भारत के गुप्ता ब्रदर्स के 'अफ्रीका कांड' से पूर्व राष्ट्रपति गये जेल, अब इंटरपोल पड़ी पीछे
इंटरपोल ने साउथ अफ्रीका में गुप्ता भाईयों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर दिया है। जानिए क्या है गुप्ता ब्रदर्स का 'अफ्रीका कांड'।
जोहानिसबर्ग, जुलाई 06: उत्तर प्रदेश के रहने वाले गुप्ता भाईयों ने दक्षिण अफ्रीका में ऐसा कांड किया है कि वहां के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा को 15 महीनों के लिए जेल जाना पड़ा है। लेकिन, गुप्ता भाईय कांड करने के बाद कहां हैं, किसी को नहीं पता है, इसीलिए अब इंटरपोल ने गुप्ता बंधुओं के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। रिपोर्ट है कि तीनों गुप्ता बंधु अजय गुप्ता, अतुल गुप्ता और राजेश गुप्ता, दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा के बेहद करीबी थे और तीनो ने मिलकर दक्षिण अफ्रीका में भारी भ्रष्टाचार किया है और बहुत बड़ा घपला किया है। घपला करने के बाद तीनों भाई फरार हो चुके हैं, जबकि पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा को जेल भेज दिया गया है।

इंटरपोल ने जारी किया नोटिस
अपने बयान में प्रॉसीक्यूशन अथॉरिटी के प्रमुख जांचकर्ता हरमाइन क्रोन्ये ने कहा है कि इंटरपोल ने तीन भाईयों में से दो भाइयों अतुल और राजेश के खिलाफ "रेड नोटिस" जारी किया है। आपको बता दें कि रेड कॉर्नर नोटिस एक वैश्विक अलर्ट है, जो कानून लागू करने वालों को मुकदमा चलाने या सजा काटने के लिए मांगे गए व्यक्ति को गिरफ्तार करने और प्रत्यर्पण के लिए उन्हें हिरासत में लेने में सक्षम बनाता है। इंटरपोल की वेबसाइट के मुताबिक इंटरपोल ने दुनियाभर की सुरक्षा एजेंसियों से दोनों भाइयों को देखते ही हिरासत में लेने और दक्षिण अफ्रीका को प्रत्यर्पित करने की गुजारिश की है।

सहारणपुर की है गुप्ता फैमिली
अजय, अतुल और राजेश गुप्ता तीनों भाई हैं और ये तीनों भाई उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रहने वाले हैं। अपने पिता शिव कुमार के कहने पर तीनों भाई सन् 1993 में साउथ अफ्रीका आ गए। जोहांसबर्ग में इन तीनों भाईयों ने सहारा कंप्यूटर के नाम से अपना बिजनेस शुरू किया और उसके पार्ट्स बनाने की कंपनी शुरू की। देखते ही देखते इनका छोटा सा बिजनेस आगे बढ़ने लगा। साउथ अफ्रीका की राजनीति में भारत की गुप्ता फैमिली का खासा प्रभाव है और इसी प्रभाव की वजह से यहां के राष्ट्रपति जैकब जुमा पर कई तरह के आरोप लगते रहते हैं। साल 2016 में जुमा पर आरोप लगा कि गुप्ता परिवार ने उन्हें सरकार में वित्त मंत्री की नियुक्ति के लिए सलाह दी थी। हालांकि, बाद में राष्ट्रपति जुमा ने इस बात से इंकार कर दिया था कि गुप्ता परिवार उनकी सरकार में कोई मंत्री नहीं नियुक्त करा सकता है।

अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी में अकाउंट
रिपोर्ट के मुताबिक गुप्ता बंधुओं के खिलाफ साल 2016 में पहली बार भ्रष्टाचार की शिकायत आई थी और फिर खुलासा हुआ था कि दक्षिण अफ्रीका की सरकार से सांठगांठ होने की वजह से उनके ऊपर कोई मुकदमा नहीं चला। वहीं, आरोप तो यहां तक लगे कि दक्षिण अफ्रीका में कई बड़े अधिकारी अपना ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए गुप्ता ब्रदर्स से संपर्क करते थे। यहां तक की साउथ अफ्रीका के कई मंत्री भी गुप्ता ब्रदर्स से अच्छा संबंध बनाकर रखते थे। हालांकि, जब गुप्ता बंधुओं के बुरे दिनों की शुरूआत हुई तो कई खुलासे होने लगे। पता चला कि तीनों भाईयों के अकाउंट अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी अरब तक में हैं और इन खातों से अरबों रुपये की लेनदेन की जाती है। इन अकाउंट्स के जरिए करोड़ों रुपयों का अवैध लेनदेन भी किया गया था।

अफ्रीका में मिला नया नाम Zupta
अफ्रीका में गुप्ता ब्रदर्स ने अपना रसूख इतना बना लिया था कि इन्हें अफ्रीका में ज़ुप्ता कहा जाने लगा था। खासकर पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा को इन भाईयों ने इस कदर वश में कर रखा था कि पूर्व राष्ट्रपति ने इन भाईयों के लिए अपनी पार्टी तक से बैर मोल ले लिया। अफ्रीकी नेशनल पार्टी के सदस्य पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा का अपनी पार्टी में कड़ा विरोध होने लगा। अफ्रीकी मीडिया ने अपनी रिपोर्ट्स में दावा किया था कि गुप्ता ब्रदर्स ने अपनी कंपनी में पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा के बेटों और उनकी पत्नी को बड़े पदों पर बिठा रखा था और उन्हें काफी मोटी तनख्वाह दी जाती थी।

जब शुरू हुए बुरे दिन
कहते हैं, आदमी के कर्मों का फल इसी दुनिया में मिल जाता है और गुप्ता ब्रदर्स के साथ भी यही हुआ। जब गुप्ता ब्रदर्स के घपलों से दक्षिणी अफ्रीका की राजनीति में उबाल आ गया, तो फिर इन भाईयों को साउथ अफ्रीका से पीछा छुड़ाकर भागना पड़ा। कहा जाता है कि साउथ अफ्रीका से फरार होने के बाद गुप्ता ब्रदर्स सऊदी अरब में हैं और साउथ अफ्रीका में उन्होंने अपने कई कारोबार को बेच लिया है। वहीं, जो संपत्ति बची हुई है, अब दक्षिण अफ्रीका की सरकार उन संपत्तियों की नीलामी करवा रही है। ब्रिटेन में गुप्ता ब्रदर्स की संपत्तियों को सीज कर दिया गया है, वहीं अमेरिका की सरकार भी साउथ अफ्रीका की सरकार को जांच में सहयोग कर रही है।
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