Iran War: होर्मुज में महायुद्ध की तैयारी! सीजफायर से इनकार, ब्रिटेन ने खोले सैन्य बेस—अब क्या होगा अगला कदम?

Iran war Strait of Hormuz crisi: मिडिल ईस्ट में जारी टकराव अब खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग में अब हालात ऐसे बन गए हैं कि वैश्विक स्तर पर एक बड़े युद्ध की आशंका जताई जा रही है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट गहराता जा रहा है, जहां से गुजरने वाले जहाज लगातार खतरे में हैं। इस तनाव ने तेल और गैस की सप्लाई पर भी बड़ा असर डाला है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

सीजफायर पर ट्रंप का सख्त रुख

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने साफ कर दिया है कि फिलहाल सीजफायर का कोई इरादा नहीं है। उनका कहना है कि जब एक पक्ष को पूरी तरह कमजोर किया जा रहा हो, तब सीजफायर का कोई मतलब नहीं होता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई पूरी कर लेता है, तो इजराइल भी युद्ध खत्म करने के लिए तैयार हो सकता है।

Iran War Strait of Hormuz crisis

ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज एक समय पर खुद ही खुल जाएगा, लेकिन इसके लिए कई देशों की मदद जरूरी होगी। उन्होंने चीन और जापान जैसे देशों से भी इस संकट में भूमिका निभाने की बात कही।

ब्रिटेन का बड़ा यू-टर्न, अब अमेरिका सैन्य ठिकानों का करेगा इस्तेमाल!

इस बीच ब्रिटेन ने अपनी नीति में बड़ा बदलाव करते हुए अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। पहले जहां प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर(Keir Starmer) इस फैसले को टाल रहे थे, वहीं अब हालात बदलने के बाद उन्होंने हरी झंडी दे दी है।

अब अमेरिका ब्रिटेन के 'आरएएफ फेयरफोर्ड' और हिंद महासागर में स्थित 'डिएगो गार्सिया' बेस का इस्तेमाल कर सकेगा। इन ठिकानों से ईरान के मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है, ताकि जहाजों पर हो रहे हमलों को रोका जा सके।

ब्रिटिश सरकार ने अपने फैसले को सामूहिक आत्मरक्षा का हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि यह कदम उन हमलों के जवाब में उठाया गया है, जो ईरान द्वारा सहयोगी देशों और जहाजों पर किए जा रहे हैं। इस फैसले के बाद अब अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और तेज हो सकती है।

NATO देशों पर भी बरसे ट्रंप

ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों पर भी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि NATO जैसे सैन्य संगठन अब तक इस संकट में खुलकर सामने नहीं आए हैं। उनका मानना है कि अगर अन्य देश मदद करें, तो होर्मुज में फंसी वैश्विक सप्लाई को जल्दी बहाल किया जा सकता है।

खतरनाक संकेत और आगे की रणनीति

ईरान के तेल निर्यात के बड़े केंद्र खार्ग द्वीप को लेकर भी अमेरिका की रणनीति साफ नहीं है। ट्रंप ने इशारों में कहा कि उनके पास योजना हो भी सकती है और नहीं भी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका मध्य पूर्व में बड़ी संख्या में सैनिक भेजने की तैयारी कर रहा है।

कुल मिलाकर हालात बेहद संवेदनशील हैं। होर्मुज में बढ़ता तनाव सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट का रूप ले सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह टकराव सीमित रहता है या फिर दुनिया एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ती है।

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