ईरान के कट्टरपंथी पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए भरा पर्चा.. जीते तो क्या होगा?
Iran Presidential Election: ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर हादसे में मौत के बाद ईरान में नये राष्ट्रपति के चुनाव के लिए 28 जून को मतदान होने वाले हैं और कट्टरपंथी पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने रविवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवार के रूप में रजिस्ट्रेशन कराया है।
महमूद अहमदीनेजाद ईरान के लोकप्रिय राष्ट्रपति रह चुके हैं और उनके रजिस्ट्रेशन ने देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई पर दबाव बढ़ा दिया है।

ऐसा इसलिए, क्योंकि 2021 में हुए राष्ट्रपति चुनाव से पहले महमूद अहमदीनेजाद ने ईरानी सुप्रीम लीडर को खुलेआम चुनौती दी थी, जिसके बाद राष्ट्रपति उम्मीदवार चुनने वाले ईरानी अधिकारियों ने उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया था। क्योंकि, उस वक्त इब्राहिम रईसी को सुप्रीम लीडर का समर्थन हासिल था।
महमूद अहमदीनेजाद से क्यों टेशन में सुप्रीम लीडर?
महमूद अहमदीनेजाद ईरान के तेजतर्रार नेता माने जाते रहे हैं और उनकी राजनीति में वापसी ऐसे समय में हुई है, जब तेहरान के तेजी से बढ़ते परमाणु कार्यक्रम, यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस को हथियार देने और इजराइल हमास युद्ध के बीच ईरान की भूमिका को लेकर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।
तेहरान में एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकारों ने अहमदीनेजाद को देश के आंतरिक मंत्रालय में आते और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू करते देखा है। वहीं, आंतरिक मंत्रालय में आने से पहले भारी संख्या में उनके समर्थक ऑफिस के बाहर पहुंच चुके थे और उनके नाम के नारे लगा रहे थे। समर्थकों ने ईरानी झंडा अपने हाथों में ले रखा था।
अहमदीनेजाद, इससे पहले 2005 से 2013 तक दो बार ईरान के राष्ट्रपति रह चुके हैं। आपको बता दें, कि ईरान में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल 4 सालों के लिए होता है। और ईरानी कानून के तहत, चार सालों तक राष्ट्रपति पद से बाहर रहने के बाद अब वो फिर से इस पद के लिए क्वालिफाई कर गये हैं, लेकिन अपनी उम्मीदवारी के साथ वह साथी कट्टरपंथियों के बीच भी एक ध्रुवीकरण करने वाला व्यक्ति बन गये हैं।
2009 में जब अहमदीनेजाद दोबारा राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे थे, उस वक्त उनके विरोध में 'ग्रीन मूवमेंट' नाम से प्रदर्शन किया गया था, जो काफी तेजी से फैल गया, जिसे कुचलने के लिए उन्होंने कठोर कार्रवाई की थी और हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, कई पुलिस की कार्रवाई में दर्जनों लोग मारे गये थे।
वहीं, अहमदीनेजाद की विदेश नीति ने लगातार पश्चिमी देशों को परेशान किया और जब तक वो राष्ट्रपति रहे, पश्चिमी देशों में उनके नाम पर चर्चा होती रही। इसके अलावा, उन्होंने यहूदियों के नरसंहपर पर भी शक भरे सवाल उठाए थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि ईरान में कोई समलैंगिक नागरिक नहीं है और संकेत दिया था, कि ईरान चाहे तो परमाणु हथियार बना सकता है।
लेकिन, अहमदीनेजाद अपने लोकलुभावन कार्यक्रमों की वजह से अभी भी काफी लोकप्रिय हैं। उन्होंने घर बनाने के लिए कार्यक्रम चलाया था, जिसमें गरीबों के लिए घर बनाए गये थे, लिहाजा वो अभी भी लोकप्रिय बने हुए हैं। पद छोड़ने के बाद से, उन्होंने सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रियता बना ली है और अकसर अलग अलग मुद्दों पर वैश्विक नेताओं को चिट्ठी लिखते रह हैं। उन्होंने सरकारी भ्रष्टाचार की भी आलोचना की है, हालांकि उनके अपने प्रशासन पर भी भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे थे और उनके दो पूर्व उप-राष्ट्रपतियों को जेल भी हो चुकी है।
सुप्रीम लीडर खामेनेई ने 2017 में अहमदीनेजाद को चेतावनी दी थी, कि उनके फिर से पद के लिए खड़े होने से देश में "ध्रुवीकृत की स्थिति" पैदा होगी, जो "देश के लिए हानिकारक" होगी। हालांकि, खामेनेई ने अहमदीनेजाद के 2021 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के दौरान कुछ नहीं कहा था। लेकिन, उनकी उम्मीदवारी को 12-सदस्यीय गार्जियन काउंसिल ने खारिज कर दिया था।
ईरान में जो भी शख्स राष्ट्रपति चुनाव में खड़ा होने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाता है, वो लड़ पाएगा या नहीं, उसका फैसला 12 सदस्यीय गार्जियन काउंसिल तय करता है और अंतिम फैसला सुप्रीम लीडर करता है।
लिहाजा, अहमदीनेजाद चुनाव लड़ पाएंगे या नहीं, उनके रजिस्ट्रेशन पर क्या फैसला लिया जाता है, ये 12 सदस्यीय पैनल तय करेगा।
पैनल अहमदीनेजाद के रजिस्ट्रेशन को फिर से खारिज कर सकता है। लेकिन अभी तक रईसी की जगह लेने की रेस में कोई ऐसा मजबूत उम्मीदवार सामने नहीं आया है, जिसे खामेनेई की तरह स्पष्ट और भारी समर्थन हासिल हो।
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