चीन से साठगांठ की तो खैर नहीं ! मुस्लिम देशों को ISKP के संकेत के मायने क्या हैं ?
आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रॉविंस ने मुस्लिम मुल्कों की कड़ी आलोचना की है। इसकी शिकायत ही कि चीन उइगर मुसलमानों पर जुल्म ढा रहा है, लेकिन मुस्लिम देश भी उसके पिछलग्गू बने हुए हैं।

मुस्लिम देशों की चीन से साठगांठ को लेकर पहली बार किसी आतंकवादी संगठन ने मुंह खोला है और वहां हो रहे अल्पसंख्यक मुसलमानों की प्रताड़ना का मुद्दा उठाया है। खतरनाक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से ही जुड़े इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रॉविंस (ISKP) ने एक किताब के जरिए मुस्लिम देशों की सोच की आलोचना की है कि वह कैसे चीन जैसे मुल्क का साथ दे रहे हैं। आईएसकेपी चीन में उइगर मुसलमानों के मुद्दे पर भड़का हुआ है और इसके लिए वहां रह रहे हुई मुसलमानों की भी निंदा की है कि वह कैसे चीन के नियम-कानून को मानने के लिए तैयार हो रहे हैं। गौरतलब है कि अफगानिस्तान में पिछले कुछ महीनों में चीनी ठिकानों पर हुए हमलों की जिम्मेदारी भी इसी संगठन ने ले रखी है।

ISKP के निशाने पर मुस्लिम देश
आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रॉविंस (ISKP) ने अब उइगर मुसलमानों के मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई छेड़ने का संकेत दिया है। यह खतरनाक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट का ही क्षेत्रीय संगठन है, जो दुनिया भर में बहुत ही खूंखार माना जाता है। ऐसा पहली बार हुआ है कि इस्लामिक स्टेट से जुड़े इस आतंकी संगठन ने चीन में उत्पीड़न के शिकार होने वाले उइगर मुसलमानों के मुद्दे पर एक किताब छापी है। इसमें इस्लामिक स्टेट ने चीन के उइगर मुसलमानों की दुर्दशा देखने के बावजूद चीन से साठगांठ करने के लिए मुस्लिम देशों को जमकर लताड़ा गया है।

चीन में उइगर मुसलमानों के उत्पीड़न पर भड़का
117 पन्नों की अपनी किताब में इस आतंकी संगठन ने अफगानिस्तान में राजनीति से लेकर आर्थिक और सुरक्षा से संबधित चीन के 10 मंसूबों का जिक्र किया गया है। इसके साथ ही इसमें ईरान पर यह कहकर हमला किया गया है कि वह पूर्वी तुर्किस्तान में दखल देने की कोशिश कर रहा है। यह संगठन 'हुई' मुसलमानों से भी नाराज है। इसका आरोप है कि वह कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की सरकार के हर नियम-कानूनों को मान रहे है, जिसके विरोध करने की वजह से उइगर मुसलमानों को भुगतना पड़ रहा है।

तालिबान का कट्टर दुश्मन है ISKP
अफगानिस्तान में आईएसकेपी तालिबान की जगह तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी को समर्थन करना चाहता है। क्योंकि, तालिबान की सत्ता होने की वजह यह अफगानिस्तान में चीनी कारोबार और हितों को ठीक से निशाना नहीं बना पा रहा है। यह आतंकी संगठन अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता का कट्टर विरोधी है और जबसे इसने 2021 में मुल्क पर कब्जा किया है, वहां इस्लामिक स्टेट के हमले बढ़ गए हैं।

काबुल में चीनी ठिकाने पर हमले की जिम्मेदारी ली थी
अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रॉविंस के निशाने पर मुख्य तौर पर तालिबान के लड़ाके और वहां के अल्पसंख्यक शिया समुदाय के लोगों के अलावा चीन के स्वामित्व वाले कारोबार हैं। दिसंबर में इस संगठन ने काबुल के बीच में स्थित चीन के स्वामित्व वाले काबुल लोंगन होटल पर हुए योजनाबद्ध हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस हमले में तीन हमलावर मारे गए थे और होटल में ठहरे कम से कम दो गेस्ट जख्मी हो गए थे।
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चीन से साठगांठ की तो खैर नहीं !
दरअसल, जब से अफगानिस्तान में तालिबान आतंकियों की सत्ता वापस आई है, चीन के दिन बदल गए हैं। उसकी नजर वहां की धरती में दबी पड़ी अकूत प्राकृतिक संसाधन हैं। जबकि, तालिबान को उन संसाधनों के दम पर अपनी सत्ता कायम रखनी है। खासकर चीन की नजर मेस अयानक खदान पर अटकी हुई है, जिसके बारे में माना जाता है कि वहां दुनिया का सबसे बड़ा तांबे का भंडार है। चीनी कंपनियां वहां से तमाम तरह का खनिज निकालना चाहती हैं और उनकी रक्षा तालिबान के आतंकी कर रहे हैं। लेकिन, अब इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रॉविंस ने इन दोनों के साथ ही चीन से साठगांठ करने वाले सभी मुस्लिम मुल्कों को अल्टीमेटम दे दिया है। (कुछ तस्वीरें- सांकेतिक)












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