Iran Conflict: ईरान में अब तख्तापलट की आशंका, राष्ट्रपति मसूद और IRGC के बीच युद्ध की रणनीति को लेकर संग्राम
Iran Conflict: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद देश के अंदर हालात लगातार बदल रहे हैं। लगातार एयर स्ट्राइक से जनजीवन बेहाल है और कामकाज ठप पड़ा हुआ है। इन सबके बीच ईरान में नेतृत्व को लेकर गंभीर राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। मौजूदा हालात में ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान दो अलग-अलग धड़ों में बंटा नजर आ रहा है। यह मतभेद खास तौर पर युद्ध की रणनीति और नए सुप्रीम लीडर के चुनाव को लेकर सामने आया है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि ईरान खाड़ी देशों पर हमले रोक देगा। उन्होंने अब तक हुए हमलों के लिए पड़ोसी देशों से माफी भी मांगी। उनका यह बयान क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। खुद उनके देश में इसे लेकर सहज स्थिति नहीं है और टकराव शुरू हो गया है।

Iran Conflict: राष्ट्रपति और IRCG के बीच मतभेद बढ़े
हालांकि, राष्ट्रपति के इस रुख के तुरंत बाद ईरान के न्यायपालिका प्रमुख मोहसेनी-एजेई ने बिल्कुल अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कुछ पड़ोसी देशों के इलाके का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए किया जा रहा है। ऐसे ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी।
दिलचस्प बात यह है कि पेजेश्कियान और एजेई दोनों ही उस तीन सदस्यीय अस्थायी नेतृत्व परिषद का हिस्सा हैं, जो मौजूदा समय में देश के प्रशासनिक फैसलों में भूमिका निभा रही है। इससे साफ संकेत मिलता है कि ईरानी नेतृत्व के भीतर रणनीति को लेकर गंभीर मतभेद मौजूद हैं।
Iran Conflict Update: सैन्य और राजनीतिक हलकों में भी असहमति
राष्ट्रपति के बयान के बाद ईरान के कई सैन्य और राजनीतिक नेताओं ने भी असहमति जताई है। संसद के स्पीकर और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कहा कि जब तक क्षेत्र में अमेरिका के सैन्य ठिकाने मौजूद रहेंगे, तब तक शांति संभव नहीं है।
कट्टरपंथी सांसद हामिद रसाई ने राष्ट्रपति के बयान को कमजोर और गैर-पेशेवर करार दिया। बढ़ते विरोध के बाद राष्ट्रपति कार्यालय ने सफाई देते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों से अगर हमले होते हैं तो उनका कड़ा जवाब दिया जाएगा।
Iran Supreme Leader: सुप्रीम लीडर को लेकर भी खींचतान
खामेनेई की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल नए सुप्रीम लीडर के चुनाव का है। इस मुद्दे पर भी ईरान के भीतर दो स्पष्ट धड़े दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ आईआरजीसी से जुड़ा कट्टरपंथी गुट, जबकि दूसरी ओर अपेक्षाकृत नरम रुख रखने वाला राष्ट्रपति का गुट।
कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने भी राष्ट्रपति के बयान की आलोचना की है। कुछ विश्लेषणों में यह तक कहा गया है कि जब तक नया सुप्रीम लीडर नहीं चुना जाता, तब तक देश की कमान मजबूत सैन्य नेतृत्व के हाथों में रहनी चाहिए। इन घटनाक्रमों से साफ है कि ईरान इस समय केवल बाहरी संघर्ष ही नहीं बल्कि आंतरिक राजनीतिक खींचतान के दौर से भी गुजर रहा है।
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