Iran New Supreme Leader: कौन बनेगा अगला Ali Khamenei? ईरान में कैसे चुना जाता है परमानेंट सुप्रीम लीडर?
New Supreme Leader: ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की अमेरिकी-इज़रायली के हमले में हत्या ने ईरान को 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सबसे बड़े राजनीतिक बदलावों में से एक की ओर धकेल दिया है। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए बड़ा झटका है। इस घटना के बाद देश में क्षेत्रीय तनाव और आंतरिक अनिश्चितता के बीच नए परमानेंट सुप्रीम लीडर के चयन की संवैधानिक प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई है।
तीन दशक का प्रभाव, और एक सुबह का हमला
करीब 30 साल तक ईरान की राजनीति और धार्मिक व्यवस्था पर मजबूत पकड़ रखने वाले खामेनेई की हत्या शनिवार सुबह हुई। मध्य तेहरान में उनके हाई-सिक्योरिटी आवासीय परिसर को निशाना बनाया गया। इस हमले में उनकी बेटी, दामाद, बहू और एक पोते सहित परिवार के कई सदस्य भी मारे गए। यानी यह सिर्फ राजनीतिक हमला नहीं था, बल्कि निजी स्तर पर भी गहरी क्षति पहुंचाने वाला वार था।

क्या है Assembly of Experts? जो चुनती है सुप्रीम लीडर
उत्तराधिकार की पूरी प्रक्रिया का केंद्र Assembly of Experts है। यही संस्था ईरान के सर्वोच्च राजनीतिक और धार्मिक पद के लिए व्यक्ति का चयन करती है। इसमें 88 सीरियर इस्लामी न्यायविद् और मौलवी शामिल होते हैं। इन्हें जनता द्वारा आठ साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
47 साल में सिर्फ दो परमानेंट सुप्रीम लीडर
1979 की क्रांति के बाद से ईरान में सिर्फ दो सुप्रीम लीडर हुए हैं- इस्लामी गणराज्य के संस्थापक Ayatollah Ruhollah Khomeini और उनके बाद 1989 से अली खामेनेई। ईरानी संविधान का अनुच्छेद 107 साफ कहता है कि नेता का चुनाव लोगों द्वारा चुने गए विशेषज्ञों के साथ रहता है। यानी Assembly of Experts को ही अंतिम अधिकार है। यह संस्था न सिर्फ नेता का चयन करती है, बल्कि उनके प्रदर्शन की निगरानी भी करती है और जरूरत पड़ने पर उन्हें पद से हटा भी सकती है।
मौजूदा नेतृत्व और 2024 के चुनाव
Assembly of Experts के हालिया चुनाव 2024 में हुए थे। फिलहाल इसकी अध्यक्षता अनुभवी मौलवी Mohammad Ali Movahedi Kermani कर रहे हैं। अब पूरा देश और दुनिया इस संस्था की अगली बैठक और फैसले पर नजर लगाए हुए है।
नया सुप्रीम लीडर कैसे चुना जाता है?
किसी भी संभावित उम्मीदवार को सबसे पहले Guardian Council द्वारा जांच और अनुमोदन से गुजरना पड़ता है। यही संस्था बड़े राजनीतिक पदों के उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग करती है। संविधान के अनुसार, सुप्रीम लीडर एक योग्य इस्लामी न्यायविद् होना चाहिए- न्यायप्रिय, धर्मनिष्ठ, राजनीतिक और सामाजिक मामलों में जानकार, और मजबूत फैसले लेने की क्षमता वाला होना चाहिए।
अगर कोई उम्मीदवार सभी मानदंडों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता, तो Assembly ऐसा व्यक्ति चुन सकती है जिसमें मजबूत नेतृत्व और राजनीतिक समझ दिखाई देती हो।
1989 का ऐतिहासिक चुनाव
3 जून 1989 को जब रुहोल्ला खुमैनी का निधन हुआ, तब Assembly of Experts एक बेहद अहम मोड़ पर इकट्ठा हुई। उस समय ईरान आठ साल के ईरान-इराक युद्ध से उबर रहा था। खामेनेई को उत्तराधिकारी के रूप में चुना गया। इसमें खुमैनी की व्यक्तिगत सिफारिश और भावनात्मक माहौल में भारी बहुमत से डाले गए वोटों की भूमिका थी।
औपचारिक मतदान से पहले कई नामों पर गोपनीय चर्चा हुई थी। ये बैठकें बंद दरवाजों के पीछे होती हैं और उनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती। हालांकि 1989 का सत्र रिकॉर्ड हुआ था, जिसमें खामेनेई को अपने चयन के बाद भावुक होते देखा गया था।
तैयारी सालों पहले से शुरू होती है
एक्सपर्ट की मानें तो नए सुप्रीम लीडर को चुनने की योजना अचानक नहीं बनती। Assembly के अंदर समितियां संभावित उम्मीदवारों का सालों तक मूल्यांकन करती हैं और एक शॉर्टलिस्ट तैयार रखती हैं। 1989 में खामेनेई को 74 में से 60 वोट मिले थे। उनके राष्ट्रपति के रूप में अनुभव, ईरान-इराक युद्ध के दौरान भूमिका और अपेक्षाकृत कम उम्र निर्णायक फैक्टर रहे।
इस बार क्यों मुश्किल है फैसला?
