क्या अमेरिका और ट्रंप को सबक सिखाने के लिए चर्चों पर बुल्डोजर चलवा रहा है चीन
नई दिल्ली- चीन में अबतक मुसलमानों के साथ ही बर्बरता की खबरें आती थीं। लेकिन, अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच उसने अपनी क्रिश्चियन आबादी पर भी कहर बरपाना शुरू कर दिया। वैसे तो चीन में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर सत्ताधारी दल की ओर से तब से हमले बढ़ गए हैं, जबसे राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सभी धर्मों को कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति समर्पित हो जाने का हुक्म दिया है। अब अमेरिकी मीडिया के जरिए ऐसी खबरें आई हैं कि वहां की सरकार ने कई प्रांतों में चर्चों पर हमले शुरू कर दिए हैं। ईसाइयों से घरों में ईसा मसीह की जगह जिनपिंग जैसे नेताओं की तस्वीरें लगाने को कहा गया है। कई चर्चों पर क्रॉस गिराने के लिए बुलडोजर चलवा दिए गए हैं। स्थानीय अधिकारी दबी जुबान में बता रहे हैं कि सब ऊपर से आदेश है।

अब ईसाइयों और चर्चों पर हमले कर रहा है चीन
चीन की तानाशाही साम्यवादी शासन ने अब ईसाइयों को आदेश दिया है कि वो अपने घरों से क्रॉस का निशान तोड़ डालें और यीशु की तस्वीरें हटा लें। यही नहीं साम्यवादी शासन ने ईसाइयों से कहा है कि वो अब अपने धार्मिक प्रतीकों की जगह कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं की तस्वीर लगाएं, जैसे कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग। ये आदेश तब दिया गया है, जब चीन के कई प्रांतों में चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार ने चर्चों से धार्मिक प्रतीकों को जबरन तोड़ डाला है। डेली मेल ने अमेरिका स्थित न्यूज साइट रेडियो फ्री एशिया के हवाले से ये खबर दी है। ईसाइयों के घरों और चर्चों पर सीपीसी की सरकार के ऐसे हमले अन्हुई, जियांग्सु, हेबेई और झेजियांग प्रांतों में किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शान्शी के अधिकारियों का निर्देश है कि धार्मिक पहचान की चीजें हटाकर वहां कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं की तस्वीरें लगाई जाएं।

चर्चों पर चलाए जा गए हैं बुल्डोजर
बताया जा रहा है कि शनिवार और रविवार को ह्युइनान प्रांत में धार्मिक मामलों का इंचार्ज स्थानीय शिवान क्राइस्ट चर्च में जबरन घुस गया और वहां लगे क्रॉस को तोड़ डाला। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों ने एक हफ्ते पहले ही चर्च को क्रॉस हटा लेने को कहा था, लेकिन जब नहीं हटाया गया तो उसे जबरन तोड़कर हटा दिया गया। जानकारी के मुताबिक सत्ताधारी पार्टी के अधिकारी जब अपने एक हफ्ते पुराने आदेश की तामील के लिए वहां पहुंचे तो करीब दर्जन भर ईसाइयों ने क्रॉस पर बुल्डोजर चलाने से उन्हें रोकने की भी कोशिश की थी, जो इसी के लिए वहां पहले से जुटे थे। लेकिन, फिर भी शी जिनपिंग की पार्टी के अफसरों ने उसे तबाह करके ही माना।

धार्मिक गतिविधियों को सख्ती से रोकने का हुक्म
अमेरिका स्थित चाइना ऐड नाम के एक प्रेशर ग्रुप के हवाले से बताया गया है कि पिछले 7 जुलाई को झेजियांग के योन्गजिया में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी। स्थानीय अधिकारियों ने वहां अओ'डि क्राइस्ट चर्च और यिचांग क्राइस्ट चर्च पर लगे क्रॉसों के गिराने के लिए 100 कार्यकर्ताओं के साथ क्रेन उतार दिया था। यही नहीं शांन्शी प्रांत के लिनफेन में सरकारी अधिकारियों ने गांव के सभी अफसरों को हिदायत दी है कि वो धार्मिक गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें और उन्हें सख्ती से रोकें। बता दें कि पिछले साल जिनपिंग सरकार ने आदेश दिया था कि सभी धार्मिक किताबों और उसके अनुवादों का गहन अध्ययन किया जाए और उसमें संशोधन करके यह सुनिश्चित किया जाए कि उसके जरिए समाजवाद के सिद्धांत का प्रचार हो।

चीन में करीब 7 करोड़ ईसाई हैं
जानकारी के मुताबिक कम्युनिस्ट पार्टी ने साफ हिदायत दे रखी है कि किसी भी सूरत में आगे आने वाली धार्मिक किताबों में ऐसा कोई कंटेंट न हो, जो चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के नजरिए से अलग हो। यह जानकारी चीन के धार्मिक मामलों के एक बड़े अधिकारी के माध्यम से सामने आई है। बता दें कि चीन में ईसाइयों पर इस तरह के हमले की खबरें तब सामने आई हैं, जब कोरोना वायरस और दक्षिण चीन सागर को लेकर अमेरिका और चीन में हालात बहुत ही विस्फोट बन चुके हैं। एक अनुमान के मुताबिक चीन में करीब 7 करोड़ क्रिश्चियनों की आबादी है और चीन शायद उन्हें प्रताड़ित करके इस वक्त अमेरिका से बदला लेना चाहता है, जिसने ड्रैगन को सुधर जाने की चेतावनी दे रखी है। जाहिर है कि अमेरिका एक क्रिश्चियन बहुल आबादी वाला देश है और चीन में ईसाइयों पर होने वाले हमले उसे बहुत ही ज्यादा खटक सकते हैं।

मुसलमानों पर पहले से ही जुल्म ढा रहा है चीन
चीन ने ईसाइयों पर ऐसे समय में निशाना बना शुरू किया है, जब उसपर पश्चिमी प्रांत शिंजियांग में अल्पसंख्यक उइगर मुसलमानों के मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं। हाल में ऐसी कई रिपोर्ट्स आई हैं, जिसमें उइगर डिटेंशन कैंपों में होने वाले अत्याचारों की कहानियां सामने आई हैं। चीन ने 10 लाख से ज्यादा मुस्लिम महिला-पुरुषों को इन कैंपों में बंदी बनाकर रखा है और उनके साथ जानवरों जैसा सलूक कर रहा है। कई मानवाधिकार संगठन चीन की दादागीरी रोकने के लिए यूनाइटेड नेशन तक से दखल देने की मांग कर चुके हैं, लेकिन उइगरों के हालात बद से बदतर होते चले जा रहे हैं।












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