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ट्रेवलिंग ट्रेनर्स के जरिए आतंकी साजिश का खुलासा.. ISIS का नया मॉड्यूल कितना खतरनाक, समझिए

ISIS Travelling Trainers: आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बनाने के लिए "रोमिंग ट्रेनर्स" की भर्तियां करने की एक नई रणनीति अपनाई है। ये खुलासा आईएसआईएस के गिरफ्तार गुर्गों ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के सामने किए हैं।

ISIS के ट्रेनर्स अपने इस मॉड्यूल के जरिए अपने स्लीपर सेल को फौरन विस्फोटक बनाने का ट्रेनिंग देते हैं, ताकि वो किसी भी वक्त आतंकी हमलों को अंजाम दे सकें। बकायदा इसके लिए आईएसआईएस की तरफ से एक ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया जाता है, जिसके लिए अलग अलग ट्रेनर्स रहते हैं। आइये समझते हैं, कि ISIS का ये मॉड्यूल कितना खतरनाक है?

ISIS Travelling Trainers

ISIS का नया ट्रेवलिंग ट्रेनर्स मॉड्यूल

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में 2022 में विस्फोटकों की जब्ती की जांच के दौरान, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के जाल में फंसने वाले गिरफ्तार ISIS के गुर्गों, इमरान खान और मोहम्मद यूनुस साकी से पूछताछ के दौरान पता चला है, इन दोनों को आईईडी बनाने की स्पेशल ट्रेनिंग दी गई थी।

इमरान खान और मोहम्मद यूनुस, मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के रहने वाले हैं और इनपर आतंकी साजिश में शामिल होने का आरोप है।

सनडे गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, IED बनाने की ट्रेनिंग हासिल करने के लिए इन दोनों ने जम्मू-कश्मीर, केरल और मध्य प्रदेश में आतंकवादी समूह के स्लीपर सेल के सदस्यों के लिए कई ट्रेनिंग कैंप्स के आयोजन किए थे।

इन दोनों के रडार पर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र भी थे।

एनआईए सूत्रों ने कहा है, कि इमरान खान पिछले साल चित्तौड़गढ़ में जो आईईडी विस्फोटक मिला था, उसके पीछे का मास्टरमाइंड है।

आईईडी को रेगिस्तानी राज्य में रंगरूटों को बम बनाने का प्रशिक्षण देने के लिए वहां लाया गया था। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों को उनकी योजनाओं की भनक लग गई, जिसके बाद इमरान खान और साकी दोनों महाराष्ट्र भाग गए थे।

चित्तौड़गढ़ आईईडी मामले की जांच, धीरे धीरे एनआईए को ISIS से प्रेरित आतंकी संगठन "एसयूएफए" तक ले गई। NIA के मुताबिक, साकी और इमरान खान महाराष्ट्र से गिरफ्तार होने से पहले, सक्रिय रूप से ISIS की विचारधारा को फैलाने में लगे हुए थे। एनआईए ने आरोपियों के कब्जे से विस्फोटक और IED के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अलग अलग कंपोनेंट्स जब्त किए थे।

एनआईए ने कहा है, कि जांच से पता चला है, कि दोनों ने राजस्थान और भारत में अन्य जगहों पर आतंक और तबाही फैलाने के लिए आईईडी बनाने के लिए सामग्री और अन्य पदार्थ खरीदे थे।

गिरफ्तार किए गए इन दोनों आरोपियों को, IED बनाने के लिए काफी स्पेशल ट्रनिंग दी गई थी, लिहाजा ये एक्सपर्ट बन चुके थे और फिर इन्हें नये आतंकियों की खेप तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

जिसके बाद मास्टरमाइंड इमरान खान ने अपने पोल्ट्री फार्म में ऐसे उपकरण बनाने के लिए अपने सह-आरोपियों को प्रशिक्षित करना शुरू कर दिया था। पिछले महीने एनआईए ने पोल्ट्री फार्म को कुर्क कर दिया था।

पिछले साल मुंबई भागने और पुणे में बसने के बाद, उन्होंने पिछले साल पुणे में कम से कम दो आईईडी प्रशिक्षण और निर्माण कार्यशालाएं आयोजित कीं थीं।

इस बीच, एनआईए ने 2022 में कोयंबटूर में ISIS से प्रेरित कार आईईडी बम विस्फोट से जुड़े एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। जिसका नाम मोहम्मद अजरुद्दीन उर्फ अजर है, जो पहले से ही एक अन्य मामले में केरल की जेल में बंद है और इस मामले में गिरफ्तार होने वाला 13वां व्यक्ति था।

उसे पहले तमिलनाडु आईएसआईएस मॉड्यूल मामले में गिरफ्तार किया गया था और उसके खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था और बाद में उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

उत्तर प्रदेश से संबंधित एक अलग मामले में, दो आईएसआईएस कार्यकर्ताओं, आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल खान, दोनों कानपुर नगर के निवासी थे, उन्हें लखनऊ की विशेष अदालत ने एक रिटायर्ड स्कूल प्रिंसिपल, राम बाबू शुक्ला की हत्या करने के लिए दोषी ठहराया था।

इसका मकसद, लोगों में भय और आतंक फैलाने के साथ साथ आईएसआईएस के एजेंडे का प्रचार करना था।

कानपुर में मारे गये रिटायर्ड प्रिंसिंपल शुक्ला, जो कानपुर के स्वामी आत्मप्रकाश ब्रह्मचारी जूनियर हाई स्कूल से रिटायर्ड हुए थे, उनकी 24 अक्टूबर 2016 को उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वह साइकिल से घर लौट रहे थे। उन पर आरोपियों ने कानपुर के प्योंदी गांव के पास हमला किया था।

जांच में पता चला, कि ये दोनों आईएसआईएस की विचारधारा काफी प्रभावित थे और फिर ये कट्टरपंथी बन गए थे और उन लोगों को मारने के लिए निकले थे, जिनके बारे में उनका मानना था, कि वे अविश्वासी हैं।

वहीं, तीसरे आरोपी मोहम्मद सैफुल्ला की 7 मार्च 2017 को एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड ने मार गिराया था।

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