Iran US Tension: 'हमला हुआ तो राख कर देंगे सारे सैन्य ठिकाने', ईरान ने अमेरिका को दी खुली धमकी
Iran US tension 2026: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में स्पष्ट किया कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अपनी सुरक्षा और मिसाइल कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करेंगे। एक तरफ ओमान में कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, तो दूसरी तरफ इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राष्ट्रपति ट्रंप से होने वाली आगामी मुलाकात ने क्षेत्र में सरगर्मी बढ़ा दी है।
सैन्य धमकियों और घरेलू विरोध प्रदर्शनों के बीच, ईरान अपनी संप्रभुता और परमाणु अधिकारों को लेकर अडिग नजर आ रहा है।

मिसाइल कार्यक्रम पर अडिग रुख
अब्बास अराघची ने ओमान वार्ता के बाद साफ कर दिया कि ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम केवल रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए है और यह किसी भी अंतरराष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा नहीं होगा। ईरान का मानना है कि परमाणु मुद्दे के अलावा किसी भी अन्य सैन्य क्षमता पर बात करना उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ है। इजरायल द्वारा ईरान के मिसाइल परीक्षणों पर उठाए जा रहे सवालों को तेहरान ने दोहरा मापदंड बताया है, क्योंकि इजरायल खुद अपने हथियारों के जखीरे को लगातार बढ़ा रहा है।
ये भी पढ़ें: US Iran Tension 2026: ईरान की 'महायुद्ध' वाली धमकी से घबराए ट्रंप? अब हमले के बजाय मांग रहे समझौता
सैन्य तनाव और अमेरिकी चेतावनी
अरब सागर में अमेरिकी विमानवाहक पोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' की मौजूदगी ने युद्ध की आशंकाओं को हवा दे दी है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे "शक्ति के माध्यम से शांति" स्थापित करने का प्रयास बताया है। इसके जवाब में ईरान ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उसकी सीमाओं पर कोई हमला हुआ, तो वह क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में संकोच नहीं करेगा। यह सीधा टकराव क्षेत्र में एक बड़े सैन्य संकट की ओर इशारा कर रहा है।
ये भी पढ़ें: Donald Trump Iran Sanctions: ट्रंप का ईरान पर 'आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक', तेल साम्राज्य को कर दिया तबाह
इजरायल-अमेरिका गठबंधन और कूटनीति
प्रधानमंत्री नेतन्याहू की डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली बैठक को ईरान एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रहा है। इजरायल का मुख्य उद्देश्य अमेरिका पर दबाव बनाना है ताकि ईरान के सहयोगी संगठनों और उसके मिसाइल नेटवर्क पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकें। ईरान ने इस गठबंधन की आलोचना करते हुए कहा है कि विदेशी हस्तक्षेप केवल क्षेत्र की स्थिरता को नुकसान पहुंचाएगा। परमाणु समझौते को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की गहरी खाई बनी हुई है।
ये भी पढ़ें: Trump India Oil Deal: अब इस देश से तेल खरीदेगा भारत, ट्रंप ने किया 'डील' का खुलासा, सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
घरेलू अशांति और मानवाधिकारों का संकट
ईरान न केवल बाहरी दबाव, बल्कि आंतरिक विद्रोह का भी सामना कर रहा है। हालिया विरोध प्रदर्शनों में हुई मौतों के आंकड़ों ने दुनिया को चौंका दिया है। जहां ईरानी प्रशासन ने लगभग 3,000 मौतों की पुष्टि की है, वहीं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि यह संख्या 7,000 के करीब पहुंच चुकी है। हजारों की संख्या में हुई गिरफ्तारियों ने देश के भीतर असंतोष को और बढ़ा दिया है, जिससे सरकार के लिए बाहरी मोर्चे के साथ-साथ आंतरिक स्थिति संभालना भी मुश्किल हो रहा है।












Click it and Unblock the Notifications