विश्लेषकों का मानना है कि 1989 के विपरीत इस बार कोई ऐसा मजबूत और सर्वमान्य चेहरा नहीं दिख रहा जो खामेनेई की राजनीतिक और धार्मिक पकड़ के बराबर हो। गैर-ईरानी मीडिया में कई नाम चर्चा में हैं, जिनमें उनके बेटे Mojtaba Khamenei का नाम भी शामिल है। लेकिन आकलन बताते हैं कि वह मुख्य दावेदारों में नहीं हैं। हमले में उनकी पत्नी की मौत हो गई थी, और उस समय वह परिसर में मौजूद नहीं थे।
हसन खुमैनी और अन्य नाम
एक और नाम जो विदेशी मीडिया में उछाला गया है, वह है Hassan Khomeini, जो इस्लामी गणराज्य ईरान के संस्थापक रुहोल्ला खुमैनी के पोते हैं। लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि उन पर भी गंभीरता से विचार नहीं किया जा रहा है।
एक संभावित उत्तराधिकारी पहले ही मारे जा चुके
पूर्व राष्ट्रपति Ebrahim Raisi को कई लोग संभावित उत्तराधिकारी मानते थे। लेकिन मई 2024 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई, जिससे एक प्रमुख नाम सूची से हट गया।
आगे क्या?
अब पूरा फोकस Assembly of Experts पर है। क्या वह जल्दी फैसला करेगी या लंबी विचार-विमर्श प्रक्रिया चलेगी? इतना तय है कि खामेनेई की हत्या ने ईरान को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है जहां हर फैसला आने वाले दशकों की दिशा तय कर सकता है। पश्चिम एशिया पहले से ही तनाव में है, और अब दुनिया की नजरें तेहरान पर टिकी हैं- क्योंकि नया सुप्रीम लीडर सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित करेगा।
अभी कौन संभाल रहा जिम्मेदारी?
खामेनेई की मौत के बाद अब ध्यान उस संवैधानिक प्रक्रिया पर है जो नए सुप्रीम लीडर का चयन करेगी। उनके कार्यालय ने रविवार को घोषणा की कि इस दौरान राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और Guardian Council के एक मौलवी संयुक्त रूप से सुप्रीम लीडर के कार्यालय के कामों को चलाएंगे। यह व्यवस्था अगले परमानेंट सुप्रीम लीडर के चुने जाने तक जारी रहेगी।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।
-
LPG Crisis: खत्म होगा रसोई गैस का संकट? होर्मुज से सुरक्षित निकला भारत का दो और जहाज, कब तक पहुंचेगा -
Iran War: ₹21 लाख करोड़ का झटका! ईरान जंग से हिली भारत की अर्थव्यवस्था, एक्सपर्ट बोले- अमेरिका ने कराया सबकुछ -
US-Iran War: Gulf में फंसे 1 करोड़ भारतीय? MADAD पोर्टल पर निकासी के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य? सच्चाई क्या है? -
Iran Israel War: 'भारत युद्ध रुकवा सकता है', खामेनेई के दूत ने कही ऐसी बात, टेंशन में ट्रंप -
Iran Vs America War: कब खत्म होगा अमेरिका ईरान युद्ध, ट्रंप के विदेश मंत्री ने बता दी तारीख -
Israel-Iran War: होर्मुज के बाद अब लाल सागर बंद करने की तैयारी, ईरान के खतरनाक प्लान लीक, भारत पर क्या असर? -
IDF Collapse Alert: इजरायल के आर्मी चीफ का दावा- 'टूट सकती है फौज', नहीं मिल रहे नए फौजी, घिरने लगे नेतन्याहू! -
Trump Iran Statement: 'हम ईरान में बहुत अच्छा कर रहे हैं', ट्रंप के इस बयान के क्या मायने? -
Hormuz China ships: ईरान ने चीन को दिया बड़ा झटका, होर्मुज में 2 बड़े चीनी जहाजों को खदेड़ा, टूट गई दोस्ती? -
OI Exclusive: कश्मीर में ईरान के लिए जुटाए पैसों का भारत के खिलाफ होगा इस्तेमाल? आतंकी लगा रहे सेंध! -
Strait of Hormuz: भारत को मिले सुरक्षित मार्ग पर बोले मनोज तिवारी, 'यह बहुत बड़ी कूटनीतिक सफलता' -
Nepal: बालेन बने नेपाल के नए 'शाह', सबसे युवा प्रधानमंत्री का खिताब किया अपने नाम, भारत से भी आई बधाई












Click it and Unblock the Notifications