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Israel-Hamas War: मरने पर बच्चों की हो पाए पहचान, माता-पिता बॉडी पर लिख रहे पहचान.. गाजा की दर्दनाक कहानी

Israel-Hamas War: हमास ने 7 अक्टूबर को इजराइल पर हमला किया और उसके बाद से इजराइल गाजा पट्टी पर बमबारी कर हमास से बदला ले रहा है। लेकिन, हमास और इजराइल के बीच चल रहे इस युद्ध में बच्चों की मासूमियत से लेकर उनके आंसू और उनके भोलापन को कुचला जा रहा है। पहले हमास ने इजराइली बच्चों के सिर काटे और अब इजराइली बम बच्चों के माथे पर गिर रहे हैं।

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा पट्टी के एक अस्पताल के मुर्दाघर में स्टील के एक ट्रे में तीन बच्चों के शव रखे हुए हैं और उनके पतलून फटे हुए थे। लिहाजा उन बच्चों का बॉडी दिख रहा था। और इस दौरान बच्चों के शरीर पर स्याही से कुछ लिखा हुआ नजर आए। जब ध्यान से देखा गया, तो उनके शरीर पर स्याही से उनकी पहचान दिखी।

gaza name wrtten on childrens bodies

बच्चों के बॉडी पर स्याही से नाम

अल-अक्सा शहीद अस्पताल के आपातकालीन विभाग के प्रमुख डॉ. अब्दुल रहमान अल मसरी ने सीएनएन को बताया, कि "हमें कुछ मामले मिले हैं, जहां माता-पिता ने अपने बच्चों के नाम पैरों और पेट पर लिख रखे हैं।" जाहिर है, मकसद ये था, कि बच्चे कहीं गुमनामी में ही ना मर जाएं, लिहाजा उनके शरीर पर उनकी पहचान लिखी गई है।

डॉ. अब्दुल रहमान अल मसरी ने कहा, कि माता-पिता चिंतित हैं और उन्हें लगता है, कि कुछ भी हो सकता है। या तो माता-पिता की ही मौत हो सकती है, या बच्चों की ही मौत हो सकती है। दोनों ही स्थिति में, बच्चों की शिनाख्त के लिए उनके शरीर पर स्याही से उनके नाम और पते लिखे गये हैं।

अल मसरी ने कहा, "इसका मतलब है कि उन्हें लगता है, कि उन्हें किसी भी समय निशाना बनाया जा सकता है और वे घायल हो सकते हैं, या उनकी जान जा सकती है।"

खाली स्याही घनी आबादी वाले इलाके में माता-पिता द्वारा महसूस किए गए डर और हताशा का ये एक छोटा सा संकेत है, क्योंकि इज़राइल 7 अक्टूबर के हमास हमलों के प्रतिशोध में लगातार हवाई हमले कर रहा है।

अल-अक्सा शहीद अस्पताल के उस कमरे के पर्यवेक्षक ने रविवार को, "एक असाधारण दिन" बताया, जहां शवों को धोया जाता है। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने सीएनएन को बताया, कि शनिवार से रविवार की रात में मृतकों की संख्या 200 से ज्यादा हो गई है, और उन्होंने भी डॉ. अल मसरी की बातों को दोहराया।

पर्यवेक्षक ने कहा, कि "आज हमने देखा है, कि कई माता-पिता अपने बच्चों के नाम उनके पैरों पर लिख रहे हैं ताकि हवाई हमले के बाद या अगर वे खो जाएं, तो उन्हें पहचाना जा सके। यह एक नई घटना है जो अभी गाजा में शुरू हुई है।"

उन्होंने कहा, कि "कई बच्चे लापता हैं, कई बच्चों की बॉडी यहां आती है, कई बच्चों की पहचान करना असंभव हो जाता है और शरीर पर लिखने से उनकी पहचान हो जाती है।"

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गाजा पट्टी में संकट में बच्चे

पिछले दो हफ्तों में दुनिया की सबसे घनी आबादी वाले स्थानों में से एक में हवाई हमलों की चपेट में आई टूटी-फूटी इमारतों के मलबे से सैकड़ों बच्चों को निकाला गया है, उनमें से कई को उनकी चोटों के कारण पहचानना भी मुश्किल हो गया है।

गाजा में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने सीएनएन को बताया, कि इस बीच अस्पतालों में दवा, पानी और बिजली खत्म हो रही है, जबकि सैकड़ों घायल फिलिस्तीनी इलाज के लिए भटक रहे हैं।

अस्पताल के महानिदेशक डॉ. इयाद इस्सा अबू जहीर ने स्थिति को 'विनाशकारी' बताया है। उन्होंने कहा, कि "दुनिया के किसी भी अस्पताल के लिए इतनी संख्या में घायलों को भर्ती करना असंभव है। इन घायलों के लिए अस्पताल में कोई जगह या कोई बिस्तर नहीं है। घायल ऑपरेशन थिएटर के कमरों के दरवाजे पर और एक-दूसरे के ऊपर बैठे हैं, हर कोई ऑपरेशन के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहा है।"

हमास के हमले के जवाब में इज़राइल ने दो सप्ताह पहले गाजा की "पूर्ण घेराबंदी" की घोषणा कर दी थी और इजराइल लगातार हमास के ठिकानों पर हमले कर रहा है, लिहाजा लोगों तक भोजन, पानी या फिर दवाइयां नहीं पहुंच पा रही हैं।

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हमास के हमले में इजराइल में 1,400 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जिनमें से ज्यादातर आम नागरिक हैं। ये दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दूसरा सबसे बड़ा यहूदियों का नरसंहार था। हमास के आतंकियों ने दक्षिणी इजराइल में चुन-चुनकर लोगों को मारा है और कम से कम 40 बच्चों के गर्दन काटकर उनकी हत्या कर दी है, जिसका बदला लेने के लिए इजराइल ने हमास का नामो-निशान मिटा देने की कसम खाई है।

इसके बाद से गाजा में फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 7 अक्टूबर से गाजा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 4,650 से ज्यादा हो गई है, जबकि 14,245 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाजा में लाखों की संख्या में बच्चे रहते हैं।

रविवार को हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से एक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें गाजा के अल-शिफा अस्पताल में नवजात शिशु विभाग इकाई के प्रमुख डॉ. फुआद अल-बुलबुल ने चेतावनी दी है, कि अगर ईंधन खत्म हो गया, तो उनकी देखरेख में रहने वाले ज्यादातर नवजात मर जाएंगे।

उन्होंने कहा, कि "अगर बिजली बंद कर दी गई, तो इस इकाई के अंदर विनाशकारी घटनाएं होंगी।" अल-बुलबुल ने वीडियो में कहा, वेंटिलेटर पर निर्भर ज्यादातर बच्चे मर जाएंगे, क्योंकि हम केवल एक, दो बच्चों को ही बचा सकते हैं, लेकिन हम सभी बच्चों को नहीं बचा सकते।

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