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LPG गैस संकट के बीच भारत को बड़ी राहत, ट्रंप ने समंदर में फंसे 13 करोड़ बैरल रूसी तेल से प्रतिबंध हटाया

Iran war updates: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में मची भारी उथल-पुथल को शांत करने के लिए एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने समुद्र में फंसे हुए रूसी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटा दिया है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ जारी युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं और अमेरिका में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं।

13 करोड़ बैरल रूसी तेल समुद्र में जहाजों पर अटका

कमोडिटी डेटा ट्रैकिंग सर्विस 'Kpler' के अनुसार, वर्तमान में लगभग 130 मिलियन (13 करोड़) बैरल रूसी तेल समुद्र में जहाजों पर अटका हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी नई छूट के बाद अब यह तेल दुनिया भर के खरीदारों तक पहुंच सकेगा। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि यह राहत 11 अप्रैल 2026 तक के लिए दी गई है।

Strait of Hormuz

अमेरिकी पॉलिसी में अचानक यू-टर्न

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन न केवल प्रतिबंध हटा रहा है, बल्कि वह रूसी तेल ले जाने वाले जहाजों को $20 बिलियन का समुद्री बीमा बैकस्टॉप (Maritime Insurance Backstop) प्रदान करने की प्रक्रिया में भी है। यह अमेरिकी नीति में एक 'शार्प रिवर्सल' (अचानक यू-टर्न) है, क्योंकि पिछले साल तक अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत जैसे देशों पर दबाव बनाया था और टैरिफ दोगुना कर दिया था।

इस फैसले ने अमेरिका के भीतर और बाहर एक नई बहस छेड़ दी है:

  • घरेलू विरोध: सीनेट डेमोक्रेट्स ने ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा है कि यह ट्रंप द्वारा खुद शुरू किए गए युद्ध (ईरान संघर्ष) के आर्थिक नुकसान को छुपाने की कोशिश है।
  • यूरोप के साथ मतभेद: यूरोपीय देश अभी भी रूस पर कड़ा आर्थिक दबाव बनाए रखने के पक्ष में हैं। अमेरिका के इस फैसले से वाशिंगटन और यूरोप के बीच कूटनीतिक दरार आ सकती है।
  • एक्सपर्ट की राय: एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूस को इससे कुछ वित्तीय लाभ जरूर होगा, हालांकि ट्रेजरी विभाग का कहना है कि यह लाभ बहुत कम समय ('माइक्रो पीरियड') के लिए होगा।

ट्रंप के इस फैसले से क्या भारत को होगा फायदा?

  • 1. सस्ते तेल की बेरोकटोक आपूर्ति: भारत के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि अब रूसी कार्गो को खरीदने में कोई कानूनी या प्रतिबंधों का डर नहीं रहेगा। भारत अब बिना किसी झिझक के समुद्र में फंसे इस सस्ते तेल का सौदा कर सकता है।
  • 2. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता: वैश्विक बाजार में 13 करोड़ बैरल तेल आने से कीमतों में जो गिरावट आएगी, उसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ेगा। इससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लग सकती है।
  • 3. बीमा की समस्या हल: रूसी तेल जहाजों के लिए सबसे बड़ी बाधा बीमा (Insurance) की थी। अब अमेरिका द्वारा $20 बिलियन का बीमा बैकस्टॉप देने की खबर से भारत आने वाले टैंकरों का रास्ता साफ हो गया है।
  • 4. रणनीतिक जीत: भारत ने हमेशा से अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस से तेल खरीदने का बचाव किया है। अब अमेरिका का खुद प्रतिबंध हटाना भारत की उसी विदेश नीति पर मुहर लगाता है।

ईरान युद्ध का 14वां दिन

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े युद्ध के 14वें दिन एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान के नए सर्वोच्च नेता, आयतलोह मोजतबा खामेनेई ने अपना पहला आधिकारिक बयान जारी किया है। तेहरान द्वारा जारी इस संदेश में उन्होंने सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। इस बयान ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है।

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खाड़ी देशों में मिसाइल और ड्रोन हमलों का तांडव

ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अपने मिसाइल और ड्रोन हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है। कतर की राजधानी दोहा में एक बार फिर सायरन की आवाजें गूंजीं, क्योंकि क्षेत्रीय सेनाओं ने हवा में ही कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब ने भी जानकारी दी है कि उन्होंने अपनी सीमा की ओर आ रही कई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों को मार गिराया है। इन हमलों ने पूरे मिडिल-ईस्ट की सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर ला दिया है।

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हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर निशाना

वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेहरान ने जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ईरान के इस कदम का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए कड़े प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ईरान की सक्रियता ने बड़े संकट के संकेत दिए हैं।

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इजरायल के जवाबी और आक्रामक हमले तेज

दूसरी ओर, इजरायल ने ईरान और उसके समर्थित गुटों पर अपने हमलों को और तेज कर दिया है। इजरायली वायुसेना ने तेहरान में बसीज बलों (Basij forces) के ठिकानों पर बमबारी की है। साथ ही, लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्ला से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है। इजरायल का कहना है कि वह ईरान की हमला करने की क्षमता को पूरी तरह नष्ट करने तक अपनी कार्रवाई जारी रखेगा।

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