ISIS के खिलाफ ईरान नहीं देगा अमेरिका का साथ

तेहरान। आईएसआईएस के खिलाफ जंग में अमेरिका मध्य पूर्व देशों का सहयोग मांग रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आईएस को खत्म करने की कसम खाई है। लिहाजा, इसके तहत अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने मध्य पूर्व में आईएस के खिलाफ सहयोगी देश ढ़ूढ़ने के लिए मध्य पूर्व की यात्रा भी की।

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मध्य पूर्व की इस यात्रा में केरी ने सऊदी अरब और क़तर समेत दस देशों का समर्थन हासिल कर लिया है। लेकिन ईरान ने इस्लामी स्टेट के खिलाफ सहयोग का अमेरिकी प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ईरान के सबसे बड़े धर्मगुरु अयातोल्लाह अली खमेनी ने सोमवार को यह स्पष्ट किया। ईरान में खमेनी का आदेश अंतिम माना जाता है।

ईरान नहीं है साथ

आईएसआईएस के खिलाफ इस लड़ाई में ईरान की महत्तवपूर्ण भूमिका है और इसका आईएस के ख़िलाफ़ इराक़ी सरकार को समर्थन अहम भूमिका निभा सकता है। ज़्यादा गंभीर समस्या सीरिया को लेकर है। ईरान अब भी उन देशों में से है जो असद शासन का समर्थन करते हैं।

खमेनी ने कहा, 'अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने ईरानी विदेश मंत्री मुहम्मद जवद जरीफ से सहयोग मांगा था। जरीफ ने साफ मना कर दिया था। अमेरिका के हाथ गंदे हैं। वह इराक और सीरिया में भी वैसे ही बिना अधिकार हमले करना चाहता है जैसे वह पाकिस्तान में कर रहा है।'

अमेरिका के साथ हैं 40 देश

उधर, कैरी ने रविवार को कहा कि अमेरिका को ईरान के सहयोग की जरूरत नहीं है क्योंकि 10 अरब देश अमेरिका के साथ हैं। अरब जगत के दस देश समेत तकरीबन 40 देशों ने इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट से लड़ने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

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