ओस्लो शांति समझौते के तहत इस अथॉरिटी को संयुक्त राष्ट्र से भी मान्यता मिली। लेकिन, यह समझौता कभी लागू नहीं हो पाया।

फिलिस्तीन की मौजूदा स्थिति क्या है ?

फिलिस्तीन की मौजूदा स्थिति क्या है ?

2004 में अराफात के निधन के बाद फिलिस्तीन अथॉरिटी और उनकी फतह पार्टी दोनों की कमान महमूद अब्बास को मिल गई। इस दौरान हमास अपनी सैन्य ताकत और बढ़ाता रहा और उसकी वहां पर लोकप्रियता भी बढ़ती रही। गाजा पट्टी से इजरायल के अपने सैनिकों को हटा लेने के बाद 2005 में वहां दूसरे दौर का चुनाव हुआ। उस चुनाव में फतह पार्टी फिलिस्तीन में राष्ट्रपति का चुनाव जीत गई, लेकिन गाजा सिटी में हमास को जीतने में कामयाब हो गया। 2006 में इसने गाजा में अपना शासन स्थापित करने के लिए फिलिस्तीनी अथॉरिटी के राष्ट्रपति महमूद अब्बास के खिलाफ तख्ता पलट कर दिया। आज गाजा पर हमास का शासन है और वेस्ट बैंक का प्रशासन फतेह पार्टी के हाथों में है और महमूद अब्बास फिलिस्तीन के राष्ट्रपति हैं। तब से लेकर जब भी इजरायल और फिलिस्तीन में भिड़ंत होती है तो यह जंग इजरायली सेना और हमास के लड़ाकों के बीच ही होती है।

हमास क्या चाहता है ?

हमास क्या चाहता है ?

1993 के शांति समझौते को तबाह करने के लिए हमास ने इजरायल के तत्कालीन विपक्षी नेताओं (इसमें इजरायल के मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी शामिल हैं) समेत मुख्य भूमिका निभाई थी। शांति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद हमास ने इजरायल में आत्मघाती हमले करवाने शुरू कर दिए थे और यासिर अराफात के धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक आंदोलन के खिलाफ बहुत बड़ी मुहिम शुरू कर दी। शांति समझौते के तहत इजरायल और फिलिस्तीन दोनों के अस्तित्व को मंजूरी दी गई थी, जिसे फिलिस्तीनी अथॉरिटी और संयुक्त राष्ट्र ने भी माना था। लेकिन, हमास इजरायल का अस्तित्व ही मिटा देना चाहता है। फिलिस्तीन के उसके काल्पनिक नक्शे में इजरायल, गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक के क्षेत्र भी शामिल हैं। 1988 में उसने एक चार्टर जारी किया था, जिसमें फिलिस्तीन को इस्लाम की एक धरती घोषित किया था, जिसमें यहूदी राज्य (इजरायल) के अस्तित्व की कोई संभावना नहीं थी। 2017 में जब हमास फिलिस्तीन में सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा तो उसने अपनी स्थिति थोड़ी मजबूत करते हुए गाजा, वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में अंतरिम फिलिस्तीन राज्य की घोषणा की ओर कदम बढ़ाना शुरू कर दिया। पूर्वी यरुशलम की हिंसा उसके इसी तात्कालिक लक्ष्य का हिस्सा है। हमास अभी भी इजरायल के अस्तित्व को मान्यता नहीं देता, लेकिन शायद दुनिया में इस्लामिक कट्टरपंथ के खिलाफ बने एक माहौल को देखते हुए 1988 वाले अपने रवैए में उसने थोड़ा बदलाव किया है। वह अब कहने लगा है, उसकी लड़ाई यहूदियों के खिलाफ नहीं, यहूदी सेना के खिलाफ है।

हमास को किसका समर्थन है ?

हमास को किसका समर्थन है ?

फिलिस्तीनी अथॉरिटी को संयुक्त राष्ट्र के तीन-चौथाई सदस्यों का समर्थन हासिल है। लेकिन, हमास के साथ मध्य-पूर्व या पश्चिम एशिया के ज्यादातर मुस्लिम देशों का मजबूत समर्थन है। शुरू में जॉर्डन भी हमास का बहुत बड़ा समर्थक था और वहां उसने अपना मुख्यालय भी बना रखा था। लेकिन, 1999 में उसने हमास पर गाजा और वेस्ट बैंक में मिलिट्री ऑपरेशन के लिए उसकी जमीन के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए वहां से भगा दिया। यहां से हमास सीरिया शिफ्ट हो गया और 2000 में उसने वहां अपना दूसरा इंतिफादा (विद्रोह) लॉन्च किया। लेकिन, अंतरराष्ट्रीय दबाव में उसे वहां भी ज्यादा दिन तक ठिकाना नहीं मिला। इस समय हमास के सरगना कतर में अपना बेस बनाए हुए हैं और यह देश उसका सबसे बड़ा फाइनेंसर भी है। कतर के अलावा हमास की हौसला अफजाई करने में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र में भी इस मसले पर इजरायल के खिलाफ मोर्चा संभालने में यही तीनों मुस्लिम देश सबसे आगे थे। इनके अलावा कई संगठन भी हैं, जो हमास की आर्थिक जरूरतों को चोरी-छिपे पूरा करने की कोशिश करते हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+